Wednesday, 10 Jun 2026 | 12:53 PM

Trending :

EXCLUSIVE

पायरिया और दांत दर्द होगा छूमंतर! रामबाण इलाज चिरचिटा का पौधा, जानें दातुन का चमत्कार

google-color.svg

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में बड़ी मात्रा में उगने वाला चिरचिटा पौधा आयुर्वेद में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. आमतौर पर लोग इसे एक सामान्य घास समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेदिक दृष्टि से यह पौधा कई गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोगी औषधि है. आयुर्वेद में इसे अपामार्ग कहा जाता है और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे लटजीरा या चिरचिटा नाम से भी जाना जाता है.

आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि यह पौधा मानव जीवन के साथ-साथ पशुओं के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है. यह पौधा खासकर बारिश के मौसम में घास के साथ खेतों और आसपास के इलाकों में आसानी से उग आता है. यदि इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह कई रोगों के उपचार में कारगर साबित होता है. आयुर्वेद में इसका उपयोग पाचन तंत्र को मजबूत करने, रक्त को शुद्ध करने और कई प्रकार की बीमारियों के उपचार में किया जाता है.

डायरिया और अस्थमा में चिरचिटा की राख का होता है उपयोग
डॉ. विपिन सिंह ने बताया कि चिरचिटा की राख का उपयोग डायरिया और अस्थमा जैसे रोगों में किया जाता है. इसकी प्रकृति क्षारीय होती है, जिससे यह शरीर में कई तरह के विकारों को दूर करने में मदद करता है. आयुर्वेद में यह भी उल्लेख मिलता है कि फेफड़ों से जुड़े रोग जैसे टीबी और कैंसर में भी यह औषधि लाभकारी हो सकती है.

अपामार्ग की टहनी से दातुन करने का बताया फायदा
डॉ. विपिन सिंह ने कहा कि वास्तु और परंपरागत मान्यताओं में भी अपामार्ग का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि लाल अपामार्ग की टहनी से दातुन करने पर वाक सिद्धि प्राप्त होती है, यानी व्यक्ति की इच्छाएं पूरी होने की शक्ति मिलती है. वहीं अगहन महीने की पूर्णिमा के दिन इसकी जड़ का विधिपूर्वक पूजन कर हाथ में बांधने से जीवन की कई समस्याओं से मुक्ति मिलने की बात भी कही जाती है.

पशुओं की बीमारियों में भी उपयोग किया जाता है यह पौधा
डॉ. विपिन सिंह ने बताया कि औषधीय दृष्टि से यह पौधा चर्म रोग, फोड़े-फुंसी, सूजन, गठिया, मुंह के छाले, भूख न लगना, आंखों की बीमारी, रक्तस्राव रोकने, घाव, खुजली, खांसी, बुखार, पेट के रोग, बवासीर और कुष्ठ रोग जैसी कई समस्याओं में उपयोगी माना जाता है. इतना ही नहीं, पशुओं में चोट या सूजन होने पर भी इसका उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता है, जो काफी असरदार माना जाता है.

हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि अपामार्ग कई बीमारियों में उपयोगी है, लेकिन इसका प्रयोग विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. किसी भी रोग में इसकी मात्रा और उपयोग की विधि व्यक्ति की उम्र और बीमारी की स्थिति के अनुसार आयुर्वेद चिकित्सक ही तय करते हैं, इसलिए बिना परामर्श इसके उपयोग से बचना चाहिए.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
‘धुरंधर 2’ की सफलता के बीच कॉन्सर्ट में दिखीं दीपिका:रणवीर सिंह की मां और बहन भी रहीं मौजूद

March 21, 2026/
9:01 am

19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म धुरंधर 2 को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म ने...

नोरा फतेही ने अश्लील गाने पर माफी मांगी:महिला आयोग से बोलीं- अब ऐसे आइटम सॉन्ग नहीं करूंगी; अश्लीलता फैलाने का इरादा नहीं था

May 7, 2026/
4:44 pm

फिल्म ‘KD द डेविल’ के गाने ‘सरके चुनर’ में अश्लीलता फैलाने के मामले में गुरुवार को बॉलीवुड एक्ट्रेस नोरा फतेही...

Google Preferred Source CTA

May 18, 2026/
3:07 pm

एक्टर अंजुम शर्मा इन दिनों अपनी वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर चर्चा में हैं। इस थ्रिलर में अंजुम ने ‘मुन्ना’...

UEFA Champions League Final, PSG Vs Arsenal LIVE Score And Updates.

May 30, 2026/
8:49 pm

आखरी अपडेट:30 मई, 2026, 20:49 IST शिवकुमार ने राज्यपाल से उन्हें मुख्यमंत्री और अन्य को मंत्रिपरिषद के रूप में शपथ...

ईरान-इजराइल तनाव से चीन को झटका:मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग; चीन के 8 लाख करोड़ दांव पर, डिसेलिनेशन से लेकर टेक प्रोजेक्ट्स तक सब खतरे में

March 10, 2026/
5:42 pm

मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध चीन के लिए‎ खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल चीन ने‎ मिडिल ईस्ट में...

कॉर्पोरेट इंफ्लुएंसर्स का बढ़ा ट्रेंड:ऑफिस के तनाव-चुनौती रोचक तरीके से दिखाकर करोड़ों कमा रहे, ग्राहकों-कर्मियों से जुड़ना आसान किया

February 14, 2026/
1:20 pm

अमेरिका की नताली मार्शल ‘कॉर्पोरेट नताली’ के नाम से चर्चित हैं। वे ऑफिस की अजीब हरकतों और शब्दावली का मजाक...

राजनीति

पायरिया और दांत दर्द होगा छूमंतर! रामबाण इलाज चिरचिटा का पौधा, जानें दातुन का चमत्कार

google-color.svg

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में बड़ी मात्रा में उगने वाला चिरचिटा पौधा आयुर्वेद में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. आमतौर पर लोग इसे एक सामान्य घास समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेदिक दृष्टि से यह पौधा कई गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोगी औषधि है. आयुर्वेद में इसे अपामार्ग कहा जाता है और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे लटजीरा या चिरचिटा नाम से भी जाना जाता है.

आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि यह पौधा मानव जीवन के साथ-साथ पशुओं के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है. यह पौधा खासकर बारिश के मौसम में घास के साथ खेतों और आसपास के इलाकों में आसानी से उग आता है. यदि इसका सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह कई रोगों के उपचार में कारगर साबित होता है. आयुर्वेद में इसका उपयोग पाचन तंत्र को मजबूत करने, रक्त को शुद्ध करने और कई प्रकार की बीमारियों के उपचार में किया जाता है.

डायरिया और अस्थमा में चिरचिटा की राख का होता है उपयोग
डॉ. विपिन सिंह ने बताया कि चिरचिटा की राख का उपयोग डायरिया और अस्थमा जैसे रोगों में किया जाता है. इसकी प्रकृति क्षारीय होती है, जिससे यह शरीर में कई तरह के विकारों को दूर करने में मदद करता है. आयुर्वेद में यह भी उल्लेख मिलता है कि फेफड़ों से जुड़े रोग जैसे टीबी और कैंसर में भी यह औषधि लाभकारी हो सकती है.

अपामार्ग की टहनी से दातुन करने का बताया फायदा
डॉ. विपिन सिंह ने कहा कि वास्तु और परंपरागत मान्यताओं में भी अपामार्ग का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि लाल अपामार्ग की टहनी से दातुन करने पर वाक सिद्धि प्राप्त होती है, यानी व्यक्ति की इच्छाएं पूरी होने की शक्ति मिलती है. वहीं अगहन महीने की पूर्णिमा के दिन इसकी जड़ का विधिपूर्वक पूजन कर हाथ में बांधने से जीवन की कई समस्याओं से मुक्ति मिलने की बात भी कही जाती है.

पशुओं की बीमारियों में भी उपयोग किया जाता है यह पौधा
डॉ. विपिन सिंह ने बताया कि औषधीय दृष्टि से यह पौधा चर्म रोग, फोड़े-फुंसी, सूजन, गठिया, मुंह के छाले, भूख न लगना, आंखों की बीमारी, रक्तस्राव रोकने, घाव, खुजली, खांसी, बुखार, पेट के रोग, बवासीर और कुष्ठ रोग जैसी कई समस्याओं में उपयोगी माना जाता है. इतना ही नहीं, पशुओं में चोट या सूजन होने पर भी इसका उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता है, जो काफी असरदार माना जाता है.

हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि अपामार्ग कई बीमारियों में उपयोगी है, लेकिन इसका प्रयोग विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. किसी भी रोग में इसकी मात्रा और उपयोग की विधि व्यक्ति की उम्र और बीमारी की स्थिति के अनुसार आयुर्वेद चिकित्सक ही तय करते हैं, इसलिए बिना परामर्श इसके उपयोग से बचना चाहिए.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.