Thursday, 28 May 2026 | 02:43 AM

Trending :

EXCLUSIVE

रायसीना डायलॉग, ईरानी उप-विदेश मंत्री बोले- आखिरी गोली तक लड़ेंगे:ट्रम्प न्यूयॉर्क का मेयर नियुक्त नहीं कर सकते, हमारा लीडर क्या खाक तय करेंगे

रायसीना डायलॉग, ईरानी उप-विदेश मंत्री बोले- आखिरी गोली तक लड़ेंगे:ट्रम्प न्यूयॉर्क का मेयर नियुक्त नहीं कर सकते, हमारा लीडर क्या खाक तय करेंगे

दिल्ली में चल रहे रायसीना डायलॉग 2026 में शुक्रवार को ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह भी शामिल हुए। उन्होंने कहा- तेहरान के पास अमेरिकी-इजराइली हमले के खिलाफ देश की रक्षा के लिए बहादुरी से लड़ने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है, कसम खाई है कि देश आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक विरोध करेगा। उन्होंने कहा- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान में नेतृत्व बदलने की बात करते हैं, जबकि वे अपने ही देश में न्यूयॉर्क के मेयर तक नियुक्त नहीं कर सकते। यह एक तरह का औपनिवेशिक नजरिया है। वे अपने देश में लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन ईरान की लोकतांत्रिक सरकार को गिराना चाहते हैं। ANI से चर्चा के दौरान खतीबजादेह ने कहा- ईरान इस समय पूरी तरह से युद्ध की स्थिति से गुजर रहा है। जब हम बात कर रहे हैं, मेरे साथी नागरिकों पर अमेरिका-इजराइल का लगातार हमला हो रहा है। मुझे लगता है कि अभी ईरान के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वह हमलावर के खिलाफ पूरी तरह से विरोध करे। कुर्द ईरान की पहचान का अहम हिस्सा अमेरिका के संभावित जमीनी हमले के सवाल पर उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी औपनिवेशिक मिशन को रोकने के लिए तैयार है। अपने देश की राजनीतिक व्यवस्था बदलने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के कुर्द समुदाय को अलगाववाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। ईरान के कुर्द देश की पहचान का अहम हिस्सा हैं, जबकि कुछ अलगाववादी समूहों को बाहरी एजेंसियों का समर्थन मिला है। रायसीना डायलॉग 2026 के सेशन में खतीबजादेह से सवाल-जवाब सवाल: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष को आप कैसे देखते हैं?
जवाब: यह ईरान के अस्तित्व की लड़ाई है। कुछ ताकतें ईरान को खत्म करना चाहती हैं। हम हमलावरों को पीछे धकेलने के लिए अपने देश की रक्षा की लड़ाई लड़ रहे हैं। सवाल: क्या इस संघर्ष के दूसरे देशों तक फैलने का खतरा है?
जवाब: हम कोशिश कर रहे हैं कि यह संघर्ष दूसरे इलाकों तक न फैले। ऐसी खबरें भी आई हैं कि मोसाद और इजराइल कुछ जगहों पर फॉल्स-फ्लैग ऑपरेशन की कोशिश कर रहे हैं, जैसे तेल रिफाइनरी या साइप्रस को निशाना बनाना। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि इन घटनाओं की शुरुआत ईरान से नहीं हुई। सवाल: कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि खाड़ी देशों में भी ऐसी गतिविधियां पकड़ी गई हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब: रिपोर्टों के मुताबिक सऊदी अरब और कतर में कुछ मोसाद समूहों को फॉल्स-फ्लैग ऑपरेशन की कोशिश करते हुए पकड़ा गया। हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं है और हम नहीं चाहते कि यह संघर्ष दूसरे देशों तक फैले। सवाल: आप कहते हैं कि यह ‘अस्तित्व की लड़ाई’ है। इसका क्या मतलब है?
जवाब: यह केवल ईरान की लड़ाई नहीं है। जब किसी देश के शीर्ष नेता को निशाना बनाया जाता है, तो यह बहुत खतरनाक मिसाल है। अगर यह नया सामान्य बन गया तो दुनिया के लिए गंभीर खतरा होगा। सवाल: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की बात पर आपका क्या कहना है?
जवाब: ट्रम्प ईरान में नेतृत्व बदलने की बात करते हैं, जबकि वे अपने ही देश में न्यूयॉर्क के मेयर तक नियुक्त नहीं कर सकते। यह एक तरह का औपनिवेशिक नजरिया है। वे अपने देश में लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन ईरान की लोकतांत्रिक सरकार को गिराना चाहते हैं। सवाल: क्या इस युद्ध को रोकने का कोई रास्ता है?
जवाब: यह उस पक्ष पर निर्भर है जिसने आक्रमण शुरू किया। अगर वे आज हमला रोक दें, तो हम केवल अपनी रक्षा कर रहे हैं, हम आक्रमण नहीं कर रहे। किसी भी देश के लिए कूटनीति ही सबसे अच्छा रास्ता है। मुझे संदेह है कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन कूटनीति और संवाद की अहमियत को समझता है या नहीं। अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांत भी खतरे में खतीबजादेह ने इस संघर्ष को बाहरी हमले के खिलाफ जरूरी राष्ट्रीय लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान होना चाहिए और इसे चुनिंदा तरीके से लागू नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार इस समय अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांत भी खतरे में हैं। हिंद महासागर में जो जहाज डूबा, उसे भारत ने बुलाया था खतीबजादेह ने हिंद महासागर में डूबे ईरानी जहाज पर कहा- यह जहाज भारत के निमंत्रण पर एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेने आया था। वह औपचारिक कार्यक्रम के लिए था, उस पर हथियार नहीं थे। इस घटना में कई युवा ईरानी नाविकों की मौत हुई। भारत के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि उनकी भारत के विदेश मंत्री से संक्षिप्त मुलाकात हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान और भारत के बीच पुराने सभ्यतागत संबंध हैं और दोनों देश इन रिश्तों को काफी महत्व देते हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में टीमों की संख्या बढ़ाने की तैयारी:9 से 12 हो सकती है, अफगानिस्तान-जिम्बाब्वे को मौका संभव; जुलाई में आखिरी फैसला

May 16, 2026/
8:16 am

भविष्य में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में 9 की बजाय सभी 12 फुल मेंबर देशों की टीमें खेल सकती हैं।...

Jabalpur Bargi Dam Rescue Operation LIVE Photos Update

May 2, 2026/
10:03 am

मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे में शनिवार को रेस्क्यू के दौरान दो बच्चों के शव...

CBSE 12th Result 2026 soon at cbseresults.nic.in and cbse.gov.in. (File/Representative Image)

April 21, 2026/
10:27 am

आखरी अपडेट:21 अप्रैल, 2026, 10:27 IST यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार मौजूदा लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने...

authorimg

April 30, 2026/
8:08 am

Summer Hydration Drink: गर्मी जब अपने पूरे तेवर में होती है, तब सिर्फ ठंडा पी लेना काफी नहीं होता-शरीर को...

पंजाब-चंडीगढ़ दिनभर,10 बड़ी खबरें:CM बोले- अमित शाह का नाम लेकर आदमी मरा; हिडन कैमरे से न्यूड VIDEO बनाया; चलती कार में हार्टअटैक; 1 अप्रैल से शराब महंगी

March 24, 2026/
5:55 pm

नमस्कार, पंजाब की आज की सबसे बड़ी खबर DM गगनदीप रंधावा के सुसाइड केस से जुड़ी रही। जिसमें एक तरफ...

NTPC 515 Jobs & SEBI 91 Vacancies

February 11, 2026/
8:00 pm

10 दिन पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी NTPC में 515 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

रायसीना डायलॉग, ईरानी उप-विदेश मंत्री बोले- आखिरी गोली तक लड़ेंगे:ट्रम्प न्यूयॉर्क का मेयर नियुक्त नहीं कर सकते, हमारा लीडर क्या खाक तय करेंगे

रायसीना डायलॉग, ईरानी उप-विदेश मंत्री बोले- आखिरी गोली तक लड़ेंगे:ट्रम्प न्यूयॉर्क का मेयर नियुक्त नहीं कर सकते, हमारा लीडर क्या खाक तय करेंगे

दिल्ली में चल रहे रायसीना डायलॉग 2026 में शुक्रवार को ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह भी शामिल हुए। उन्होंने कहा- तेहरान के पास अमेरिकी-इजराइली हमले के खिलाफ देश की रक्षा के लिए बहादुरी से लड़ने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है, कसम खाई है कि देश आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक विरोध करेगा। उन्होंने कहा- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान में नेतृत्व बदलने की बात करते हैं, जबकि वे अपने ही देश में न्यूयॉर्क के मेयर तक नियुक्त नहीं कर सकते। यह एक तरह का औपनिवेशिक नजरिया है। वे अपने देश में लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन ईरान की लोकतांत्रिक सरकार को गिराना चाहते हैं। ANI से चर्चा के दौरान खतीबजादेह ने कहा- ईरान इस समय पूरी तरह से युद्ध की स्थिति से गुजर रहा है। जब हम बात कर रहे हैं, मेरे साथी नागरिकों पर अमेरिका-इजराइल का लगातार हमला हो रहा है। मुझे लगता है कि अभी ईरान के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वह हमलावर के खिलाफ पूरी तरह से विरोध करे। कुर्द ईरान की पहचान का अहम हिस्सा अमेरिका के संभावित जमीनी हमले के सवाल पर उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी औपनिवेशिक मिशन को रोकने के लिए तैयार है। अपने देश की राजनीतिक व्यवस्था बदलने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के कुर्द समुदाय को अलगाववाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। ईरान के कुर्द देश की पहचान का अहम हिस्सा हैं, जबकि कुछ अलगाववादी समूहों को बाहरी एजेंसियों का समर्थन मिला है। रायसीना डायलॉग 2026 के सेशन में खतीबजादेह से सवाल-जवाब सवाल: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष को आप कैसे देखते हैं?
जवाब: यह ईरान के अस्तित्व की लड़ाई है। कुछ ताकतें ईरान को खत्म करना चाहती हैं। हम हमलावरों को पीछे धकेलने के लिए अपने देश की रक्षा की लड़ाई लड़ रहे हैं। सवाल: क्या इस संघर्ष के दूसरे देशों तक फैलने का खतरा है?
जवाब: हम कोशिश कर रहे हैं कि यह संघर्ष दूसरे इलाकों तक न फैले। ऐसी खबरें भी आई हैं कि मोसाद और इजराइल कुछ जगहों पर फॉल्स-फ्लैग ऑपरेशन की कोशिश कर रहे हैं, जैसे तेल रिफाइनरी या साइप्रस को निशाना बनाना। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि इन घटनाओं की शुरुआत ईरान से नहीं हुई। सवाल: कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि खाड़ी देशों में भी ऐसी गतिविधियां पकड़ी गई हैं। इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब: रिपोर्टों के मुताबिक सऊदी अरब और कतर में कुछ मोसाद समूहों को फॉल्स-फ्लैग ऑपरेशन की कोशिश करते हुए पकड़ा गया। हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं है और हम नहीं चाहते कि यह संघर्ष दूसरे देशों तक फैले। सवाल: आप कहते हैं कि यह ‘अस्तित्व की लड़ाई’ है। इसका क्या मतलब है?
जवाब: यह केवल ईरान की लड़ाई नहीं है। जब किसी देश के शीर्ष नेता को निशाना बनाया जाता है, तो यह बहुत खतरनाक मिसाल है। अगर यह नया सामान्य बन गया तो दुनिया के लिए गंभीर खतरा होगा। सवाल: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की बात पर आपका क्या कहना है?
जवाब: ट्रम्प ईरान में नेतृत्व बदलने की बात करते हैं, जबकि वे अपने ही देश में न्यूयॉर्क के मेयर तक नियुक्त नहीं कर सकते। यह एक तरह का औपनिवेशिक नजरिया है। वे अपने देश में लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन ईरान की लोकतांत्रिक सरकार को गिराना चाहते हैं। सवाल: क्या इस युद्ध को रोकने का कोई रास्ता है?
जवाब: यह उस पक्ष पर निर्भर है जिसने आक्रमण शुरू किया। अगर वे आज हमला रोक दें, तो हम केवल अपनी रक्षा कर रहे हैं, हम आक्रमण नहीं कर रहे। किसी भी देश के लिए कूटनीति ही सबसे अच्छा रास्ता है। मुझे संदेह है कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन कूटनीति और संवाद की अहमियत को समझता है या नहीं। अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांत भी खतरे में खतीबजादेह ने इस संघर्ष को बाहरी हमले के खिलाफ जरूरी राष्ट्रीय लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान होना चाहिए और इसे चुनिंदा तरीके से लागू नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार इस समय अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांत भी खतरे में हैं। हिंद महासागर में जो जहाज डूबा, उसे भारत ने बुलाया था खतीबजादेह ने हिंद महासागर में डूबे ईरानी जहाज पर कहा- यह जहाज भारत के निमंत्रण पर एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेने आया था। वह औपचारिक कार्यक्रम के लिए था, उस पर हथियार नहीं थे। इस घटना में कई युवा ईरानी नाविकों की मौत हुई। भारत के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि उनकी भारत के विदेश मंत्री से संक्षिप्त मुलाकात हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान और भारत के बीच पुराने सभ्यतागत संबंध हैं और दोनों देश इन रिश्तों को काफी महत्व देते हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.