Wednesday, 28 Oct 2026 | 11:39 AM

Trending :

कभी पटना में बर्तन धोए, अब बिहार से पहले मेडलिस्ट:वीजा और पारिवारिक समस्याओं को झेलते हुए 4×400 मीटर में पीयूष ने रचा इतिहास

कभी पटना में बर्तन धोए, अब बिहार से पहले मेडलिस्ट:वीजा और पारिवारिक समस्याओं को झेलते हुए 4x400 मीटर में पीयूष ने रचा इतिहास

बिहार के रोहतास जिले के बंजारी गांव के 19 वर्षीय पीयूष राज ने संघर्ष से सफलता की नई मिसाल पेश की है। पीयूष ने हांगकांग में आयोजित एशियन जूनियर चैम्पियनशिप की 4×400 मीटर रिले रेस में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इसके साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथलेटिक्स मेडल जीतने वाले बिहार के पहले एथलीट बन गए हैं। पीयूष का सफर मुश्किलों भरा रहा है। नक्सल प्रभावित इलाके से आने वाले पीयूष जब महज 9 साल के थे, तब एक सड़क हादसे में उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार चलाने के लिए पीयूष और उनके भाई ने घर में ही आटा चक्की चलाई। 15 साल की उम्र में आंखों में बड़ा सपना लिए पीयूष राजधानी पटना पहुंचे। उनके पास सिर्फ 3000 रुपए थे, जो जल्द ही खत्म हो गए। पैसे न होने पर उन्होंने बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारी रवींद्रन शंकरण से मदद मांगी। काम के बदले पीयूष को पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के हॉस्टल की कैंटीन में नौकरी मिल गई। पीयूष बताते हैं, ‘मैं सुबह 5 से 8 बजे तक ट्रेनिंग करता था। फिर दोपहर 3 बजे तक कैंटीन में बर्तन धोता, पोंछा लगाता और खिलाड़ियों को खाना परोसता था। शाम को फिर ट्रेनिंग करता और रात 9 बजे तक वापस कैंटीन का काम संभालता।’ सेना की तैयारी करने वाले लड़कों के साथ दौड़ने वाले पीयूष को फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ देखकर असली प्रेरणा मिली। उनका शारीरिक बदलाव भी हैरान करने वाला था। शुरुआत में पीयूष महज 5 फीट 3 इंच और 53 किलो के दुबले-पतले लड़के थे। लेकिन उन्होंने खुद को 5 फीट 9 इंच के मजबूत धावक में ढाल लिया। हांगकांग का सफर आसान नहीं था। पहले वीजा की समस्या के कारण उन्हें एयरपोर्ट से लौटा दिया गया। अपनी व्यक्तिगत रेस से कुछ ही घंटे पहले वह वहां पहुंचे और थकान के कारण बाहर हो गए। मिक्स्ड रिले में डिस्क्वालिफाई होने पर वह बेहोश तक हो गए थे। लेकिन आखिरी दिन 4×400 मीटर मेंस रिले में पीयूष ने अपना जलवा बिखेरा। उन्होंने रेस के पहले लेग में 45.9 सेकंड का शानदार समय निकाला और टीम को ब्रॉन्ज मेडल जिताकर नया जूनियर नेशनल रिकॉर्ड बना दिया। स्टेडियम में गूंजा ‘एक बिहारी सौ पे भारी’ पीयूष याद करते हुए कहते हैं, ‘स्टेडियम में बिहार के कई लोग मौजूद थे। जब उन्हें पता चला कि मैं भारत के लिए दौड़ रहा हूं, तो वे जोर-जोर से ‘एक बिहारी सौ पे भारी’ के नारे लगाने लगे। यह मेरे लिए एक बहुत ही भावुक और खास पल था।’ अब पीयूष का अगला लक्ष्य इस साल व्यक्तिगत रेस में 46 सेकंड से कम समय निकालना है। वे जल्द ही तिरुवनंतपुरम में राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा बनेंगे। वे कहते हैं, ‘अब मुझे पीछे नहीं देखना है, बस आगे ही आगे जाना है।’

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई

July 24, 2026/
1:00 pm

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 24 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक...

अजय देवगन की मूवी में भोजपुरी सिंगर की एंट्री:3 साल में हारमोनियम पकड़ी, 5 साल में पहला एल्बम बनाया; नीलकमल सिंह को कैसे मिली धमाल-4

July 11, 2026/
5:00 am

पवन सिंह, खेसारी लाल यादव, अक्षरा सिंह के बाद अब भोजपुरी के एक और सिंगर नीलकमल सिंह की बॉलीवुड में...

authorimg

April 13, 2026/
5:44 pm

Last Updated:April 13, 2026, 17:44 IST Govardhan Parikrama : गर्मियों में गोवर्धन परिक्रमा मार्ग की 21 किमी यात्रा आस्था का...

मंदसौर में गुरुवार को 5 घंटे बिजली कटौती:कालिदास मार्ग, पुराना बस स्टैंड, अम्बेडकर चौराहा समेत कई इलाकों में गुल रहेगी बत्ती

April 8, 2026/
11:07 pm

मंदसौर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में गुरुवार को बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद रहेगी। सहायक यंत्री के अनुसार 11...

authorimg

February 22, 2026/
12:51 pm

होमताजा खबरDelhi दिल्‍ली में इंटरनेशनल ड्रग सिंडिकेट का जाल, 513 किलो नशीली दवाएं जब्‍त Last Updated:February 22, 2026, 12:51 IST...

भास्कर IPL रैंकिंग- चेन्नई या मुंबई, कौन है ऑलटाइम नंबर-1:दिल्ली-पंजाब से आगे विराट की RCB, पिछले चार साल में गिल की टीम टॉप पर

March 30, 2026/
5:12 am

IPL की ऑलटाइम बेस्ट टीम कौन सी है- इस सवाल का जवाब हमेशा बहस में उलझा रहता है। कोई ट्रॉफियों...

राजनीति

कभी पटना में बर्तन धोए, अब बिहार से पहले मेडलिस्ट:वीजा और पारिवारिक समस्याओं को झेलते हुए 4×400 मीटर में पीयूष ने रचा इतिहास

कभी पटना में बर्तन धोए, अब बिहार से पहले मेडलिस्ट:वीजा और पारिवारिक समस्याओं को झेलते हुए 4x400 मीटर में पीयूष ने रचा इतिहास

बिहार के रोहतास जिले के बंजारी गांव के 19 वर्षीय पीयूष राज ने संघर्ष से सफलता की नई मिसाल पेश की है। पीयूष ने हांगकांग में आयोजित एशियन जूनियर चैम्पियनशिप की 4×400 मीटर रिले रेस में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इसके साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथलेटिक्स मेडल जीतने वाले बिहार के पहले एथलीट बन गए हैं। पीयूष का सफर मुश्किलों भरा रहा है। नक्सल प्रभावित इलाके से आने वाले पीयूष जब महज 9 साल के थे, तब एक सड़क हादसे में उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार चलाने के लिए पीयूष और उनके भाई ने घर में ही आटा चक्की चलाई। 15 साल की उम्र में आंखों में बड़ा सपना लिए पीयूष राजधानी पटना पहुंचे। उनके पास सिर्फ 3000 रुपए थे, जो जल्द ही खत्म हो गए। पैसे न होने पर उन्होंने बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारी रवींद्रन शंकरण से मदद मांगी। काम के बदले पीयूष को पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के हॉस्टल की कैंटीन में नौकरी मिल गई। पीयूष बताते हैं, ‘मैं सुबह 5 से 8 बजे तक ट्रेनिंग करता था। फिर दोपहर 3 बजे तक कैंटीन में बर्तन धोता, पोंछा लगाता और खिलाड़ियों को खाना परोसता था। शाम को फिर ट्रेनिंग करता और रात 9 बजे तक वापस कैंटीन का काम संभालता।’ सेना की तैयारी करने वाले लड़कों के साथ दौड़ने वाले पीयूष को फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ देखकर असली प्रेरणा मिली। उनका शारीरिक बदलाव भी हैरान करने वाला था। शुरुआत में पीयूष महज 5 फीट 3 इंच और 53 किलो के दुबले-पतले लड़के थे। लेकिन उन्होंने खुद को 5 फीट 9 इंच के मजबूत धावक में ढाल लिया। हांगकांग का सफर आसान नहीं था। पहले वीजा की समस्या के कारण उन्हें एयरपोर्ट से लौटा दिया गया। अपनी व्यक्तिगत रेस से कुछ ही घंटे पहले वह वहां पहुंचे और थकान के कारण बाहर हो गए। मिक्स्ड रिले में डिस्क्वालिफाई होने पर वह बेहोश तक हो गए थे। लेकिन आखिरी दिन 4×400 मीटर मेंस रिले में पीयूष ने अपना जलवा बिखेरा। उन्होंने रेस के पहले लेग में 45.9 सेकंड का शानदार समय निकाला और टीम को ब्रॉन्ज मेडल जिताकर नया जूनियर नेशनल रिकॉर्ड बना दिया। स्टेडियम में गूंजा ‘एक बिहारी सौ पे भारी’ पीयूष याद करते हुए कहते हैं, ‘स्टेडियम में बिहार के कई लोग मौजूद थे। जब उन्हें पता चला कि मैं भारत के लिए दौड़ रहा हूं, तो वे जोर-जोर से ‘एक बिहारी सौ पे भारी’ के नारे लगाने लगे। यह मेरे लिए एक बहुत ही भावुक और खास पल था।’ अब पीयूष का अगला लक्ष्य इस साल व्यक्तिगत रेस में 46 सेकंड से कम समय निकालना है। वे जल्द ही तिरुवनंतपुरम में राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा बनेंगे। वे कहते हैं, ‘अब मुझे पीछे नहीं देखना है, बस आगे ही आगे जाना है।’

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.