मैं अपने पापा को खुद से ज्यादा जानती थी। वह कभी आत्महत्या नहीं कर सकते। उनकी हत्या बीजेपी विधायक ललिता यादव ने करवाई है। विधायक के घर में मेरे पापा से मारपीट की गई। उनके शरीर पर चोटों के निशान थे। ये शब्द हैं छतरपुर के सरानी गांव की 13 साल की प्रांशी के। उसके पिता सुरेंद्र सिंह तोमर 4 अप्रैल को घर से निकले थे, लेकिन शाम तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझते मिले। ग्वालियर ले जाते समय उनकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि सुरेंद्र ने जहर खाकर सुसाइड किया, लेकिन परिवार इसे सिरे से खारिज कर रहा है। आरोप सीधे बीजेपी विधायक ललिता यादव और उनके बेटे मोनू यादव पर लगाए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इस मामले में परिवार, पुलिस और संबंधित पक्षों से बात कर सच्चाई जानने की कोशिश की। पढ़िए इस ग्राउंड रिपोर्ट में- पुलिस की कहानी: मौत के दिन क्या हुआ…? 4 अप्रैल की सुबह सुरेंद्र घर से निकले। दिन में वह दो बार कोतवाली थाने गए। पुलिस के मुताबिक उन्हें ‘गुंडा परेड’ के लिए बुलाया गया था। दोपहर करीब 1 बजे वह थाने पहुंचे, आमद दर्ज कराई और शाम को आने को कहा गया। इसके बाद वह विधायक निवास पहुंचे। बताया जा रहा है कि वहां उन्होंने गाली-गलौच की। करीब 3 बजे टीआई अरविंद दांगी उन्हें अपनी गाड़ी से थाने लाए, लेकिन थाने में वह कुछ ही मिनट रहे। इसके बाद वह बाहर जाते दिखे और थोड़ी ही दूरी पर बदहवास हालत में मिले। पुलिस उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंची। शाम को परिवार को सूचना दी गई। ग्वालियर रेफर के दौरान उनकी मौत हो गई। परिवार का आरोप: मारपीट के बाद जहर दिया गया सरानी गांव में सुरेंद्र के घर पहुंचने पर गांव वालों और परिवार का गुस्सा साफ दिखता है। मां भानकुंवर रोते हुए कहती हैं-“मेरे बेटे को मरवा दिया गया।” पत्नी ज्योति बताती हैं कि सुबह 11 बजे सुरेंद्र घर से निकले थे। शाम 4 बजे पुलिस हमें लेने आई। अस्पताल पहुंचे तो वो बेहोश थे। पुलिस कह रही थी कि उन्होंने जहर खाया है। 26 जनवरी को मोनू यादव ने सुरेंद्र को फोन पर धमकी दी थी कि तुम्हें बहुत मारेंगे। परिजनों का एक बड़ा सवाल ये भी है कि अगर सुरेंद्र ‘गुंडा’ था, तो वह 5 साल तक टीआई का निजी ड्राइवर कैसे रहा? विधायक परिवार की भूमिका, क्या आरोप लगे- जांच में सामने आया कि सुरेंद्र का गांव में जमीन विवाद चल रहा था। सुरेंद्र ने एक जमीन दानपत्र के जरिए ली थी, जिस पर बाद में विवाद हुआ। परिवार का आरोप है कि यह मामला सरपंच के जरिए मोनू यादव तक पहुंचा। मोनू यादव ने सुरेंद्र का साथ नहीं दिया। सुरेंद्र इस बात से नाराज था और उस दिन वह विधायक निवास पहुंचा और गाली-गलौच की। हालांकि, मोनू यादव इन आरोपों को खारिज करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं सुरेंद्र को नहीं जानता। अब जानिए जांच कहां तक पहुंची… मामले की जांच एएसपी आदित्य पटले कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुरेंद्र की मूवमेंट की हर कड़ी को जोड़ा जा रहा है। थाने और विधायक निवास के सीसीटीवी फुटेज के लिए डीवीआर जब्त किए गए हैं। पोस्टमार्टम में जहर से मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन रिपोर्ट में कुछ और बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिन लोगों से सुरेंद्र उस दिन मिला, उनके बयान लिए जा रहे हैं। पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ होगी, जिन्होंने उसे बदहवास हालत में देखा था।
टीआई अरविंद दांगी को लाइन अटैच कर दिया गया है। विधायक के बेटे के बयान भी लिए जाएंगे। जांच के बाद ही साफ होगा कि यह आत्महत्या है या पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत।
टीआई अरविंद दांगी से भी उनका पक्ष जानने के लिए भास्कर ने संपर्क किया लेकिन उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए फिलहाल मुलाकात से इनकार कर दिया।














































