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RPF Constable Injured Chasing Thief in Jabalpur

RPF Constable Injured Chasing Thief in Jabalpur

पांच घंटे तक तालाब में छिपे रहने और कमल की डंडी से सांस लेने वाले मोस्ट वांटेड चोर को लेकर कई खुलासे हुए हैं। उसने गोताखोरों और पुलिस कर्मियों से बचने के लिए उन पर हमला भी किया। लेकिन भागने में असफल रहा।

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7 अप्रैल को खितौला थाना पुलिस, गोताखोरों और आरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में हरविंदर सिंह को तालाब में छिपे हुए पकड़ा गया। गुरुवार को उसे रेलवे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से पूछताछ के लिए भोपाल-इटारसी जीआरपी पुलिस को सौंप दिया गया।

चौकी लाते समय आरोपी ने अचानक भागने की कोशिश की और करीब 50 मीटर तक दौड़ा। विनय ने पीछा कर उसे पकड़ लिया। इसी दौरान आरोपी ने पत्थर से हमला कर दिया, जिससे उनके सिर से खून बहने लगा। बावजूद इसके उन्होंने आरोपी को नहीं छोड़ा और साथी की मदद से दोबारा पकड़कर पुलिस के हवाले किया।

विनय मौर्य ने बताया कि जबलपुर पुलिस की मदद से आरोपी को पकड़कर चौकी लाया जा रहा था। इसी दौरान उसने बाथरूम जाने का बहाना किया। मैं उसे लेकर गया, साथ में साथी आरक्षक आशीष यादव भी थे।

अचानक उसने आशीष को धक्का देकर भागने की कोशिश की। मैंने पीछा कर उसे गिरा दिया, तभी उसने पत्थर उठाकर मेरे सिर पर वार करना शुरू कर दिया। काफी देर तक संघर्ष चलता रहा, लेकिन मैंने उसे पकड़े रखा। बाद में आशीष भी आ गया और हम दोनों उसे पकड़कर चौकी ले आए।

आरोपी को आरपीएफ के हवाले कर दिया गया।

गंभीर घायल, हालत खतरे से बाहर

इस हमले में विनय मौर्य के सिर पर गंभीर चोट आई है। उन्हें शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अब उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। उनकी बहादुरी को देखते हुए आरपीएफ आईजी ने विनय मौर्य और आशीष यादव दोनों को पुरस्कृत किया है।

50 मीटर पीछा, फिर आमने-सामने भिड़ंत, पत्थर मारे पर पकड़ नहीं छोड़ी

विनय मौर्य ने बताया कि आरोपी चौकी से करीब 50 मीटर ही भाग पाया था, तभी उन्होंने उसे पकड़ लिया। इसके बाद दोनों के बीच जमकर हाथापाई हुई। आरोपी शारीरिक रूप से भारी था और संघर्ष के दौरान वह हावी होने की कोशिश कर रहा था।

संघर्ष के दौरान जैसे ही आरोपी जमीन पर गिरा, विनय उसके ऊपर बैठ गए। तभी आरोपी ने पास में पड़ा बड़ा पत्थर उठाकर उनके सिर पर चार से पांच बार वार किए। सिर से खून बहने लगा, लेकिन विनय ने उसे नहीं छोड़ा। उन्हें पता था कि अगर आरोपी भाग गया तो दोबारा पकड़ना मुश्किल होगा।

तालाब में करीब 5 घंटे तक गोताखोरों ने तलाश की।

तालाब में करीब 5 घंटे तक गोताखोरों ने तलाश की।

अकेले ही करता था चोरी, ट्रेनों में बन गया था ‘एक्सपर्ट’

बिजनौर निवासी हरविंदर पहले अपने भाई और साथी रिंकू के साथ चोरी करता था, लेकिन बाद में उसने अकेले ही वारदातें करना शुरू कर दीं। कुछ ही समय में वह चलती ट्रेनों में चोरी करने में माहिर हो गया। एसी कोच में सफर कर टीसी से बचने के लिए बाथरूम में छिप जाता था और रात में यात्रियों का कीमती सामान चुरा लेता था।

केरल सहित कई राज्यों की पुलिस करेगी पूछताछ

आरपीएफ थाना प्रभारी राजीव खरब के अनुसार, आरोपी को रेलवे कोर्ट में पेश करने के बाद पूछताछ के लिए भोपाल जीआरपी को सौंपा गया है। अब केरल, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और विशाखापट्टनम सहित कई राज्यों की पुलिस उससे पूछताछ के लिए मध्य प्रदेश आने वाली है।

‘हजारों चोरी की, पर पहचान नहीं खुली’

हरविंदर ने बताया कि उसने अब तक हजारों चोरी की वारदातों को अंजाम दिया, लेकिन कभी ऐसा कोई सबूत नहीं छोड़ा जिससे पुलिस उसकी पहचान तक पहुंच सके।

जीआरपी, आरपीएफ या जिला पुलिस किसी को भी उसका असली नाम और पहचान पता नहीं थी। यही वजह रही कि लंबे समय तक वह पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।

उसने यह भी कहा कि अब जब वह पकड़ा जा चुका है, तो पूरे देश को पता चल गया है कि ट्रेनों में चोरी करने वाला कुख्यात चोर कौन है।

5 घंटे की मशक्कत के बाद आरोपी को बाहर निकाला।

5 घंटे की मशक्कत के बाद आरोपी को बाहर निकाला।

पार्षद का चुनाव जीता, फिर बना चोर

बिजनौर निवासी हरविंदर सिंह ने 2017 में पार्षद का चुनाव भी जीता था। हालांकि, कुछ ही समय में उसने राजनीति छोड़ दी और चोरी की राह पकड़ ली। इसके बाद वह लगातार वारदातों को अंजाम देता रहा और कम समय में बड़ी रकम जुटा ली।

कमल-नाल के सहारे पानी में छिपा रहा आरपीएफ थाना प्रभारी राजीव खरब ने बताया कि जब पुलिस ने उसे घेरा तो वह तालाब में कूद गया और कमल-नाल के सहारे पानी के भीतर छिपा रहा। पूछताछ में उसने बताया कि वह किसी भी कीमत पर पुलिस के हाथ नहीं आना चाहता था, इसलिए यह तरीका अपनाया।

आरपीएफ के अनुसार, हरविंदर कभी अपने साथ मोबाइल या कोई पहचान पत्र नहीं रखता था। यही उसकी सबसे बड़ी चाल थी, जिससे उसकी पहचान उजागर नहीं हो पाती थी और वह सालों तक पुलिस को चकमा देता रहा।

2018 में विजयवाड़ा पुलिस ने उसे चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था।

2018 में विजयवाड़ा पुलिस ने उसे चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था।

ये खबर भी पढ़ें…

5 घंटे तालाब में छिपा रहा 400 चोरियों का मास्टरमाइंड

जबलपुर में पुलिस और एक शातिर अंतरराज्यीय चोर के बीच मंगलवार शाम फिल्मी ड्रामा देखने को मिला। पुलिस को चकमा देने के लिए आरोपी खितौला रेलवे स्टेशन के पास एक काई से भरे तालाब में कूद गया। वह करीब 5 घंटे तक पानी के अंदर छिपा रहा। पूरी खबर पढ़ें

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7 अप्रैल को खितौला थाना पुलिस, गोताखोरों और आरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में हरविंदर सिंह को तालाब में छिपे हुए पकड़ा गया। गुरुवार को उसे रेलवे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से पूछताछ के लिए भोपाल-इटारसी जीआरपी पुलिस को सौंप दिया गया।

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विनय मौर्य ने बताया कि जबलपुर पुलिस की मदद से आरोपी को पकड़कर चौकी लाया जा रहा था। इसी दौरान उसने बाथरूम जाने का बहाना किया। मैं उसे लेकर गया, साथ में साथी आरक्षक आशीष यादव भी थे।

अचानक उसने आशीष को धक्का देकर भागने की कोशिश की। मैंने पीछा कर उसे गिरा दिया, तभी उसने पत्थर उठाकर मेरे सिर पर वार करना शुरू कर दिया। काफी देर तक संघर्ष चलता रहा, लेकिन मैंने उसे पकड़े रखा। बाद में आशीष भी आ गया और हम दोनों उसे पकड़कर चौकी ले आए।

आरोपी को आरपीएफ के हवाले कर दिया गया।

गंभीर घायल, हालत खतरे से बाहर

इस हमले में विनय मौर्य के सिर पर गंभीर चोट आई है। उन्हें शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अब उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। उनकी बहादुरी को देखते हुए आरपीएफ आईजी ने विनय मौर्य और आशीष यादव दोनों को पुरस्कृत किया है।

50 मीटर पीछा, फिर आमने-सामने भिड़ंत, पत्थर मारे पर पकड़ नहीं छोड़ी

विनय मौर्य ने बताया कि आरोपी चौकी से करीब 50 मीटर ही भाग पाया था, तभी उन्होंने उसे पकड़ लिया। इसके बाद दोनों के बीच जमकर हाथापाई हुई। आरोपी शारीरिक रूप से भारी था और संघर्ष के दौरान वह हावी होने की कोशिश कर रहा था।

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जीआरपी, आरपीएफ या जिला पुलिस किसी को भी उसका असली नाम और पहचान पता नहीं थी। यही वजह रही कि लंबे समय तक वह पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।

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पार्षद का चुनाव जीता, फिर बना चोर

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कमल-नाल के सहारे पानी में छिपा रहा आरपीएफ थाना प्रभारी राजीव खरब ने बताया कि जब पुलिस ने उसे घेरा तो वह तालाब में कूद गया और कमल-नाल के सहारे पानी के भीतर छिपा रहा। पूछताछ में उसने बताया कि वह किसी भी कीमत पर पुलिस के हाथ नहीं आना चाहता था, इसलिए यह तरीका अपनाया।

आरपीएफ के अनुसार, हरविंदर कभी अपने साथ मोबाइल या कोई पहचान पत्र नहीं रखता था। यही उसकी सबसे बड़ी चाल थी, जिससे उसकी पहचान उजागर नहीं हो पाती थी और वह सालों तक पुलिस को चकमा देता रहा।

2018 में विजयवाड़ा पुलिस ने उसे चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था।

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