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अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा का लेख:मां होने का अर्थ बच्चों को मुश्किलों से बचाना नहीं, उनसे लड़ना सिखाना है

अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा का लेख:मां होने का अर्थ बच्चों को मुश्किलों से बचाना नहीं, उनसे लड़ना सिखाना है

मैंने नहीं सोचा था कि मां बनना मुझे एक साथ सबसे मजबूत और सबसे संवेदनशील दोनों महसूस कराएगा। बेटियों के आने के बाद मेरी जिंदगी का केंद्र बदल गया। मेरा हर फैसला, हर जॉब, हर रूटीन, हर जोखिम एक ही सवाल से गुजरने लगा- मैं उनके लिए कैसी दुनिया बनाने जा रही हूं? मेरी इच्छा थी कि मेरी बेटियां इस बात को समझते हुए बड़ी हों कि वे जैसी हैं, वैसी ही अच्छी हैं। वे बुद्धिमान, आत्मनिर्भर, अनुशासित, संवेदनशील हों और अपनी आवाज उठाने से भी न डरें। मैं नहीं चाहती थी कि मशहूर होना या व्हाइट हाउस में रहना उन्हें खास बना दे और वे जिम्मेदारियों से बचने लगें। बराक और मैं सजग थे। हमारी बेटियां बिस्तर खुद ठीक करती थीं। सफाई खुद करती थीं। मैं उन्हें कहती थी कि दुनिया खुद को तुम्हारे हिसाब से नहीं बदलेगी। मैं राजकुमारियां नहीं, जिम्मेदार इंसान तैयार करना चाहती थी। एक मां होने की सबसे कठिन बात यह समझना है कि आपका काम अस्थायी है। आप बच्चों की रक्षा करते हैं, उन्हें दिशा देते हैं, सुधारते हैं, उनकी चिंता करते हैं और फिर धीरे-धीरे आपको उन्हें छोड़ना पड़ता है। माता-पिता होने का अर्थ है बच्चों को आत्मनिर्भर बनने के लिए तैयार करना। यह दर्दनाक होता है, क्योंकि एक समय के बाद बच्चे पूरी तरह आपके नहीं रहते। वे अलग पहचान वाले इंसान बन जाते हैं। बेटियों के जन्म से पहले मैंने गर्भपात का दर्द झेला था। मैं आहत और शर्मिंदा महसूस करती थी। लगता था कि मैं असफल हो गई हूं। बाद में एहसास हुआ कि कितनी ही महिलाएं अपने भीतर कई दर्द लिए रहती हैं, जबकि बाहर से प्रकट करती हैं कि सबकुछ ठीक है। महिलाओं से अपेक्षा की जाती है कि वे यह सब चुपचाप सहें और फिर भी सहज और संतुलित दिखाई दें। और फिर लगातार बना रहने वाला अपराधबोध भी है। मां हमेशा खुद को असंभव पैमानों पर परखती रहती है। क्या मैं पर्याप्त समय दे रही हूं? क्या मैं बहुत सख्त हूं? या बहुत नरम? हमेशा कोई न कोई ऐसा दिखता है जो आपसे बेहतर तरीके से मां की भूमिका निभा रहा है। दूसरी तरफ मैंने कभी यह नहीं माना कि मां बनने का मतलब अपने व्यक्तित्व को मिटा देना है। मैं चाहती थी कि मेरी बेटियां मुझे एक पूर्ण इंसान के रूप में देखें, जिसकी अपनी महत्वाकांक्षाएं हों, जिम्मेदारियां हों, दोस्त हों, विचार हों और ऐसा काम हो जिसकी उसे गहरी परवाह हो। मां बनने ने मुझे बेहतर पेशेवर बनाया और पेशेवर जीवन ने मुझे बेहतर मां बनाया। आज बेटियों को बड़ा करना आसान नहीं है। वे ऐसी दुनिया में बढ़ रही हैं जो पहले से ज्यादा शोर, दबाव और दखल से भरी हुई है। सोशल मीडिया है, लगातार मूल्यांकन है, सौंदर्य मानक हैं, डर है और हर दिशा से लड़कियों पर पड़ता दबाव है। एक मां के रूप में आप बच्चों को इन सबसे पूरी तरह बचा नहीं सकतीं। लेकिन आप उन्हें मजबूत आधार दे सकती हैं। उन्हें आलोचनात्मक सोच, गरिमा और संघर्ष से उबरने की शक्ति सिखाती हैं। मैंने सीखा कि डर परवरिश का आधार नहीं हो सकता। हम बच्चों को सुरक्षित घेरे में बंद कर उनके रास्ते की हर बाधा नहीं हटा सकते। बच्चों को निराशा का अनुभव होना चाहिए। उन्हें जवाबदेही सीखनी चाहिए। उन्हें कभी-कभी असफल भी होना चाहिए ताकि वे दोबारा उठना सीख सकें। ताकत कठिनाइयों से बचने में नहीं आती। ताकत तब आती है जब आप कठिनाइयों से गुजरते हैं और उनसे उबरते हैं। मातृत्व के बारे में जो कुछ मैंने सीखा, उसका बड़ा हिस्सा मुझे अपनी मां मेरियन रॉबिन्सन से मिला। उन्होंने परिवार को स्थिरता दी। वे शांत रहती थीं और मुझे शांति बनाए रखने में अक्सर कठिनाई होती थी। उन्होंने मुझे सिखाया कि बच्चों को हर समय दखल की जरूरत नहीं होती। कई बार उन्हें सिर्फ सुरक्षा, ध्यान और बिना शर्त प्यार चाहिए होता है। समय के साथ मुझे एहसास हुआ कि मातृत्व राह दिखाने का नाम है। मेरा मानना है कि मांएं केवल परिवार नहीं बनातीं, वे भावनात्मक संस्कृति भी गढ़ती हैं। बच्चे दुनिया में जो मूल्य लेकर जाते हैं, उनकी शुरुआत घर से होती है। मातृत्व सुंदर है, लेकिन यह अनिश्चित, भावनात्मक और विनम्र बना देने वाला अनुभव भी है। कई बार मुझे खुद पर संदेह हुआ। लगा कि मैं सबको निराश कर रही हूं। लेकिन मां होने के एहसास ने मुझे ऐसी दृढ़ता सिखाई, जैसी किसी और अनुभव ने नहीं सिखाई। अगर एक चीज थी जो मैं अपनी बेटियों को देना चाहती थी, तो वह पूर्णता नहीं थी। वह था- अपनी कहानी को स्वीकार करने का आत्मविश्वास, अपनी आवाज पर भरोसा, असफलताओं से उबरने की क्षमता और दुनिया में यह जानते हुए आगे बढ़ना कि हम वास्तव में कौन हैं।

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अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा का लेख:मां होने का अर्थ बच्चों को मुश्किलों से बचाना नहीं, उनसे लड़ना सिखाना है

मैंने नहीं सोचा था कि मां बनना मुझे एक साथ सबसे मजबूत और सबसे संवेदनशील दोनों महसूस कराएगा। बेटियों के आने के बाद मेरी जिंदगी का केंद्र बदल गया। मेरा हर फैसला, हर जॉब, हर रूटीन, हर जोखिम एक ही सवाल से गुजरने लगा- मैं उनके लिए कैसी दुनिया बनाने जा रही हूं? मेरी इच्छा थी कि मेरी बेटियां इस बात को समझते हुए बड़ी हों कि वे जैसी हैं, वैसी ही अच्छी हैं। वे बुद्धिमान, आत्मनिर्भर, अनुशासित, संवेदनशील हों और अपनी आवाज उठाने से भी न डरें। मैं नहीं चाहती थी कि मशहूर होना या व्हाइट हाउस में रहना उन्हें खास बना दे और वे जिम्मेदारियों से बचने लगें। बराक और मैं सजग थे। हमारी बेटियां बिस्तर खुद ठीक करती थीं। सफाई खुद करती थीं। मैं उन्हें कहती थी कि दुनिया खुद को तुम्हारे हिसाब से नहीं बदलेगी। मैं राजकुमारियां नहीं, जिम्मेदार इंसान तैयार करना चाहती थी। एक मां होने की सबसे कठिन बात यह समझना है कि आपका काम अस्थायी है। आप बच्चों की रक्षा करते हैं, उन्हें दिशा देते हैं, सुधारते हैं, उनकी चिंता करते हैं और फिर धीरे-धीरे आपको उन्हें छोड़ना पड़ता है। माता-पिता होने का अर्थ है बच्चों को आत्मनिर्भर बनने के लिए तैयार करना। यह दर्दनाक होता है, क्योंकि एक समय के बाद बच्चे पूरी तरह आपके नहीं रहते। वे अलग पहचान वाले इंसान बन जाते हैं। बेटियों के जन्म से पहले मैंने गर्भपात का दर्द झेला था। मैं आहत और शर्मिंदा महसूस करती थी। लगता था कि मैं असफल हो गई हूं। बाद में एहसास हुआ कि कितनी ही महिलाएं अपने भीतर कई दर्द लिए रहती हैं, जबकि बाहर से प्रकट करती हैं कि सबकुछ ठीक है। महिलाओं से अपेक्षा की जाती है कि वे यह सब चुपचाप सहें और फिर भी सहज और संतुलित दिखाई दें। और फिर लगातार बना रहने वाला अपराधबोध भी है। मां हमेशा खुद को असंभव पैमानों पर परखती रहती है। क्या मैं पर्याप्त समय दे रही हूं? क्या मैं बहुत सख्त हूं? या बहुत नरम? हमेशा कोई न कोई ऐसा दिखता है जो आपसे बेहतर तरीके से मां की भूमिका निभा रहा है। दूसरी तरफ मैंने कभी यह नहीं माना कि मां बनने का मतलब अपने व्यक्तित्व को मिटा देना है। मैं चाहती थी कि मेरी बेटियां मुझे एक पूर्ण इंसान के रूप में देखें, जिसकी अपनी महत्वाकांक्षाएं हों, जिम्मेदारियां हों, दोस्त हों, विचार हों और ऐसा काम हो जिसकी उसे गहरी परवाह हो। मां बनने ने मुझे बेहतर पेशेवर बनाया और पेशेवर जीवन ने मुझे बेहतर मां बनाया। आज बेटियों को बड़ा करना आसान नहीं है। वे ऐसी दुनिया में बढ़ रही हैं जो पहले से ज्यादा शोर, दबाव और दखल से भरी हुई है। सोशल मीडिया है, लगातार मूल्यांकन है, सौंदर्य मानक हैं, डर है और हर दिशा से लड़कियों पर पड़ता दबाव है। एक मां के रूप में आप बच्चों को इन सबसे पूरी तरह बचा नहीं सकतीं। लेकिन आप उन्हें मजबूत आधार दे सकती हैं। उन्हें आलोचनात्मक सोच, गरिमा और संघर्ष से उबरने की शक्ति सिखाती हैं। मैंने सीखा कि डर परवरिश का आधार नहीं हो सकता। हम बच्चों को सुरक्षित घेरे में बंद कर उनके रास्ते की हर बाधा नहीं हटा सकते। बच्चों को निराशा का अनुभव होना चाहिए। उन्हें जवाबदेही सीखनी चाहिए। उन्हें कभी-कभी असफल भी होना चाहिए ताकि वे दोबारा उठना सीख सकें। ताकत कठिनाइयों से बचने में नहीं आती। ताकत तब आती है जब आप कठिनाइयों से गुजरते हैं और उनसे उबरते हैं। मातृत्व के बारे में जो कुछ मैंने सीखा, उसका बड़ा हिस्सा मुझे अपनी मां मेरियन रॉबिन्सन से मिला। उन्होंने परिवार को स्थिरता दी। वे शांत रहती थीं और मुझे शांति बनाए रखने में अक्सर कठिनाई होती थी। उन्होंने मुझे सिखाया कि बच्चों को हर समय दखल की जरूरत नहीं होती। कई बार उन्हें सिर्फ सुरक्षा, ध्यान और बिना शर्त प्यार चाहिए होता है। समय के साथ मुझे एहसास हुआ कि मातृत्व राह दिखाने का नाम है। मेरा मानना है कि मांएं केवल परिवार नहीं बनातीं, वे भावनात्मक संस्कृति भी गढ़ती हैं। बच्चे दुनिया में जो मूल्य लेकर जाते हैं, उनकी शुरुआत घर से होती है। मातृत्व सुंदर है, लेकिन यह अनिश्चित, भावनात्मक और विनम्र बना देने वाला अनुभव भी है। कई बार मुझे खुद पर संदेह हुआ। लगा कि मैं सबको निराश कर रही हूं। लेकिन मां होने के एहसास ने मुझे ऐसी दृढ़ता सिखाई, जैसी किसी और अनुभव ने नहीं सिखाई। अगर एक चीज थी जो मैं अपनी बेटियों को देना चाहती थी, तो वह पूर्णता नहीं थी। वह था- अपनी कहानी को स्वीकार करने का आत्मविश्वास, अपनी आवाज पर भरोसा, असफलताओं से उबरने की क्षमता और दुनिया में यह जानते हुए आगे बढ़ना कि हम वास्तव में कौन हैं।

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