बैतूल जिले के मुल्ताई क्षेत्र के ग्राम खेड़ीरामोशी में जमीन सीमांकन विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस और आदिवासी संगठनों के बाद अब जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) भी आंदोलन में कूद गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए एडीएम अनिता जाट को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य एवं जयस जिलाध्यक्ष संदीप धुर्वे ने किया। जयस ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। संगठन ने 15 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर मुल्ताई बंद किया जाएगा। कब्जे और मारपीट के आरोप ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 24 मार्च 2026 को कुछ दबंग तत्वों ने आदिवासी परिवारों की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया। इस दौरान महिलाओं और बुजुर्गों के साथ अभद्रता और मारपीट की गई, साथ ही महिलाओं के साथ झूमा-झटकी के भी आरोप लगाए गए हैं। संगठन का कहना है कि पीड़ितों को सुरक्षा देने के बजाय उन्हीं के खिलाफ कथित रूप से फर्जी एफआईआर दर्ज कर दी गई, जिससे आदिवासी समाज में आक्रोश और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। जमीन रिकॉर्ड में गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाया जयस ने बताया कि वर्ष 1919 में आदिवासी परिवारों के पास 37.70 एकड़ जमीन दर्ज थी, लेकिन 1972-73 के रिकॉर्ड में यह घटकर लगभग 19.70 एकड़ रह गई। संगठन ने इसे केवल एक गांव नहीं, बल्कि जिले के करीब 1400 गांवों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया है। जयस ने मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच, आदिवासियों पर दर्ज एफआईआर निरस्त करने, दोषियों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई, पीड़ितों को सुरक्षा व मुआवजा देने और पुराने जमीन रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
















































