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Weight Loss Surgery: जब डाइट और एक्सरसाइज से वजन कम नहीं होता, तब बेरिएट्रिक सर्जरी एक प्रभावी विकल्प बनती है. यह सर्जरी पाचन तंत्र में बदलाव कर शरीर की कैलोरी अवशोषित करने की क्षमता को कम करती है, जिससे न केवल वजन घटता है, बल्कि डायबिटीज और बीपी जैसी बीमारियों में भी सुधार होता है. हालांकि इस सर्जरी के कुछ रिस्क भी होते हैं.
वेट लॉस सर्जरी के जरिए वजन 30 से 40% तक कम हो सकता है.
All About Weight Loss Surgery: मोटापा एक गंभीर समस्या है और कई बीमारियों की जड़ है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनहेल्दी खान-पान के कारण मोटापा लगातार बढ़ता जा रहा है. जब डाइट, एक्सरसाइज और दवाइयां वजन कम करने में फेल हो जाती हैं, तब वेट लॉस सर्जरी आखिरी विकल्प होता है. मेडिकल की भाषा में इसे बेरिएट्रिक सर्जरी (Bariatric Surgery) कहा जाता है. यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य शरीर के मेटाबॉलिज्म में सुधार करना और मोटापे से जुड़ी गंभीर बीमारियों जैसे टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और स्लीप एपनिया के जोखिम को कम करना है. यह सर्जरी उन लोगों के लिए सुझाई जाती है, जिनका बीएमआई 35 या 40 से अधिक होता है.
नई दिल्ली के सर गंगाराम सिटी हॉस्पिटल के प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. रमन शर्मा ने News18 को बताया कि बेरिएट्रिक सर्जरी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जो आपके पाचन तंत्र में बदलाव करके वजन घटाने में मदद करती है. इसके मुख्य रूप से दो तरीके होते हैं. पहला पेट के आकार को छोटा करना, जिससे आप एक बार में कम खाना खा सकें. दूसरा छोटी आंत के एक हिस्से को बायपास करना. इससे शरीर कम कैलोरी और पोषक तत्वों को अवशोषित करे. सबसे सामान्य प्रक्रियाओं में गैस्ट्रिक स्लीव और गैस्ट्रिक बायपास शामिल हैं. यह सर्जरी शरीर में भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घ्रेलिन के स्तर को भी कम करती है, जिससे व्यक्ति को बार-बार भूख नहीं लगती है. इससे लोगों का वजन तेजी से कम होने लगता है.
डॉक्टर ने बताया कि इस सर्जरी का सबसे बड़ा फायदा वजन कम होना है. सर्जरी के बाद पहले 12 से 18 महीनों में मरीज अपने अतिरिक्त शरीर के वजन को 30% से 40% तक कम कर सकता है. वजन कम होने के साथ ही मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में जबरदस्त सुधार होता है. कई मामलों में देखा गया है कि सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद मरीजों के डायबिटीज कंट्रोल में पॉजिटिव असर देखा गया और उनका ब्लड प्रेशर सामान्य होने लगा. इसके अलावा यह सर्जरी जोड़ों के दर्द को कम करने, हार्ट डिजीज के जोखिम को घटाने और व्यक्ति के आत्मविश्वास व लाइफ क्वालिटी को बढ़ाने में बेहद मददगार साबित होती है.
प्लास्टिक सर्जन के मुताबिक किसी भी सर्जरी की तरह वेट लॉस सर्जरी में भी कुछ रिस्क होते हैं. सर्जरी के बाद इंफेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है. ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है और कुछ दवाएं भी दी जाती हैं. लॉन्ग टर्म में शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, क्योंकि शरीर खाने को पहले की तरह अवशोषित नहीं कर पाता है. कुछ मरीजों में डंपिंग सिंड्रोम, गॉलब्लैडर स्टोन या हर्निया की समस्या हो सकती है. हालांकि आधुनिक लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक तकनीक के आने से ये रिस्क अब 1% से भी कम रह गए हैं. यह सर्जरी अब काफी सुरक्षित मानी जाती है.
एक्सपर्ट की मानें तो भारत में वेट लॉस सर्जरी का खर्च अस्पताल, शहर, सर्जन के अनुभव और टेक्नोलॉजी पर निर्भर करता है. आमतौर पर इस सर्जरी का खर्च 2 लाख से 6 लाख रुपये के आसपास होता है. अच्छी बात यह है कि अब कई स्वास्थ्य बीमा कंपनियां बेरिएट्रिक सर्जरी को कवर करती हैं, लेकिन ऐसा तभी होता है, जब कोई व्यक्ति यह सर्जरी मेडिकल कंडीशंस के कारण करवाता है. आजकल सरकारी अस्पतालों में भी यह सुविधा कम खर्च पर उपलब्ध है. यह समझना भी जरूरी है कि इस सर्जरी के बाद आपको अपना वजन कंट्रोल रखने के लिए लाइफस्टाइल, खानपान और एक्सरसाइज का ध्यान रखना होगा.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें













































