पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच दुबई का रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट दिलचस्प तस्वीर पेश कर रहा है। वहां के आम निवेशकों ने इस बाजार में जो जगह खाली की है, उसे भरने के लिए एशिया और यूरोप के रईस (जैसे प्रवासी भारतीय या एनआरआई) आगे आ रहे हैं। वजह साफ है, चुनिंदा प्रॉपर्टी पर 12-15% छूट मिल रही है। साथ ही बाजार में ऐसी डील्स मिल रही हैं, जो एक साल पहले संभव नहीं थी। निसस फाइनेंस के सीएमडी अमित गोयनका के मुताबिक, फौरन डील चाहने वाले विक्रेताओं की वजह से बाजार में नए विकल्प खुले हैं। एनारॉक चैनल पार्टनर्स के सीईओ आयुष पुरी का कहना है कि सामान्य निवेशकों की तादाद जरूर घटी है, लेकिन बड़े खिलाड़ी तैयार और अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स दोनों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। तनाव के चरम पर दुबई का डीएफएम रियल एस्टेट इंडेक्स सिर्फ पांच दिन में 20% टूट गया था, लेकिन लंबी अवधि के निवेशक इसे संकट नहीं, एंट्री पॉइंट मान रहे हैं। दुबई की असली ताकत उसकी नीतिगत बनावट में है। टैक्स-फ्री माहौल, इन्वेस्टर वीसा, गोल्डन वीसा और 100% विदेशी मालिकाना हक- ये चार खूबियां इसे वैश्विक निवेशकों के लिए स्थायी आकर्षण बनाए रखते हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के सीनियर ईडी गुलाम जिया के मुताबिक, वैश्विक निवेशक मौजूदा प्राइस करेक्शन को एंट्री का मौका मान रहे हैं। खासतौर पर भारतीय एनआरआई के लिए दुबई का टैक्स-फ्री ढांचा और 5-9% नेट रेंटल इनकम बड़ा आकर्षण है। कीमतों की बात करें तो इस साल मार्च में ‘वैल्यूस्ट्रैट होम प्राइस इंडेक्स’ 5.9% टूटा, जो 2020 के बाद पहली मासिक गिरावट है। इसके बावजूद कीमतें 1,980 दिरहम यानी करीब 51,300 रुपए प्रति वर्ग फुट के स्तर पर हैं, जो 12 महीनों में 4.59% बढ़ा है। एटमॉस्फियर लिविंग के एमडी संदीप आहूजा का कहना है कि दुबई का न्यूट्रल हब होना लंबी अवधि के नजरिए से निवेश की दिलचस्पी बनाए रखता है और खरीदार अभी मोलभाव की स्थिति में हैं। आयुष पुरी इसे बाजार का क्रैश नहीं, बल्कि कीमतों का एडजस्टमेंट मानते हैं। गुलाम जिया का अनुमान है कि सेंटिमेंट सुधरते ही बाजार तेजी से स्थिर हो जाएगा। जनवरी-मार्च में ₹4.6 लाख करोड़ के घर बिके दुबई में 2026 की पहली तिमाही में 47,996 डील्स के जरिए 176.7 अरब दिरहम यानी करीब 4.6 लाख करोड़ रुपए के मकानों की बिक्री हो गई। यह सालाना आधार पर वैल्यू में 23.4% और वॉल्यूम (संख्या) में 5.5% की बढ़त है। अमित गोयनका के मुताबिक, संकटग्रस्त विक्रेताओं की वजह से फिलहाल बाजार में एंट्री के ऐसे विकल्प खुले हैं, जो एक साल पहले उपलब्ध नहीं थे।














































