सतना जिले के मझगवां ब्लॉक के सुरांगी गांव में 4 माह की बच्ची सूर्यांशी उर्फ प्रियांशी प्रजापति की कुपोषण से मौत के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को बर्खास्त किया और दो सुपरवाइजरों की वेतन वृद्धि रोक दी, जहां जांच में लापरवाही सामने आई। बच्ची की हालत गंभीर, समय पर नहीं मिला इलाज जानकारी के अनुसार, सुरांगी गांव की 4 माह की बच्ची सूर्यांशी उर्फ प्रियांशी प्रजापति लंबे समय से गंभीर कुपोषण से पीड़ित थी। उसकी तबीयत लगातार खराब बनी हुई थी, लेकिन इसके बावजूद उसे समय पर पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती नहीं कराया गया। बुखार आने पर अस्पताल ले जाया गया जब बच्ची को बुखार आया तो परिजन उसे उसके जुड़वा भाई के साथ मझगवां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। यहां प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए दोनों बच्चों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में सूर्यांशी को पीआईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया, लेकिन उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। हालत और बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। रास्ते में एम्बुलेंस में तोड़ा दम रीवा ले जाते समय बच्ची की हालत और खराब हो गई और उसने रास्ते में ही एम्बुलेंस में दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद पूरे मामले में लापरवाही को लेकर सवाल उठने लगे। प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में सामने आया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती गई। बच्ची की नियमित निगरानी नहीं की गई और उसकी स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। एनआरसी रेफर नहीं करने पर जिम्मेदारी तय जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बच्ची अति गंभीर कुपोषण की श्रेणी में थी, फिर भी उसे समय पर एनआरसी रेफर नहीं किया गया। इसके साथ ही परिजनों को सही सलाह और इलाज के लिए मार्गदर्शन भी नहीं दिया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि बच्ची के नियमित टीकाकरण में भी लापरवाही सामने आई है, जिससे उसकी स्थिति और बिगड़ने की आशंका बढ़ गई थी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को किया गया बर्खास्त इन सभी गंभीर लापरवाहियों को देखते हुए कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूजा पाण्डेय को जिम्मेदार मानते हुए तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया। जांच में केवल आंगनबाड़ी स्तर ही नहीं, बल्कि पर्यवेक्षण स्तर पर भी कमी पाई गई। संबंधित सुपरवाइजर दीपक विश्वकर्मा और करुणा पाण्डेय नियमित गृहभेंट और निगरानी करने में विफल रहे। जोखिम वाले बच्चों की पहचान में चूक दोनों सुपरवाइजर समय पर जोखिम वाले बच्चों की पहचान नहीं कर पाए और न ही उनका फॉलोअप किया। इसके साथ ही स्वास्थ्य प्रबंधन और काउंसलिंग में भी लापरवाही सामने आई। कलेक्टर के आदेश के अनुसार, परियोजना चित्रकूट-1 में पदस्थ इन दोनों सुपरवाइजरों की दो वित्तीय वर्षों तक वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
















































