Wednesday, 09 Sep 2026 | 03:24 PM

Trending :

बार-बार शिकायतें करने से अपने भी दूर हो सकते हैं:मन हल्का करें, लेकिन सामने वाले को भी बोलने दें बार-बार शिकायतें करने से अपने भी दूर हो सकते हैं:मन हल्का करें, लेकिन सामने वाले को भी बोलने दें अमेरिकी अरबपतियों में 100 साल पुराने पेड़ लगवाने का क्रेज:बड़े पेड़ बने नया स्टेटस सिंबल, नर्सरी में ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक अमेरिकी अरबपतियों में 100 साल पुराने पेड़ लगवाने का क्रेज:बड़े पेड़ बने नया स्टेटस सिंबल, नर्सरी में ग्राहकों के लिए हेलीपैड तक अमेरिका में EB-5 वीजा आवेदन में भारतीय सबसे आगे:12 हजार से ज्यादा लोगों ने अप्लाई किया, चीन को पीछे छोड़ा ‘दृश्यम 3’ का ट्रेलर हुआ रिलीज:विजय के खिलाफ मिला ऐसा सबूत, जो सालों से बनाई कहानी को कर सकता है खत्म
EXCLUSIVE

चंद्रमा का चक्कर लगाकर लौट रहे 4 अंतरिक्ष यात्री:सुबह 5:37 बजे लैंडिंग होगी; 3000 डिग्री फारेनहाइट पहुंचेगा तापमान, 6 मिनट का ब्लैकआउट रहेगा

चंद्रमा का चक्कर लगाकर लौट रहे 4 अंतरिक्ष यात्री:सुबह 5:37 बजे लैंडिंग होगी; 3000 डिग्री फारेनहाइट पहुंचेगा तापमान, 6 मिनट का ब्लैकआउट रहेगा

नासा के आर्टेमिस II मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की दहलीज को छूकर धरती पर वापस लौट रहे हैैं। आज 11 अप्रैल को सुबह 5:37 बजे (IST) उनका ओरियन कैप्सूल सैन डिएगो के तट के पास प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। ये मिशन 2 अप्रैल को लॉन्च हुआ था। 1972 के बाद यह पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तक यात्रा करके किसी भी इंसानी अंतरिक्ष मिशन का रिकॉर्ड 6 अप्रैल को तोड़ा था। उन्होंने चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी भी की थी।
3000 डिग्री तापमान और 6 मिनट का ब्लैकआउट पानी से निकलकर जहाज और फिर नासा सेंटर चारो अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी पर लौटने के बाद नासा और अमेरिकी सेना की टीमें उन्हें ओरियन से बाहर निकालेंगी। हेलिकॉप्टर के जरिए उन्हें ‘यूएसएस जॉन पी. मुर्था’ जहाज पर ले जाएंगी। जहाज पर पहुंचने के बाद, अंतरिक्ष यात्रियों की मेडिकल जांच होगी। इसके बाद उन्हें किनारे पर लाया जाएगा, जहां से विमान उन्हें ह्यूस्टन स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर ले जाएंगे। मकसद: ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच चाहता था नासा मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना था। नासा देखना चाहता था कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बनाएगा। चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही ‘स्पेस रेस’ में खुद को बेहतर साबित करना था। आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। नॉलेज पार्ट: इस मिशन से पहले केवल 24 लोग ही चांद के पास या उसकी सतह तक पहुंच पाए हैं। वे सभी अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स थे। सभी 1968 से 1972 के बीच चले अपोलो मिशन का हिस्सा थे। नासा के ‘अपोलो प्रोग्राम’ में क्रू और बिना क्रू वाले मिलाकर कुल 17 मिशन हुए। अगर सिर्फ उन मुख्य मिशनों की बात करें जिनमें अंतरिक्ष यात्री शामिल थे, तो ये 11 थे।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
दाऊद की पार्टी में गाने पर बोले कुमार सानू:अनु मलिक लेकर गए, अखबार में फोटो छपी तब डर लगा; अबू सलेम के शो में भी गाया

August 13, 2026/
4:59 am

प्लेबैक सिंगर कुमार सानू ने 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड से जुड़े अपने अनुभवों का खुलासा किया है। लल्लनटॉप को...

राम मंदिर चोरी का बचाव कर ट्रोल हुए अनुपम खेर:कहा- मुगलों ने मंदिरों में रेप किए, उनकी लूट के सामने ये मामूली चीज

July 13, 2026/
4:30 am

बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुई चोरी के बचाव में दिए अपने बयान को लेकर...

"मतदाताओं के हित में किया बदलाव": शिंदे सेना में शामिल होने के बाद नागेश अष्टिकर का पहला साक्षात्कार

June 23, 2026/
5:17 pm

| “मतदाताओं के हित में बदलाव किया गया है, ताकि सार्वजनिक कार्यों में तेजी लाई जा सके जो विपक्ष में...

निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन का शिकंजा:कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म में एकाधिकार खत्म, कलेक्टर का सख्त आदेश; उल्लंघन पर होगी दंडात्मक कार्रवाई

April 12, 2026/
10:10 pm

निजी स्कूलों द्वारा कॉपी-किताब, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री की खरीद को लेकर की जा रही अनिवार्यता और एकाधिकार पर...

Indian captain Harmanpreet Kaur. (Picture Credit: PTI)

June 8, 2026/
2:18 pm

आखरी अपडेट:08 जून, 2026, 14:18 IST पार्टी से इस्तीफा देने के कुछ घंटे बाद पूर्व टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय...

मेरे बच्चों को हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काया जा रहा:सेलिना जेटली बोलीं- उन्हें कहीं छिपा दिया गया; पति पर घरेलू हिंसा और धोखे का आरोप

May 10, 2026/
8:30 pm

बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली ने मदर्स डे के मौके पर सेलिना ने एक बेहद इमोशनल नोट शेयर किया है। उन्होंने...

तस्वीर का विवरण

April 27, 2026/
4:02 pm

आवश्यक सामग्री: ताजा हरा धनिया, 2 टमाटर, 1-2 हरी मिर्च, 3-4 काली मिर्च, स्वादानुसार नमक, 1 छोटा चम्मच नमक, 1/2...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

चंद्रमा का चक्कर लगाकर लौट रहे 4 अंतरिक्ष यात्री:सुबह 5:37 बजे लैंडिंग होगी; 3000 डिग्री फारेनहाइट पहुंचेगा तापमान, 6 मिनट का ब्लैकआउट रहेगा

चंद्रमा का चक्कर लगाकर लौट रहे 4 अंतरिक्ष यात्री:सुबह 5:37 बजे लैंडिंग होगी; 3000 डिग्री फारेनहाइट पहुंचेगा तापमान, 6 मिनट का ब्लैकआउट रहेगा

नासा के आर्टेमिस II मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की दहलीज को छूकर धरती पर वापस लौट रहे हैैं। आज 11 अप्रैल को सुबह 5:37 बजे (IST) उनका ओरियन कैप्सूल सैन डिएगो के तट के पास प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। ये मिशन 2 अप्रैल को लॉन्च हुआ था। 1972 के बाद यह पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तक यात्रा करके किसी भी इंसानी अंतरिक्ष मिशन का रिकॉर्ड 6 अप्रैल को तोड़ा था। उन्होंने चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी भी की थी।
3000 डिग्री तापमान और 6 मिनट का ब्लैकआउट पानी से निकलकर जहाज और फिर नासा सेंटर चारो अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी पर लौटने के बाद नासा और अमेरिकी सेना की टीमें उन्हें ओरियन से बाहर निकालेंगी। हेलिकॉप्टर के जरिए उन्हें ‘यूएसएस जॉन पी. मुर्था’ जहाज पर ले जाएंगी। जहाज पर पहुंचने के बाद, अंतरिक्ष यात्रियों की मेडिकल जांच होगी। इसके बाद उन्हें किनारे पर लाया जाएगा, जहां से विमान उन्हें ह्यूस्टन स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर ले जाएंगे। मकसद: ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच चाहता था नासा मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना था। नासा देखना चाहता था कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बनाएगा। चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही ‘स्पेस रेस’ में खुद को बेहतर साबित करना था। आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। नॉलेज पार्ट: इस मिशन से पहले केवल 24 लोग ही चांद के पास या उसकी सतह तक पहुंच पाए हैं। वे सभी अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स थे। सभी 1968 से 1972 के बीच चले अपोलो मिशन का हिस्सा थे। नासा के ‘अपोलो प्रोग्राम’ में क्रू और बिना क्रू वाले मिलाकर कुल 17 मिशन हुए। अगर सिर्फ उन मुख्य मिशनों की बात करें जिनमें अंतरिक्ष यात्री शामिल थे, तो ये 11 थे।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.