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Anil Ambani Group Assets Seized

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नई दिल्ली43 मिनट पहले

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फाइल फोटो

प्रवर्तन निदेशालय यानी ED) ने आज यानी 11 जुलाई को रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच में कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने ग्रुप की 1,021 करोड़ रुपए की संपत्ति को प्रोविजनल तौर पर जब्त करने का नया आदेश जारी किया है।

ED के मुताबिक, इस कार्रवाई के तहत रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के पास मौजूद रिलायंस पावर के इक्विटी शेयर और सासन पावर व रिलायंस पावर से मिलने वाली कुछ लोन रकम को अटैच किया गया है। इस नए आदेश के बाद मामले में अब तक जब्त की गई कुल संपत्ति का आंकड़ा 20,367 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

CBI की FIR के बाद शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

ED की यह कार्रवाई रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI द्वारा दर्ज की गई FIR पर आधारित है। CBI की इसी शिकायत को आधार बनाकर ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामले की जांच शुरू की थी।

शेल कंपनियों के जरिए ₹15,548 करोड़ का फंड डायवर्ट किया

जांच एजेंसी ने अपने बयान में बताया कि जांच के दौरान यह सामने आया है कि RHFL और RCFL द्वारा जुटाए गए 15,548 करोड़ रुपए के पब्लिक फंड को सिस्टमैटिक तरीके से डायवर्ट किया गया।

इस रकम को अनिल अंबानी ग्रुप द्वारा नियंत्रित और प्रबंधित की जाने वाली कई ‘शेल’ यानी फर्जी या डमी कंपनियों और ग्रुप की अन्य कंपनियों के नेटवर्क के जरिए इधर से उधर ट्रांसफर किया गया था।

अनिल अंबानी ग्रुप पर कई मामलों की जांच

  • ED वर्तमान में अनिल अंबानी ग्रुप के खिलाफ कई मामलों की जांच कर रही है।
  • ग्रुप के खिलाफ एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत 4 एफआईआर दर्ज हैं, जिनकी जांच चल रही है।
  • फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर भी 3 अलग मामलों में ग्रुप के खिलाफ जांच की जा रही है।

अब तक 8 लोग गिरफ्तार, 4 चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं

इस पूरे मामले में केंद्रीय एजेंसी अब तक कुल 4 चार्जशीट (अभियोजन शिकायतें) कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। जांच के दौरान इस घोटाले में शामिल 8 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। ईडी ने यह भी जानकारी दी है कि मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा फेमा (FEMA) के तहत भी ग्रुप की 77.86 करोड़ रुपए की संपत्तियों को पहले ही जब्त किया जा चुका है।

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट क्या है?

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट का मतलब होता है कि आरोपी अब इस संपत्ति (जैसे शेयर या लोन अमाउंट) को बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकता। जब ईडी को लगता है कि कोई संपत्ति अपराध की कमाई से बनाई गई है, तो वह उसे अस्थायी रूप से 180 दिनों के लिए जब्त कर लेती है। इसे बाद में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी से मंजूरी मिलने पर स्थायी जब्त किया जा सकता है।

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प्रवर्तन निदेशालय यानी ED) ने आज यानी 11 जुलाई को रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच में कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने ग्रुप की 1,021 करोड़ रुपए की संपत्ति को प्रोविजनल तौर पर जब्त करने का नया आदेश जारी किया है।

ED के मुताबिक, इस कार्रवाई के तहत रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के पास मौजूद रिलायंस पावर के इक्विटी शेयर और सासन पावर व रिलायंस पावर से मिलने वाली कुछ लोन रकम को अटैच किया गया है। इस नए आदेश के बाद मामले में अब तक जब्त की गई कुल संपत्ति का आंकड़ा 20,367 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

CBI की FIR के बाद शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

ED की यह कार्रवाई रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI द्वारा दर्ज की गई FIR पर आधारित है। CBI की इसी शिकायत को आधार बनाकर ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामले की जांच शुरू की थी।

शेल कंपनियों के जरिए ₹15,548 करोड़ का फंड डायवर्ट किया

जांच एजेंसी ने अपने बयान में बताया कि जांच के दौरान यह सामने आया है कि RHFL और RCFL द्वारा जुटाए गए 15,548 करोड़ रुपए के पब्लिक फंड को सिस्टमैटिक तरीके से डायवर्ट किया गया।

इस रकम को अनिल अंबानी ग्रुप द्वारा नियंत्रित और प्रबंधित की जाने वाली कई ‘शेल’ यानी फर्जी या डमी कंपनियों और ग्रुप की अन्य कंपनियों के नेटवर्क के जरिए इधर से उधर ट्रांसफर किया गया था।

अनिल अंबानी ग्रुप पर कई मामलों की जांच

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  • ग्रुप के खिलाफ एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत 4 एफआईआर दर्ज हैं, जिनकी जांच चल रही है।
  • फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर भी 3 अलग मामलों में ग्रुप के खिलाफ जांच की जा रही है।

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इस पूरे मामले में केंद्रीय एजेंसी अब तक कुल 4 चार्जशीट (अभियोजन शिकायतें) कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। जांच के दौरान इस घोटाले में शामिल 8 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। ईडी ने यह भी जानकारी दी है कि मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा फेमा (FEMA) के तहत भी ग्रुप की 77.86 करोड़ रुपए की संपत्तियों को पहले ही जब्त किया जा चुका है।

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट क्या है?

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट का मतलब होता है कि आरोपी अब इस संपत्ति (जैसे शेयर या लोन अमाउंट) को बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकता। जब ईडी को लगता है कि कोई संपत्ति अपराध की कमाई से बनाई गई है, तो वह उसे अस्थायी रूप से 180 दिनों के लिए जब्त कर लेती है। इसे बाद में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी से मंजूरी मिलने पर स्थायी जब्त किया जा सकता है।

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