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US Approves F-35 Fighter Jet Deal for Saudi Arabia

US Approves F-35 Fighter Jet Deal for Saudi Arabia

4 मिनट पहले

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दे दी है। इन विमानों की कीमत करीब 24 अरब डॉलर यानी ₹2.3 लाख करोड़ है। हालांकि, डील पूरी होने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है।

इस बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चिंता जताई है कि F-35 की संवेदनशील तकनीक चीन के हाथ लग सकती है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) की एक रिपोर्ट में इस खतरे का जिक्र किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन सऊदी अरब में जासूसी करके या वहां की सेना के साथ अपने सहयोग के जरिए F-35 की तकनीक हासिल करने की कोशिश कर सकता है।

सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने नवंबर 2025 में अमेरिका का दौरा किया था। इस दौरान दोनों देशों के बीच F-35 डील पर सहमति बनी थी।

सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने नवंबर 2025 में अमेरिका का दौरा किया था। इस दौरान दोनों देशों के बीच F-35 डील पर सहमति बनी थी।

F-35 की कौन-सी तकनीक की चिंता?

F-35 अमेरिका का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है। इसमें बेहद आधुनिक रडार और निगरानी सिस्टम लगे हैं।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को डर है कि अगर चीन को इन सिस्टम से जुड़ी जानकारी मिल गई तो अमेरिकी सैन्य तकनीक को नुकसान हो सकता है।

इसलिए रिपोर्ट में कहा गया है कि F-35 से जुड़ी जगहों पर सिर्फ अमेरिकी और सऊदी अधिकारियों और अधिकृत कर्मचारियों को ही जाने की अनुमति होनी चाहिए।

चीन से सऊदी की बढ़ती दोस्ती चिंता की वजह

सऊदी अरब के चीन के साथ पहले से सैन्य और तकनीकी संबंध हैं। सऊदी चीन से बैलिस्टिक मिसाइलें भी खरीदता है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, चीन सऊदी को मिसाइल बनाने और उनका इस्तेमाल बेहतर करने में भी मदद कर रहा है।

सऊदी के टेलीकॉम और दूसरे ढांचे में चीन की कंपनियों हुआवे और ZTE के उपकरण भी इस्तेमाल होते हैं। अमेरिकी एजेंसियों ने इन उपकरणों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

UAE को F-35 बेचने की डील रोकनी पड़ी थी

अमेरिका को अरब देशों को F-35 देने में चीन से जुड़ी चिंता पहले भी रही है। 2020 में ट्रम्प प्रशासन ने UAE को F-35 बेचने पर सहमति दी थी।

उस समय भी अमेरिकी एजेंसियों ने UAE के चीन के साथ बढ़ते सैन्य और तकनीकी संबंधों को लेकर चिंता जताई थी। बाद में वह बिक्री प्रक्रिया रोक दी गई थी।

सऊदी अरब को F-35 देने पर इजराइल ने भी चिंता जताई है। इजराइल फिलहाल मिडिल-ईस्ट का एकमात्र देश है जिसके पास F-35 विमान हैं।

अमेरिका की नीति रही है कि मिडिल-ईस्ट में इजराइल की सैन्य बढ़त बनी रहे। इसलिए सऊदी को F-35 देने के मामले में यह भी देखा जा रहा है कि इससे इजराइल की सैन्य बढ़त पर असर न पड़े।

फाइटर जेट्स की डिलीवरी में कई साल लगेंगे

अमेरिकी विदेश विभाग ने जून में 48 F-35 विमानों और एक अतिरिक्त इंजन की बिक्री का प्रस्ताव कांग्रेस की दो समितियों को भेजा था।

F-35 बनाने वाली अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन है। विमान तैयार करने और उनकी डिलीवरी में कई साल लग सकते हैं। यानी ट्रम्प प्रशासन की मंजूरी के बावजूद सऊदी को विमान तुरंत नहीं मिलेंगे।

सऊदी अरब लंबे समय से F-35 खरीदना चाहता था। अमेरिका और सऊदी के बीच कई दशकों से सैन्य सहयोग है और सऊदी अमेरिकी हथियारों का बड़ा खरीदार है।

———————–

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F-35 बनाने वाली अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन है। विमान तैयार करने और उनकी डिलीवरी में कई साल लग सकते हैं। यानी ट्रम्प प्रशासन की मंजूरी के बावजूद सऊदी को विमान तुरंत नहीं मिलेंगे।

सऊदी अरब लंबे समय से F-35 खरीदना चाहता था। अमेरिका और सऊदी के बीच कई दशकों से सैन्य सहयोग है और सऊदी अमेरिकी हथियारों का बड़ा खरीदार है।

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