रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुविवि) की सभा (कोर्ट) की बैठक सोमवार को आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस के बीच संपन्न हुई। इस दौरान विश्वविद्यालय का वार्षिक बजट पारित कर दिया गया, लेकिन प्रशासन की कार्यप्रणाली पर जनप्रतिनिधियों ने गंभीर असंतोष व्यक्त किया। सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के जनप्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और छात्र-सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए। बैठक में भाजपा विधायक अशोक रोहाणी और ओमप्रकाश धुर्वे, कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया और ओंकार सिंह मरकाम सहित जबलपुर के महापौर भी उपस्थित थे। सदस्यों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पिछले वित्तीय वर्ष में आवंटित बजट के समुचित उपयोग न होने पर सवाल उठाए। कुछ राशि के लैप्स होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा, जिसे प्रशासनिक लापरवाही बताया गया। कार्यप्रणाली में सुधार न होने पर होगा विरोध जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध खुलकर विरोध किया जाएगा। उन्होंने विभिन्न विभागों से संबंधित पालन प्रतिवेदन और प्रगति रिपोर्ट 27 अप्रैल को होने वाली विशेष समीक्षा बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस बैठक में सभी लंबित मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। याचिकाओं पर चिंता व्यक्त की कर्मचारियों और अधिकारियों के पेंशन प्रकरणों में देरी, बाहरी भुगतान लंबित रहने और इसके कारण न्यायालय में बढ़ती याचिकाओं पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। सदस्यों ने कहा कि इन मुद्दों से विश्वविद्यालय की साख को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। प्रशासन को इन प्रकरणों पर तत्काल कार्रवाई कर संतोषजनक समाधान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान नवनिर्वाचित कर्मचारी संघ अध्यक्ष संजय यादव भी बैठक में उपस्थित थे। उन्होंने कर्मचारियों की लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए सदस्यों के समक्ष अपनी बात रखी।















































