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Sonipat Youth Death in Netherlands Work Accident

Sonipat Youth Death in Netherlands Work Accident

सोनीपत5 घंटे पहले

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नीदरलैंड के अस्पताल में सागर राणा चार दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा। इनसेट में सागर का फाइल फोटो।

हरियाणा में सोनीपत के युवक की नीदरलैंड में मौत हो गई। परिवार ने करीब 25 लाख रुपए का कर्ज लेकर उसे दो साल पहले फ्रांस भेजा था। मगर, कुछ दिन फ्रांस में रहने के बाद युवक नीदरलैंड चला गया और काम की तलाश शुरू की। कई दिन तक रोजगार की तलाश करने के बाद उसे पेड़ काटने का काम मिला।

पेड़ काटते वक्त वह गिर गया। कई दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। अब हालात ऐसे हैं कि उसका पार्थिव शरीर भी विदेश में ही फंसा हुआ है और परिवार आर्थिक तंगी के चलते उसे भारत नहीं ला पा रहा।

परिजन लगातार सरकार और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि उनके बेटे का शव वतन लाने में मदद की जाए, ताकि वे अंतिम बार उसका चेहरा देख सकें और अपने हाथों से अंतिम संस्कार कर सकें।

सागर राणा 24 नवंबर 2024 को टूरिस्ट वीजा पर भारत से फ्रांस गया था। नीली ड्रेस में सागर अपने छोटे भाई कमल के साथ। (फाइल फोटो)

सागर राणा 24 नवंबर 2024 को टूरिस्ट वीजा पर भारत से फ्रांस गया था। नीली ड्रेस में सागर अपने छोटे भाई कमल के साथ। (फाइल फोटो)

पहले जानिए कैसे हुआ युवक के साथ हादसा…

  • दो साल पहले टूरिस्ट वीजा पर गया था: सोनीपत के मोई माजरी गांव के रहने वाले कमल राणा ने बताया कि उसका बड़ा भाई सागर राणा (23) 24 नवंबर 2024 को टूरिस्ट वीजा पर भारत से फ्रांस गया था। वह पेरिस में रहकर अपने लिए बेहतर अवसर तलाश रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि वह विदेश में कुछ कर दिखाएगा और घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा।
  • नीदरलैंड में लंबे समय तक नहीं मिला काम: परिजनों के अनुसार, फ्रांस जाने के बाद सागर जनवरी 2026 में नीदरलैंड पहुंचा। वहां करीब दो महीने तक उसे कोई काम नहीं मिला और वह लगातार रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा। काफी संघर्ष के बाद करीब 15 दिन पहले ही उसे एक व्यक्ति के घर पर पेड़ काटने का काम मिला।
  • 20-21 मार्च को एक घर में पेड़ काटने गया था: परिजनों के अनुसार, नीदरलैंड में पूरी मेहनत और लगन के साथ काम कर रहा था ताकि अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभा सके। 20 और 21 मार्च को छुट्टी के दौरान एक स्थानीय निवासी ने सागर को पेड़ काटने बुलाया। आरोप है कि इस दौरान उसे कोई भी सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए और न ही जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।
  • पेड़ गिरने से हुआ हादसा, सिर में लगी गंभीर चोट: परिवार के मुताबिक, कटान करते समय अचानक पेड़ उसकी ओर गिरने लगा। उस समय सागर सीढ़ी पर खड़ा था। पेड़ गिरते वक्त सीढ़ी उसमें उलझ गई, जिससे वह संतुलन खो बैठा और पीछे की ओर जमीन पर गिर पड़ा। गिरने के दौरान उसके सिर में गंभीर चोट आई। नाक और कान से खून बहने लगा।
  • चार दिन तक चलता रहा इलाज, नहीं बची जान: हादसे के तुरंत बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां वह चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा, लेकिन 25 मार्च को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसकी जानकारी उसके मामा को फोन पर मिली, जिसके बाद परिवार में मातम छा गया।
सागर राणा का परिवार का अपना मकान जर्जर है, इसलिए परिजन काका के मकान में किराए पर रहते हैं।-फाइल फोटो

सागर राणा का परिवार का अपना मकान जर्जर है, इसलिए परिजन काका के मकान में किराए पर रहते हैं।-फाइल फोटो

ऐसे रहा युवक का सोनीपत से फ्रांस और नीदरलैंड का सफर…

आर्थिक तंगी ने विदेश जाने को किया मजबूर

कमल राणा ने बताया कि उनके परिवार के हालात लंबे समय से ठीक नहीं थे। परिवार के पास केवल एक बीघा जमीन है और आय का कोई स्थायी साधन नहीं है। गांव में अपना मकान जर्जर हालात में है, इसलिए वे गांव में अपने चाचा के मकान में किराए पर रह रहे हैं। पिता किराए की गाड़ी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जिससे घर का खर्च किसी तरह चलता है। सागर ने विदेश जाकर मेहनत करने और परिवार का कर्ज उतारने के साथ-साथ अपना खुद का मकान बनाने का सपना देखा था। सागर ने अपनी 12वीं की पढ़ाई कसांडी गांव से पूरी की थी।

कर्ज लेकर भेजा था विदेश

कमल राणा ने बताया कि सागर को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 20 से 25 लाख रुपए तक का कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि सागर विदेश में कमाकर इस कर्ज को उतार देगा और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बना देगा। सागर रोजाना अपनी मां और परिवार के अन्य सदस्यों से बात करता था, लेकिन 20 मार्च को उसका फोन नहीं आया। परिवार ने उसे मैसेज भी किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बाद में उसकी मौत की खबर आई।

सागर को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 20 से 25 लाख रुपए तक का कर्ज लिया था।-फाइल फोटो

सागर को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 20 से 25 लाख रुपए तक का कर्ज लिया था।-फाइल फोटो

विदेश में फंसा पार्थिव शरीर, सरकार से मदद की गुहार

वर्तमान में सागर का पार्थिव शरीर नीदरलैंड में ही है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, जिसके कारण वे खुद शव को भारत नहीं ला पा रहे हैं। परिजन लगातार सरकार और प्रशासन से मदद की अपील कर रहे हैं, ताकि सागर का अंतिम संस्कार उसके अपने देश और अपने लोगों के बीच हो सके और परिवार आखिरी बार अपने बेटे को देख सके।

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हरियाणा में सोनीपत के युवक की नीदरलैंड में मौत हो गई। परिवार ने करीब 25 लाख रुपए का कर्ज लेकर उसे दो साल पहले फ्रांस भेजा था। मगर, कुछ दिन फ्रांस में रहने के बाद युवक नीदरलैंड चला गया और काम की तलाश शुरू की। कई दिन तक रोजगार की तलाश करने के बाद उसे पेड़ काटने का काम मिला।

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  • 20-21 मार्च को एक घर में पेड़ काटने गया था: परिजनों के अनुसार, नीदरलैंड में पूरी मेहनत और लगन के साथ काम कर रहा था ताकि अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभा सके। 20 और 21 मार्च को छुट्टी के दौरान एक स्थानीय निवासी ने सागर को पेड़ काटने बुलाया। आरोप है कि इस दौरान उसे कोई भी सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए और न ही जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।
  • पेड़ गिरने से हुआ हादसा, सिर में लगी गंभीर चोट: परिवार के मुताबिक, कटान करते समय अचानक पेड़ उसकी ओर गिरने लगा। उस समय सागर सीढ़ी पर खड़ा था। पेड़ गिरते वक्त सीढ़ी उसमें उलझ गई, जिससे वह संतुलन खो बैठा और पीछे की ओर जमीन पर गिर पड़ा। गिरने के दौरान उसके सिर में गंभीर चोट आई। नाक और कान से खून बहने लगा।
  • चार दिन तक चलता रहा इलाज, नहीं बची जान: हादसे के तुरंत बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां वह चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा, लेकिन 25 मार्च को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसकी जानकारी उसके मामा को फोन पर मिली, जिसके बाद परिवार में मातम छा गया।
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कर्ज लेकर भेजा था विदेश

कमल राणा ने बताया कि सागर को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 20 से 25 लाख रुपए तक का कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि सागर विदेश में कमाकर इस कर्ज को उतार देगा और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बना देगा। सागर रोजाना अपनी मां और परिवार के अन्य सदस्यों से बात करता था, लेकिन 20 मार्च को उसका फोन नहीं आया। परिवार ने उसे मैसेज भी किए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बाद में उसकी मौत की खबर आई।

सागर को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 20 से 25 लाख रुपए तक का कर्ज लिया था।-फाइल फोटो

सागर को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 20 से 25 लाख रुपए तक का कर्ज लिया था।-फाइल फोटो

विदेश में फंसा पार्थिव शरीर, सरकार से मदद की गुहार

वर्तमान में सागर का पार्थिव शरीर नीदरलैंड में ही है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, जिसके कारण वे खुद शव को भारत नहीं ला पा रहे हैं। परिजन लगातार सरकार और प्रशासन से मदद की अपील कर रहे हैं, ताकि सागर का अंतिम संस्कार उसके अपने देश और अपने लोगों के बीच हो सके और परिवार आखिरी बार अपने बेटे को देख सके।

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