लगातार 8 सालों से देश में सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा बनाए रखने वाले इंदौर में अब एक बार फिर स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में नंबर-1 बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसे देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने रविवार को जनप्रतिनिधियों, निगम अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बातचीत की। इसमें इंदौर को फिर से शीर्ष स्थान दिलाने की रणनीति पर बातचीत की गई। इसे प्रभावी बनाने के लिए महापौर शहर के विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों, रहवासी संघों, व्यापारियों और संस्थानों के साथ सीधे संवाद कर रहे हैं। रविवार शाम को सिटी बस ऑफिस में हॉस्टल और कोचिंग संस्थानों के संचालकों के साथ उन्होंने स्वच्छता संवाद किया। जिसमें कई संचालक शामिल हुए। बोले – हॉस्टल क्षेत्र सबसे बड़ी चुनौती महापौर ने स्पष्ट कहा कि शहर की स्वच्छता के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों में है जहां हॉस्टल्स हैं, यहां रहने वाले छात्र अक्सर कचरा सड़कों पर फेंक देते हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए सभी संबंधित पक्षों को एक साथ लाना जरूरी है। शहर के हॉस्टल कोचिंग संचालकों ने महापौर से कहा कि शहर के सभी हॉस्टल इंदौर की स्वच्छता के लिए उनके साथ हैं, वहीं कुछ संचालकों ने सुझाव भी दिए जिसके तहत उन्होंने एक नियमावली बनाने के लिए महापौर से कहा जो हॉस्टल में लगाकर छात्रों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का काम करेगी। हॉस्टल्स और छात्रों की जिम्मेदारी पर जोर महापौर ने कहा कि इंदौर एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में छात्र आते हैं। ऐसे में हॉस्टल संचालकों की जिम्मेदारी केवल सुविधाएं देना ही नहीं, बल्कि छात्रों को शहर के प्रति जिम्मेदार बनाना भी है। महापौर ने हॉस्टल संचालकों से कहा कि छात्रों का नियमित ओरिएंटेशन किया जाए और स्वच्छता और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाया जाए। वहीं छात्रों को “स्वच्छता एंबेसडर” के रूप में तैयार किया जाए। संवाद में हॉस्टल क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख समस्याएं सामने आई अधिकारियों ने संचालकों को स्पष्ट किया कि















































