दतिया की सेवढ़ा तहसील क्षेत्र में बीते सप्ताह हुई ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। 42 गांवों में गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। हालत यह है कि खेतों में अब भी पानी भरा हुआ है और खड़ी फसल सड़कर नष्ट हो रही है। किसान न तो फसल काट पा रहे हैं और न ही उसमें से एक दाना निकालने की उम्मीद बची है। दैनिक भास्कर टीम ने आलमपुर बुजुर्ग, जरौली, दिगुवा सहित कई गांवों का दौरा किया। जहां किसानों ने बताया कि 7 दिन बीत जाने के बाद भी खेतों में जलभराव बना हुआ है। गेहूं पूरी तरह सड़ चुकी है, जिससे खाने के लिए अनाज तक नहीं बचा। वहीं पशुओं के लिए भूसे का भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। किसानों का कहना है कि अब हालात ऐसे बन गए हैं कि उन्हें अपने पशु बेचने तक की नौबत आ गई है। परिवार के भरण-पोषण के साथ बेटियों की शादी जैसी जिम्मेदारियां भी उनके सामने बड़ी चुनौती बन गई हैं। आरोप- कई गांवों में सर्वे नहीं हुआ
ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अभी तक कई गांवों में सर्वे टीम नहीं पहुंची है। किसान मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन सर्वे में देरी से उन्हें राहत मिलने पर भी संशय बना हुआ है। किसानों का दर्द है कि फसल पूरी तरह खत्म हो चुकी है, लेकिन खेतों की सफाई के लिए भी अब उन्हें अलग से खर्च करना पड़ेगा। इधर, जनप्रतिनिधि और नेता केवल आश्वासन दे रहे हैं। जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। मामले की लेकर अपर कलेक्टर महेंद्र सिंह कपचे ने बताया कि सर्वे टिम लगी हुई है, जो जल्द सर्वे कर जांच रिपोर्ट सौंपेगी।














































