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India to Get 100 Industrial Parks

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नई दिल्ली16 मिनट पहले

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केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को ‘भव्य (भारत औद्योगिक विकास योजना) योजना’ के दिशा-निर्देश लॉन्च कर दिए हैं। जिसके तहत सरकार देश भर में 100 इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की तैयारी कर रही है।

इस योजना के लिए ₹33,660 करोड़ का वित्तीय परिव्यय यानी फाइनेंशियल आउटले तय किया गया है, जो राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क के जरिए मैन्युफैक्चरिंग और इन्वेस्टमेंट हब बनाएगी।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने करीब दो महीने पहले इस योजना को मंजूरी दी थी। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि राज्य सरकारें औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराएंगी।

अगले 4 महीनों में राज्यों से मांगे आवेदन, पहले फेज में 20 पार्कों की अर्जी आएगी

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि पहले दो महीनों में 20 इंडस्ट्रियल पार्कों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इसके बाद के दो महीनों में अन्य 30 पार्कों के लिए आवेदन लिए जाएंगे, जबकि बचे हुए 50 पार्कों को अगले फेज में शामिल किया जाएगा।

सरकार अगले चार महीनों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) से आवेदन आमंत्रित कर रही है। केंद्र सरकार की योजना शुरुआत में 50 इंडस्ट्रियल पार्कों के लिए आवेदन हासिल करने की है, ताकि देश भर में इस योजना को तेजी से लागू किया जा सके।

नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत होगा विकास

इस योजना का उद्देश्य पहले से स्वीकृत जमीन, तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटीग्रेटेड सर्विसेज के साथ निवेश के लिए तैयार इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाना है। इससे उद्योगों को अपना कामकाज जल्दी शुरू करने में मदद मिलेगी।

इन पार्कों का विकास नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के स्ट्रक्चर के तहत राज्यों और प्राइवेट सेक्टर के प्लेयर्स के साथ मिलकर किया जाएगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रति एकड़ ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता

सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इन इंडस्ट्रियल पार्कों का आकार 100 से 1,000 एकड़ के बीच होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए सरकार प्रति एकड़ ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता देगी।

इस सहायता के तहत आंतरिक सड़कें, अंडरग्राउंड यूटिलिटीज, ड्रेनेज सिस्टम, कॉमन ट्रीटमेंट फैसिलिटीज, वेयरहाउसिंग, टेस्टिंग लैब्स और श्रमिकों के लिए आवास की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पहाड़ी राज्यों के लिए 25 एकड़ जमीन पर भी इंडस्ट्रियल पार्क को मंजूरी दी जा सकती है।

कनेक्टिविटी सुधारने के लिए बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी सपोर्ट

केंद्र सरकार ने मौजूदा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के साथ कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट के 25 प्रतिशत तक बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट का प्रस्ताव भी दिया है।

इस योजना के तहत प्रोजेक्ट का चयन एक चैलेंज-बेस्ड प्रोसेस के जरिए किया जाएगा, जो निवेश के लिए तैयार और रिफॉर्म-ओरिएंटेड प्रस्तावों पर केंद्रित होगा।

राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा ने जताई रुचि

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो राज्य जमीन, पानी और बिजली जैसी बेहतर सुविधाएं देंगे, वे निवेशकों को ज्यादा आकर्षित कर सकते हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा ने इस योजना में रुचि दिखाई है।

राज्यों के पास प्राइवेट सेक्टर के प्लेयर्स के साथ साझेदारी करके प्रस्ताव सौंपने का भी प्रावधान है, जिसके तहत केंद्र सरकार ₹50 लाख प्रति एकड़ की सहायता प्रदान करेगी।

राज्यों को सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम बनाने के निर्देश

जल्दी मंजूरी सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPVs) स्थापित करने, प्लानिंग अथॉरिटीज को नोटिफाई करने और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम बनाने के लिए कहा गया है।

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने उम्मीद जताई है कि अगले तीन सालों में ये 50 पार्क पूरी तरह चालू (ऑपरेशनलाइज्ड) हो जाएंगे।

पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत होगा काम

ये इंडस्ट्रियल पार्क पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं। इनका फोकस मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, कुशल लास्ट-माइल एक्सेस और इंटीग्रेटेड अंडरग्राउंड यूटिलिटी कॉरिडोर्स पर होगा, ताकि मेंटेनेंस से जुड़ी बाधाओं को कम किया जा सके। सरकार ने कहा कि इन पार्कों में ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल रिसोर्स के उपयोग के प्रावधान भी शामिल होंगे।

DPIIT के तहत NICDC संभालेगी जिम्मेदारी

मार्च में जारी एक बयान के अनुसार, डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के तहत नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NICDC) इस योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी संभालेगी।

NICDC वर्तमान में 13 राज्यों में 20 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स को लागू कर रही है और टेक्सटाइल मिनिस्ट्री के तहत सात पीएम मित्रा (PM MITRA) पार्कों के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी के रूप में भी काम कर रही है।

क्लस्टर-बेस्ड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा

सरकार का कहना है कि इस योजना से क्लस्टर-बेस्ड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे मैन्युफैक्चरर्स, सप्लायर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स को एक-दूसरे के करीब काम करने का मौका मिलेगा, जिससे घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

क्या है प्लग-एंड-प्ले मॉडल और NICDC

प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क: इसका मतलब है कि उद्योगों को जमीन, बिजली, पानी, सड़क और अन्य जरूरी मंजूरियों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार पहले से ही सारा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करके देगी, कंपनियों को बस अपनी मशीनें लगानी हैं और प्रोडक्शन शुरू करना है। इससे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलता है।

NICDC क्या है?: नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन भारत में औद्योगिक गलियारों के विकास की देखरेख करने वाली नोडल एजेंसी है। यह देश के लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए काम करती है।

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इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में CNG की कीमतें ₹1 किलो बढ़ गई हैं। इस बदलाव के बाद दिल्ली में CNG अब ₹81.09 प्रति किलो मिलेगी। पिछले 9 दिन में यह तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले सरकार ने 15 मई को CNG के दाम ₹2 और फिर 18 मई को ₹1 बढ़ाए थे। पूरी खबर पढ़ें…

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इस योजना के लिए ₹33,660 करोड़ का वित्तीय परिव्यय यानी फाइनेंशियल आउटले तय किया गया है, जो राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क के जरिए मैन्युफैक्चरिंग और इन्वेस्टमेंट हब बनाएगी।

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इन पार्कों का विकास नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के स्ट्रक्चर के तहत राज्यों और प्राइवेट सेक्टर के प्लेयर्स के साथ मिलकर किया जाएगा।

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इस सहायता के तहत आंतरिक सड़कें, अंडरग्राउंड यूटिलिटीज, ड्रेनेज सिस्टम, कॉमन ट्रीटमेंट फैसिलिटीज, वेयरहाउसिंग, टेस्टिंग लैब्स और श्रमिकों के लिए आवास की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पहाड़ी राज्यों के लिए 25 एकड़ जमीन पर भी इंडस्ट्रियल पार्क को मंजूरी दी जा सकती है।

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इस योजना के तहत प्रोजेक्ट का चयन एक चैलेंज-बेस्ड प्रोसेस के जरिए किया जाएगा, जो निवेश के लिए तैयार और रिफॉर्म-ओरिएंटेड प्रस्तावों पर केंद्रित होगा।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो राज्य जमीन, पानी और बिजली जैसी बेहतर सुविधाएं देंगे, वे निवेशकों को ज्यादा आकर्षित कर सकते हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा ने इस योजना में रुचि दिखाई है।

राज्यों के पास प्राइवेट सेक्टर के प्लेयर्स के साथ साझेदारी करके प्रस्ताव सौंपने का भी प्रावधान है, जिसके तहत केंद्र सरकार ₹50 लाख प्रति एकड़ की सहायता प्रदान करेगी।

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मार्च में जारी एक बयान के अनुसार, डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के तहत नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NICDC) इस योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी संभालेगी।

NICDC वर्तमान में 13 राज्यों में 20 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स को लागू कर रही है और टेक्सटाइल मिनिस्ट्री के तहत सात पीएम मित्रा (PM MITRA) पार्कों के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी के रूप में भी काम कर रही है।

क्लस्टर-बेस्ड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा

सरकार का कहना है कि इस योजना से क्लस्टर-बेस्ड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे मैन्युफैक्चरर्स, सप्लायर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स को एक-दूसरे के करीब काम करने का मौका मिलेगा, जिससे घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

क्या है प्लग-एंड-प्ले मॉडल और NICDC

प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क: इसका मतलब है कि उद्योगों को जमीन, बिजली, पानी, सड़क और अन्य जरूरी मंजूरियों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार पहले से ही सारा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करके देगी, कंपनियों को बस अपनी मशीनें लगानी हैं और प्रोडक्शन शुरू करना है। इससे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलता है।

NICDC क्या है?: नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन भारत में औद्योगिक गलियारों के विकास की देखरेख करने वाली नोडल एजेंसी है। यह देश के लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए काम करती है।

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इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में CNG की कीमतें ₹1 किलो बढ़ गई हैं। इस बदलाव के बाद दिल्ली में CNG अब ₹81.09 प्रति किलो मिलेगी। पिछले 9 दिन में यह तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले सरकार ने 15 मई को CNG के दाम ₹2 और फिर 18 मई को ₹1 बढ़ाए थे। पूरी खबर पढ़ें…

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