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पीरियड्स में लड़कियों-महिलाओं का कवच बन रहा मोरिंगा, डॉक्टर बोलीं, पैड्स में करें इस्तेमाल

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Moringa in Periods: आमतौर पर महिलाओं और लड़कियों को पीरियड्स मुसीबत जैसे महसूस होते हैं. इसकी एक वजह सिर्फ खून के रिसाव से होने वाली परेशानी ही नहीं है बल्कि कई ऐसी गंभीर बीमारियां भी हैं, जो अचानक से धावा बोल देती हैं और उनसे छुटकारा पाना काफी मुश्किल भरा हो जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो महिलाओं में बैक्टीरियल वेजिनोसिस ऐसी ही एक बीमारी है, जिस पर फीमेल्स का ही ध्यान तब नहीं जाता, जब तक कि वह गंभीर नहीं हो जाता.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की गाजियाबाद अध्यक्ष और महिला मामलों की एक्सपर्ट डॉ. अल्पना कंसल कहती हैं कि पीरियड्स की देखभाल को अभी भी सैनिटरी पैड तक ही सीमित माना जाता है. 90 फीसदी लोग समझते हैं कि पीरियड्स में पैड्स इस्तेमाल कर रहे हैं तो अब कोई दिक्कत नहीं है लेकिन सैनिटरी पैड का उद्देश्य केवल रिसाव से बचाना ही नहीं होना चाहिए, जैसा कि अभी तक हो रहा है, बल्कि माइक्रोबायोम संतुलन को बनाए रखना और फीमेल्स में संक्रमण से बचाव भी होना चाहिए.

डॉ. कंसल कहती हैं कि मासिक धर्म में सिर्फ खून के बहाव को ही नहीं रोकना होता, बल्कि यह वह समय भी है जब योनि का वातावरण ज्यादा संवेदनशील हो जाता है. भारत की आर्द्र जलवायु में लंबे समय तक पैड का इस्तेमाल, गर्मी, नमी और घर्षण के साथ मिलकर योनि के नाजुक माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकता है. इसके सबसे गंभीर परिणाम के रूप में महिलाओं में जीवाणु संक्रमण यानि बैक्टीरियल वेजिनोसिस सामने आता है.

लेकिन सबसे बड़ी बात है कि यीस्ट संक्रमण पर तो खूब चर्चा होती है, लेकिन गर्भवती होने और बच्चा पैदा करने की उम्र में महिलाओं में सबसे सामान्य योनि संबंधी समस्याओं में से एक होने के बावजूद जीवाणु संक्रमण यानि बैक्टीरियल वेजिनोससि को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता है.

कब होता है बैक्टीरियल वेजिनोसिस?
बैक्टीरियल वेजिनोसिस तब होता है जब योनि में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का स्तर कम होने होने से बैक्टीरिया का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है और हानिकारक एनारोबिक बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है. बैक्टीरियल वेजिनोसिस या बीवी के सामान्य लक्षणों में पतला, धूसर-सफेद स्राव, तेज मछली जैसी गंध (जो अक्सर मासिक धर्म के बाद अधिक महसूस होती है), हल्की जलन या खुजली शामिल है. हालांकि कई मामलों में तो कोई लक्षण ही नहीं दिखाई देते हैं.

पीरियड्स में बढ़ती है बीमारी
वे कहती हैं कि मासिक धर्म के दौरान, अंतरंग क्षेत्र में पर्यावरणीय बदलावों के कारण रिस्क बढ़ सकता है. सैनिटरी पैड, विशेष रूप से लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर एक गर्म और नम सूक्ष्म वातावरण बनाते हैं. भारत की पहले से ही नमी वाली परिस्थितियों में यह प्रभाव और भी तेज हो जाता है.

डॉक्टर अल्पना कहती हैं, ‘मासिक चक्र के दौरान लंबे समय तक घर्षण, नमी और पसीने के कारण जननांग क्षेत्र के आसपास की विशेष रूप से नाजुक त्वचा में पीरियड्स के दौरान जलन होने की आशंका ज्यादा होती है. हमारे पास आने वाली अधिकतर महिलाएं जलन की शिकायत करती हैं. ऐसे में सांस लेने लायक, त्वचा के अनुकूल और सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक रूप से मूल्यांकित सैनिटरी पैड असुविधा को कम करने में मदद कर सकते है, बशर्ते वे नियामक और सुरक्षा मानकों को पूरा करते हों.

मोरिंगा है इसका इलाज
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि कई स्टडीज में इस बात के संकेत मिले हैं कि मोरिंगा युक्त सैनिटरी पैड इस घर्षण से होने वाली जलन को कम करने और त्वचा को आराम देने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि मोरिंगा में सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं. इसके रोगाणुरोधी गुण पैड की सतह पर हानिकारक रोगाणुओं की वृद्धि को सीमित करके एक स्वस्थ बाहरी वातावरण बनाने में योगदान दे सकते हैं. मोरिंगा के एंटीऑक्सीडेंट्स यौगिक नम परिस्थितियों में त्वचा की सुरक्षात्मक परत को होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं. इसलिए मोरिंगा का इस्तेमाल करते हुए पैड्स बनने चाहिए.

स्टडी में मिले मोरिंगा के मजबूत सबूत
डॉ. अल्पना कहती हैं कि 2025 में लाइफ पत्रिका में मौरिंगा पर एक अध्ययन प्रकाशित हुआ जिसमें इसके पत्तों के कुछ अर्क के सूजनरोधी और रोगाणुरोधी गुणों की प्रयोगशाला में पुष्ठि होने की बात कही गई. इसमें मजबूत एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव भी पाए गए. शोधकर्ताओं ने इन गुणों का श्रेय फ्लेवोनोइड्स, पॉलीफेनोल्स, क्वेरसेटिन और क्लोरोजेनिक एसिड जैसे जैव-सक्रिय यौगिकों को दिया जो अंतरंग स्वच्छता और मासिक धर्म की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की गाजियाबाद अध्यक्ष और महिला मामलों की एक्सपर्ट डॉ. अल्पना कंसल कहती हैं कि पीरियड्स की देखभाल को अभी भी सैनिटरी पैड तक ही सीमित माना जाता है. 90 फीसदी लोग समझते हैं कि पीरियड्स में पैड्स इस्तेमाल कर रहे हैं तो अब कोई दिक्कत नहीं है लेकिन सैनिटरी पैड का उद्देश्य केवल रिसाव से बचाना ही नहीं होना चाहिए, जैसा कि अभी तक हो रहा है, बल्कि माइक्रोबायोम संतुलन को बनाए रखना और फीमेल्स में संक्रमण से बचाव भी होना चाहिए.

डॉ. कंसल कहती हैं कि मासिक धर्म में सिर्फ खून के बहाव को ही नहीं रोकना होता, बल्कि यह वह समय भी है जब योनि का वातावरण ज्यादा संवेदनशील हो जाता है. भारत की आर्द्र जलवायु में लंबे समय तक पैड का इस्तेमाल, गर्मी, नमी और घर्षण के साथ मिलकर योनि के नाजुक माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकता है. इसके सबसे गंभीर परिणाम के रूप में महिलाओं में जीवाणु संक्रमण यानि बैक्टीरियल वेजिनोसिस सामने आता है.

लेकिन सबसे बड़ी बात है कि यीस्ट संक्रमण पर तो खूब चर्चा होती है, लेकिन गर्भवती होने और बच्चा पैदा करने की उम्र में महिलाओं में सबसे सामान्य योनि संबंधी समस्याओं में से एक होने के बावजूद जीवाणु संक्रमण यानि बैक्टीरियल वेजिनोससि को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता है.

कब होता है बैक्टीरियल वेजिनोसिस?
बैक्टीरियल वेजिनोसिस तब होता है जब योनि में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का स्तर कम होने होने से बैक्टीरिया का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है और हानिकारक एनारोबिक बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है. बैक्टीरियल वेजिनोसिस या बीवी के सामान्य लक्षणों में पतला, धूसर-सफेद स्राव, तेज मछली जैसी गंध (जो अक्सर मासिक धर्म के बाद अधिक महसूस होती है), हल्की जलन या खुजली शामिल है. हालांकि कई मामलों में तो कोई लक्षण ही नहीं दिखाई देते हैं.

पीरियड्स में बढ़ती है बीमारी
वे कहती हैं कि मासिक धर्म के दौरान, अंतरंग क्षेत्र में पर्यावरणीय बदलावों के कारण रिस्क बढ़ सकता है. सैनिटरी पैड, विशेष रूप से लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर एक गर्म और नम सूक्ष्म वातावरण बनाते हैं. भारत की पहले से ही नमी वाली परिस्थितियों में यह प्रभाव और भी तेज हो जाता है.

डॉक्टर अल्पना कहती हैं, ‘मासिक चक्र के दौरान लंबे समय तक घर्षण, नमी और पसीने के कारण जननांग क्षेत्र के आसपास की विशेष रूप से नाजुक त्वचा में पीरियड्स के दौरान जलन होने की आशंका ज्यादा होती है. हमारे पास आने वाली अधिकतर महिलाएं जलन की शिकायत करती हैं. ऐसे में सांस लेने लायक, त्वचा के अनुकूल और सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक रूप से मूल्यांकित सैनिटरी पैड असुविधा को कम करने में मदद कर सकते है, बशर्ते वे नियामक और सुरक्षा मानकों को पूरा करते हों.

मोरिंगा है इसका इलाज
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि कई स्टडीज में इस बात के संकेत मिले हैं कि मोरिंगा युक्त सैनिटरी पैड इस घर्षण से होने वाली जलन को कम करने और त्वचा को आराम देने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि मोरिंगा में सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं. इसके रोगाणुरोधी गुण पैड की सतह पर हानिकारक रोगाणुओं की वृद्धि को सीमित करके एक स्वस्थ बाहरी वातावरण बनाने में योगदान दे सकते हैं. मोरिंगा के एंटीऑक्सीडेंट्स यौगिक नम परिस्थितियों में त्वचा की सुरक्षात्मक परत को होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं. इसलिए मोरिंगा का इस्तेमाल करते हुए पैड्स बनने चाहिए.

स्टडी में मिले मोरिंगा के मजबूत सबूत
डॉ. अल्पना कहती हैं कि 2025 में लाइफ पत्रिका में मौरिंगा पर एक अध्ययन प्रकाशित हुआ जिसमें इसके पत्तों के कुछ अर्क के सूजनरोधी और रोगाणुरोधी गुणों की प्रयोगशाला में पुष्ठि होने की बात कही गई. इसमें मजबूत एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव भी पाए गए. शोधकर्ताओं ने इन गुणों का श्रेय फ्लेवोनोइड्स, पॉलीफेनोल्स, क्वेरसेटिन और क्लोरोजेनिक एसिड जैसे जैव-सक्रिय यौगिकों को दिया जो अंतरंग स्वच्छता और मासिक धर्म की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

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