Monday, 21 Sep 2026 | 08:19 PM

Trending :

EXCLUSIVE

रूस की तरफ से मध्यस्थ बनेंगे पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़:यूक्रेन के सरकारी बैंक से चल रहा विवाद; रूस पर संपत्ति छीनने का आरोप

रूस की तरफ से मध्यस्थ बनेंगे पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़:यूक्रेन के सरकारी बैंक से चल रहा विवाद; रूस पर संपत्ति छीनने का आरोप

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के सरकारी बैंक ओश्चादबैंक से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला यूक्रेन और रूस के बीच 1998 में हुए द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत चल रहा है। ओश्चादबैंक का कहना है कि 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले की वजह से उसे दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में अपनी संपत्तियां और कारोबार गंवाना पड़ा। इन इलाकों में ओश्चादबैंक की बैंक शाखाएं, ATM, दफ्तर, जमीन, और दूसरे कारोबारी संसाधन थे। रूस के कब्जे के बाद बैंक इन संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सका। कई शाखाएं बंद हो गईं और बैंक का कारोबार ठप पड़ गया। बैंक के मुताबिक, इससे उसे भारी नुकसान हुआ। इस ही वजह से बैंक ने कई सौ मिलियन डॉलर का दावा किया है। तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा सुनवाई बैंक ने जुलाई 2025 में रूस को विवाद का नोटिस भेजा था। रूस की ओर से जवाब नहीं मिलने पर उसने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से पहले भी भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई पूर्व जज अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और ट्रिब्यूनल में अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पहले रूस के दो प्रस्तावों को ठुकरा चुके थे चंद्रचूड़ रूस इससे पहले भी डीवाई चंद्रचूड़ को दो बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश विवादों में अपनी ओर से मध्यस्थ बनाना चाहता था। रिपोर्ट के मुताबिक, पहला मामला जर्मनी की ऊर्जा कंपनी विंटरशाल डीया से जुड़ा था। इस कंपनी ने रूस पर आरोप लगाया था कि यूक्रेन युद्ध के बाद उसकी रूस में मौजूद गैस और तेल प्रोजेक्ट्स पर कब्जा कर लिया गया, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। दूसरा मामला यूक्रेन की सरकारी बिजली ट्रांसमिशन कंपनी उक्रएनरगो का था। कंपनी का आरोप है कि रूस के कब्जे वाले इलाकों में उसकी बिजली से जुड़ी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया या उन पर कब्जा कर लिया गया। इन दोनों मामलों में रूस ने डीवाई चंद्रचूड़ से अपनी ओर से मध्यस्थ बनने का अनुरोध किया था। हालांकि, उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की थी। अब तक दोनों मामलों का अंतिम नतीजा नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता क्या है? जब दो देशों की कंपनियों या किसी देश और विदेशी कंपनी के बीच कारोबार या निवेश को लेकर बड़ा विवाद हो जाता है, तो वे हर बार अदालत नहीं जाते। कई बार दोनों पक्ष मिलकर कुछ विशेषज्ञ चुनते हैं। यही विशेषज्ञ दोनों पक्षों की बात सुनते हैं और फैसला देते हैं। इसे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कहा जाता है। इसे आसान उदाहरण से समझिए मान लीजिए दो कंपनियों के बीच करोड़ों रुपये का विवाद हो गया। अगर वे कोर्ट जाएंगी, तो फैसला आने में कई साल लग सकते हैं। इसलिए दोनों मिलकर कुछ निष्पक्ष विशेषज्ञ चुन लेती हैं। ये विशेषज्ञ दोनों पक्षों की बात सुनते हैं और तय करते हैं कि किसका दावा सही है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में क्या होता है? 1. दोनों पक्ष अपने-अपने विशेषज्ञ चुनते हैं: आमतौर पर दोनों पक्ष एक-एक मध्यस्थ चुनते हैं। इसके बाद दोनों मिलकर तीसरे मध्यस्थ का चयन करते हैं। ये तीनों मिलकर एक ट्रिब्यूनल बनाते हैं। 2. दोनों पक्ष अपनी बात रखते हैं: दोनों पक्ष अपने दस्तावेज, सबूत और दलीलें ट्रिब्यूनल के सामने पेश करते हैं। 3. ट्रिब्यूनल फैसला सुनाता है: सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ट्रिब्यूनल अपना फैसला देता है। इसे ‘अवार्ड’ कहा जाता है। 4. फैसले का पालन करना होता है: ज्यादातर मामलों में ट्रिब्यूनल का फैसला दोनों पक्षों के लिए मानना जरूरी होता है। यह अदालत से कैसे अलग है? भारत से जुड़े दो चर्चित ट्रिब्यूनल मामले 1. केयर्न एनर्जी बनाम भारत क्या मामला था? ब्रिटेन की कंपनी केयर्न एनर्जी ने 2006 में भारत में अपने कारोबार में कुछ बदलाव किए थे। उस समय सरकार ने इस पर कोई टैक्स नहीं लगाया। लेकिन 2012 में भारत सरकार ने नया टैक्स कानून बनाया और कहा कि यह कानून पुराने सौदों पर भी लागू होगा। इसके बाद सरकार ने केयर्न से हजारों करोड़ रुपये का टैक्स मांगा और उसकी कुछ संपत्तियां भी अपने कब्जे में ले लीं। फैसला क्या आया? कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में शिकायत की। 2020 में ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत की टैक्स वसूली सही नहीं थी। उसने भारत को कंपनी को करीब 1.2 अरब डॉलर (करीब 9 हजार करोड़ रुपए) लौटाने का आदेश दिया। फिर क्या हुआ? 2021 में भारत सरकार ने यह पुराना टैक्स कानून वापस ले लिया। इसके बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया और मामला खत्म हो गया 2. वोडाफोन बनाम भारत क्या मामला था? 2007 में वोडाफोन ने भारत की एक मोबाइल कंपनी खरीदी थी। उस समय इस सौदे पर कोई टैक्स नहीं लगा। लेकिन 2012 में सरकार ने नया कानून बनाकर कहा कि पुराने सौदों पर भी टैक्स लगेगा। इसके बाद वोडाफोन से करीब 2.2 अरब डॉलर (करीब 16 हजार करोड़ रुपए) टैक्स मांगा गया। फैसला क्या आया? वोडाफोन भी अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल पहुंची। 2020 में ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत सरकार को इतने साल बाद पुराने सौदे पर टैक्स नहीं लगाना चाहिए था। इसलिए फैसला वोडाफोन के पक्ष में आया। फिर क्या हुआ? 2021 में भारत सरकार ने यह कानून वापस ले लिया। इसके बाद वोडाफोन और भारत के बीच विवाद भी खत्म हो गया। —————–

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
भोपाल के 3 डॉक्टरों के खिलाफ जिला कोर्ट में परिवाद:लिंग जांच से जुड़े नियमों की अनदेखी, स्वास्थ्य विभाग पहुंचा कोर्ट; एक डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक भी शामिल

March 11, 2026/
12:05 am

भोपाल में गर्भ में बच्चे का लिंग पता लगाने पर रोक से जुड़े पीसीपीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन के मामले में...

अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 15% घटी:सख्त इमिग्रेशन नीतियों के बीच 2025-26 में कमी; पिछले साल 3.63 लाख स्टूडेंट गए थे

August 25, 2026/
3:26 am

अमेरिका में 2025-26 सेशन में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 15% घट गई है। यह...

US President Donald Trump said negotiations with Iran are progressing behind closed doors and insisted that only a small circle inside his administration knows the true status of the talks. (Reuters)

May 1, 2026/
3:37 pm

आखरी अपडेट:01 मई, 2026, 15:37 IST इससे एक दिन पहले सीएम ममता बनर्जी ने भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम का दौरा किया था...

तिलक का 45 गेंद में शतक, जयसूर्या की बराबरी की:बुमराह को पहली बॉल पर विकेट, रबाडा ने सूर्या को बोल्ड किया; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

April 21, 2026/
4:30 am

मुंबई इंडियंस ने IPL 2026 के 30वें मैच में गुजरात टाइटंस को 99 रन से हरा दिया। अहमदाबाद में तिलक...

Aqib Nabi Joins For Afghanistan Test

June 2, 2026/
2:12 pm

नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच से पहले...

भोपाल में तीसरी मंजिल से गिरी लिफ्ट, 7 लोग घायल:सागर प्लाजा में हुई घटना, दो के पांव में गंभीर चोटें

April 29, 2026/
7:26 pm

भोपाल के एमपी नगर जोन-2 के सागर प्लाजा के लिफ्ट बुधवार की शाम को तीसरी मंजिल से गिर गई। इस...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

रूस की तरफ से मध्यस्थ बनेंगे पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़:यूक्रेन के सरकारी बैंक से चल रहा विवाद; रूस पर संपत्ति छीनने का आरोप

रूस की तरफ से मध्यस्थ बनेंगे पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़:यूक्रेन के सरकारी बैंक से चल रहा विवाद; रूस पर संपत्ति छीनने का आरोप

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के सरकारी बैंक ओश्चादबैंक से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला यूक्रेन और रूस के बीच 1998 में हुए द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत चल रहा है। ओश्चादबैंक का कहना है कि 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले की वजह से उसे दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में अपनी संपत्तियां और कारोबार गंवाना पड़ा। इन इलाकों में ओश्चादबैंक की बैंक शाखाएं, ATM, दफ्तर, जमीन, और दूसरे कारोबारी संसाधन थे। रूस के कब्जे के बाद बैंक इन संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सका। कई शाखाएं बंद हो गईं और बैंक का कारोबार ठप पड़ गया। बैंक के मुताबिक, इससे उसे भारी नुकसान हुआ। इस ही वजह से बैंक ने कई सौ मिलियन डॉलर का दावा किया है। तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा सुनवाई बैंक ने जुलाई 2025 में रूस को विवाद का नोटिस भेजा था। रूस की ओर से जवाब नहीं मिलने पर उसने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से पहले भी भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई पूर्व जज अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और ट्रिब्यूनल में अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पहले रूस के दो प्रस्तावों को ठुकरा चुके थे चंद्रचूड़ रूस इससे पहले भी डीवाई चंद्रचूड़ को दो बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश विवादों में अपनी ओर से मध्यस्थ बनाना चाहता था। रिपोर्ट के मुताबिक, पहला मामला जर्मनी की ऊर्जा कंपनी विंटरशाल डीया से जुड़ा था। इस कंपनी ने रूस पर आरोप लगाया था कि यूक्रेन युद्ध के बाद उसकी रूस में मौजूद गैस और तेल प्रोजेक्ट्स पर कब्जा कर लिया गया, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। दूसरा मामला यूक्रेन की सरकारी बिजली ट्रांसमिशन कंपनी उक्रएनरगो का था। कंपनी का आरोप है कि रूस के कब्जे वाले इलाकों में उसकी बिजली से जुड़ी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया या उन पर कब्जा कर लिया गया। इन दोनों मामलों में रूस ने डीवाई चंद्रचूड़ से अपनी ओर से मध्यस्थ बनने का अनुरोध किया था। हालांकि, उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की थी। अब तक दोनों मामलों का अंतिम नतीजा नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता क्या है? जब दो देशों की कंपनियों या किसी देश और विदेशी कंपनी के बीच कारोबार या निवेश को लेकर बड़ा विवाद हो जाता है, तो वे हर बार अदालत नहीं जाते। कई बार दोनों पक्ष मिलकर कुछ विशेषज्ञ चुनते हैं। यही विशेषज्ञ दोनों पक्षों की बात सुनते हैं और फैसला देते हैं। इसे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कहा जाता है। इसे आसान उदाहरण से समझिए मान लीजिए दो कंपनियों के बीच करोड़ों रुपये का विवाद हो गया। अगर वे कोर्ट जाएंगी, तो फैसला आने में कई साल लग सकते हैं। इसलिए दोनों मिलकर कुछ निष्पक्ष विशेषज्ञ चुन लेती हैं। ये विशेषज्ञ दोनों पक्षों की बात सुनते हैं और तय करते हैं कि किसका दावा सही है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में क्या होता है? 1. दोनों पक्ष अपने-अपने विशेषज्ञ चुनते हैं: आमतौर पर दोनों पक्ष एक-एक मध्यस्थ चुनते हैं। इसके बाद दोनों मिलकर तीसरे मध्यस्थ का चयन करते हैं। ये तीनों मिलकर एक ट्रिब्यूनल बनाते हैं। 2. दोनों पक्ष अपनी बात रखते हैं: दोनों पक्ष अपने दस्तावेज, सबूत और दलीलें ट्रिब्यूनल के सामने पेश करते हैं। 3. ट्रिब्यूनल फैसला सुनाता है: सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ट्रिब्यूनल अपना फैसला देता है। इसे ‘अवार्ड’ कहा जाता है। 4. फैसले का पालन करना होता है: ज्यादातर मामलों में ट्रिब्यूनल का फैसला दोनों पक्षों के लिए मानना जरूरी होता है। यह अदालत से कैसे अलग है? भारत से जुड़े दो चर्चित ट्रिब्यूनल मामले 1. केयर्न एनर्जी बनाम भारत क्या मामला था? ब्रिटेन की कंपनी केयर्न एनर्जी ने 2006 में भारत में अपने कारोबार में कुछ बदलाव किए थे। उस समय सरकार ने इस पर कोई टैक्स नहीं लगाया। लेकिन 2012 में भारत सरकार ने नया टैक्स कानून बनाया और कहा कि यह कानून पुराने सौदों पर भी लागू होगा। इसके बाद सरकार ने केयर्न से हजारों करोड़ रुपये का टैक्स मांगा और उसकी कुछ संपत्तियां भी अपने कब्जे में ले लीं। फैसला क्या आया? कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में शिकायत की। 2020 में ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत की टैक्स वसूली सही नहीं थी। उसने भारत को कंपनी को करीब 1.2 अरब डॉलर (करीब 9 हजार करोड़ रुपए) लौटाने का आदेश दिया। फिर क्या हुआ? 2021 में भारत सरकार ने यह पुराना टैक्स कानून वापस ले लिया। इसके बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया और मामला खत्म हो गया 2. वोडाफोन बनाम भारत क्या मामला था? 2007 में वोडाफोन ने भारत की एक मोबाइल कंपनी खरीदी थी। उस समय इस सौदे पर कोई टैक्स नहीं लगा। लेकिन 2012 में सरकार ने नया कानून बनाकर कहा कि पुराने सौदों पर भी टैक्स लगेगा। इसके बाद वोडाफोन से करीब 2.2 अरब डॉलर (करीब 16 हजार करोड़ रुपए) टैक्स मांगा गया। फैसला क्या आया? वोडाफोन भी अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल पहुंची। 2020 में ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत सरकार को इतने साल बाद पुराने सौदे पर टैक्स नहीं लगाना चाहिए था। इसलिए फैसला वोडाफोन के पक्ष में आया। फिर क्या हुआ? 2021 में भारत सरकार ने यह कानून वापस ले लिया। इसके बाद वोडाफोन और भारत के बीच विवाद भी खत्म हो गया। —————–

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.