पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच चुनाव आयोग ने एक इंटरव्यू वाला डेटा जारी किया है। राज्य में चलाए गए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिजन’ (SIR) अभियान के बाद करीब 91 लाख लाख के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। आयोग ने अभी तक आधिकारिक तौर पर नए वोटरों का वोट नहीं दिया है, उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, राज्य के कुल वोटरों में से लगभग 11.85 प्रतिशत की कटौती की गई है। इस बड़े बदलाव ने राज्य की मोटरसाइकिल को और तेज कर दिया है।
91 लाख नाम अर्थशास्त्र का पूरा गणित
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर तक बंगाल में 7.66 करोड़ वोट थे. जांच प्रक्रिया के बाद अब तक कुल 90.83 लाख लाख का बकाया चुकाया गया है। इनमें से करीब 27.16 लाख नाम अकेले तो प्रमुख अधिकारियों की उस जांच (न्यायनिर्णय) के दौरान कटे, जिसमें 60.06 लाख मतदाताओं की पात्रता पर सवाल उठाए गए थे। यानी जांच के दस्तावेजों में करीब 45 प्रतिशत वोट वोट के लिए अलग-अलग वोट मिले हैं।
मुस्लिम बाहुल्य और शैतान में भारी कटार
आंकड़ों में सबसे बड़े हिस्से मुस्लिम बाहुल्य जिले मुर्शिदाबाद में बताए गए हैं, जहां जांच के आंकड़ों में 11 लाख लोगों में से 4.55 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। इसी तरह बांग्लादेश की सीमा से उत्तर 24 परगना में 3.25 लाख और मालदा में 2.39 लाख नाम बताए गए हैं। दक्षिण 24 परगना में भी करीब 2.23 लाख वोटर्स की छुट्टी कर दी गई है।
नादिया और मतुआ बाहुल्य एशिया का हाल
प्रतिशत के हिसाब से देखें तो नदिया और उत्तर 24 परगना में कितनी स्थिति है और भी स्कूटर वाली है। नादिया जिले में जांच के अनुभाग में आये ओस्टल में से रिकॉर्ड 77.86 प्रतिशत और उत्तर 24 परगना में 55.08 प्रतिशत नाम जारी किये गये हैं। बता दें कि ये इलाका हिंदू ‘नमोशूद्र मतुआ’ समुदाय के प्रभाव वाले माने जाते हैं।
ममता बनर्जी के गढ़ कोलकाता में क्या हुआ?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर वाले ‘कोलकाता दक्षिण’ क्षेत्र में भी करीब 28,000 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। वहीं ‘कोलकाता उत्तर’ में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां आंकड़ों के मुताबिक 64 फीसदी यानी करीब 39,000 लोगों को वोट के लिए वोट मिले हैं।
मतदाता सूची ‘फ़्रीज़’ के लिए प्रथम चरण
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया के तरीके और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत दिया गया है। सोमवार आधी रात के बाद पहले चरण (23 अप्रैल) की 152वीं पोस्ट के लिए वोटर लिस्ट को ‘फ्रीज’ कर दिया गया है, यानी अब इसमें कोई नया नाम नहीं जोड़ा जाएगा। दूसरे चरण की 142 की सूची 9 अप्रैल को लॉक कर देगी।
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