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इन 8 मछलियों को खाना है बेहद फायदेमंद, प्रोटीन से होती हैं भरपूर, ये 6 फिश गलती से भी डाइट में न करें शामिल

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Fish benefits and side effects: मछली का सेवन करना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है. कई तरह की मछलियां होती हैं, जिनकी शारीरिक बनावट, फायदे, स्वाद सभी थोड़े-बहुत एक-दूसरे से अलग होते हैं. प्रोटीन से भरपूर मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन डी, बी12, आयोडीन, सेलेनियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम आदि होते हैं, जो दिल, दिमाग, आंखों, मसल्स, स्किन, बाल आदि को कई तरह लाभ पहुंचाते हैं. हालांकि, कुछ लोगों को सीफूड खाने से एलर्जी भी हो जाती है. ऐसे में मछली का सेवन भी ध्यान से करना चाहिए. कुछ मछलियां हेल्दी होती हैं, तो कुछ के सेवन से नुकसान भी होता है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आपकी सेहत के लिए कौन सी मछली अच्छी है और कौन सी हानिकारक.

कौन सी मछली खानी चाहिए, कौन सी नहीं?
जो लोग नॉनवेज खाना पसंद करते हैं, वे मछली भी सप्ताह में एक-दो बार जरूर खाते होंगे. प्रोटीन से भरपूर मछली मसल्स को हेल्दी बनाता है. एक्सपर्ट्स भी डाइट में मछली को शामिल करने की सलाह देते हैं. वेबएमडी में छपी एक खबर के अनुसार, सभी मछलियां एक जैसी नहीं होती हैं, इसलिए ये जानना बेहद जरूरी है कि आप जो मछली खाते हैं, उससे आपको लाभ हो रहा है या नुकसान.

ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछली खाएं
आमतौर पर उन मछलियों का सेवन करना अधिक लाभदायक है, जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड अधिक मात्रा में हो. वसायुक्त, ऑयली फिश में मौजूद ओमेगा3 फैटी एसिड हार्ट को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं. यदि आप सप्ताह में सिर्फ 2 बार सीफूड का सेवन करते हैं, तो इससे हार्ट डिजीज होने का जोखिम लगभग 36 प्रतिशत तक कम हो सकता है. ओमेगा-3 अल्जाइमर, स्ट्रोक जैसे रोगों से भी बचाता है. इसके लिए आप निम्न मछलियों का सेवन कर सकते हैं-

सैमन
हिलसा
एंकोवीज़
सार्डिन
ट्राउट

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

कम फैट वाली बेस्ट मछली
लो फैट वाले सी फूड में फैट से भरपूर सी फूड की तुलना में कम कैलोरी मौजूद होती है और प्रोटीन हाई होता है. इसमें कॉड, तिलापिया, फ्लॉन्डर, सोल जैसी लो फैट मछलियों में लो कैलोरी होती है. आप अपनी डाइट में सी फूड शामिल करना चाहते हैं तो तिलापिया और कॉड फिश शामिल कर सकते हैं.

झींगा मछली बेस्ट ऑप्शन
काफी लोगों को झींगा (shrimp) खाना पसंद होता है, लेकिन कुछ लोग इससे परहेज करते हैं. संभवत: इसकी बनावट की वजह से. झींगा और प्रॉन्स सी फूड में एक बेस्ट विकल्प हो सकते हैं. इनमें पारा और कैलोरी काफी कम होती है. प्रोटीन से भरपूर होती हैं. हालांकि, इनमें अन्य मछलियों की तुलना में कोलेस्ट्रॉल लेवल अधिक होता है. साथ ही ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा भी काफी कम होती है.

पारा से भरपूर मछलियों का सेवन है खतरनाक
जिन मछलियों में पारा (Mercury) का लेवल हाई होता है, उनका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं. ये वयस्कों में मस्तिष्क और तंत्रिक तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है. छोटे बच्चों को भी पारा काफी नुकसान पहुंचा सकती है. कौन सी मछलियों में हाई पारा की मात्रा होती है-

स्वोर्डफ़िश
मार्लिन
शार्क
टाइलफ़िश

किंग मैकेरल नुकसानदायक
वैसे तो मैकेरल में ओमेगा-3 काफी होता है और इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है, लेकिन किंग मैकेरल के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि इनमें पारे की मात्रा काफी अधिक होती है. खासकर, प्रेग्नेंट महिलाएं, ब्रेस्टफीड कराने वाली मांएं, छोटे बच्चों को ये बिल्कुल खाने के लिए नहीं देना चाहिए.

फिश ऑरेंज रफि (Orange Roughy) बेहद हानिकारक
ऑरेंज रफि को स्लाइमहेड भी कहते हैं. इस मछली की खास बात ये है कि ये 150 साल तक भी जीवित रह सकती है. हालांकि, इसमें पारा काफी अधिक होता है, ऐसे में इस तरह की मछली के सेवन से परहेज ही करना बेहतर है.

टूना की विभिन्न किस्मों में भी हो सकता है पारा
मैकेरल की ही तरह टून की अलग-अलग किस्मों में भी पारे का लेवल अलग-अलग मात्रा में हो सकता है. जैसे ब्लूफिन और बिगआई टूना के सेवन से बचना ही बेहतर है. प्रोटीन से भरपूर लाइट टून का सेवन करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है.

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कौन सी मछली खानी चाहिए, कौन सी नहीं?
जो लोग नॉनवेज खाना पसंद करते हैं, वे मछली भी सप्ताह में एक-दो बार जरूर खाते होंगे. प्रोटीन से भरपूर मछली मसल्स को हेल्दी बनाता है. एक्सपर्ट्स भी डाइट में मछली को शामिल करने की सलाह देते हैं. वेबएमडी में छपी एक खबर के अनुसार, सभी मछलियां एक जैसी नहीं होती हैं, इसलिए ये जानना बेहद जरूरी है कि आप जो मछली खाते हैं, उससे आपको लाभ हो रहा है या नुकसान.

ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछली खाएं
आमतौर पर उन मछलियों का सेवन करना अधिक लाभदायक है, जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड अधिक मात्रा में हो. वसायुक्त, ऑयली फिश में मौजूद ओमेगा3 फैटी एसिड हार्ट को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं. यदि आप सप्ताह में सिर्फ 2 बार सीफूड का सेवन करते हैं, तो इससे हार्ट डिजीज होने का जोखिम लगभग 36 प्रतिशत तक कम हो सकता है. ओमेगा-3 अल्जाइमर, स्ट्रोक जैसे रोगों से भी बचाता है. इसके लिए आप निम्न मछलियों का सेवन कर सकते हैं-

सैमन
हिलसा
एंकोवीज़
सार्डिन
ट्राउट

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

कम फैट वाली बेस्ट मछली
लो फैट वाले सी फूड में फैट से भरपूर सी फूड की तुलना में कम कैलोरी मौजूद होती है और प्रोटीन हाई होता है. इसमें कॉड, तिलापिया, फ्लॉन्डर, सोल जैसी लो फैट मछलियों में लो कैलोरी होती है. आप अपनी डाइट में सी फूड शामिल करना चाहते हैं तो तिलापिया और कॉड फिश शामिल कर सकते हैं.

झींगा मछली बेस्ट ऑप्शन
काफी लोगों को झींगा (shrimp) खाना पसंद होता है, लेकिन कुछ लोग इससे परहेज करते हैं. संभवत: इसकी बनावट की वजह से. झींगा और प्रॉन्स सी फूड में एक बेस्ट विकल्प हो सकते हैं. इनमें पारा और कैलोरी काफी कम होती है. प्रोटीन से भरपूर होती हैं. हालांकि, इनमें अन्य मछलियों की तुलना में कोलेस्ट्रॉल लेवल अधिक होता है. साथ ही ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा भी काफी कम होती है.

पारा से भरपूर मछलियों का सेवन है खतरनाक
जिन मछलियों में पारा (Mercury) का लेवल हाई होता है, उनका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं. ये वयस्कों में मस्तिष्क और तंत्रिक तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है. छोटे बच्चों को भी पारा काफी नुकसान पहुंचा सकती है. कौन सी मछलियों में हाई पारा की मात्रा होती है-

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मार्लिन
शार्क
टाइलफ़िश

किंग मैकेरल नुकसानदायक
वैसे तो मैकेरल में ओमेगा-3 काफी होता है और इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है, लेकिन किंग मैकेरल के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि इनमें पारे की मात्रा काफी अधिक होती है. खासकर, प्रेग्नेंट महिलाएं, ब्रेस्टफीड कराने वाली मांएं, छोटे बच्चों को ये बिल्कुल खाने के लिए नहीं देना चाहिए.

फिश ऑरेंज रफि (Orange Roughy) बेहद हानिकारक
ऑरेंज रफि को स्लाइमहेड भी कहते हैं. इस मछली की खास बात ये है कि ये 150 साल तक भी जीवित रह सकती है. हालांकि, इसमें पारा काफी अधिक होता है, ऐसे में इस तरह की मछली के सेवन से परहेज ही करना बेहतर है.

टूना की विभिन्न किस्मों में भी हो सकता है पारा
मैकेरल की ही तरह टून की अलग-अलग किस्मों में भी पारे का लेवल अलग-अलग मात्रा में हो सकता है. जैसे ब्लूफिन और बिगआई टूना के सेवन से बचना ही बेहतर है. प्रोटीन से भरपूर लाइट टून का सेवन करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है.

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