रायसेन की कृषि उपज मंडी में नई फसल की आवक शुरू हो गई है। मंगलवार को मंडी में नया गेहूं और चना पहुंचा, जिसे व्यापारियों ने अच्छे दामों पर खरीदा। इसके साथ ही धान के बढ़े हुए भाव के कारण उसकी आवक में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे मंडी में किसानों और व्यापारियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। रायसेन कृषि उपज मंडी में नई फसल पहुंचनी शुरू मंगलवार को रायसेन कृषि उपज मंडी में नई फसल के रूप में गेहूं और चना पहुंचा। किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचे, जहां व्यापारियों ने इन फसलों की खरीद की। नई फसल की आवक शुरू होने से मंडी में चहल-पहल बढ़ गई है और किसानों को अपनी उपज के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है। चार ट्रालियों में 43 क्विंटल चना पहुंचा मंगलवार को मंडी में चार ट्रालियों में कुल 43 क्विंटल चना पहुंचा। व्यापारियों ने इस चने को अधिकतम 5300 रुपये और न्यूनतम 5100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदा। किसानों का कहना है कि मंडी में चने के अच्छे भाव मिलने से उन्हें राहत मिल रही है। चार ट्रालियों में 65 क्विंटल नया गेहूं आया इसी तरह मंडी में चार ट्रालियों में कुल 65 क्विंटल नया गेहूं भी पहुंचा। व्यापारियों ने इस गेहूं की खरीद अधिकतम 2430 रुपये और न्यूनतम 2300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर की। नई फसल आने से किसानों को बाजार में अपनी उपज बेचने का अवसर मिल रहा है। धान की आवक में भी हुई बढ़ोतरी मंडी में धान की आवक में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मंगलवार को मंडी में 184 ट्रालियों में कुल 5789 क्विंटल धान पहुंची। व्यापारियों ने धान को अधिकतम 4460 रुपये और न्यूनतम 2500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदा। किसानों को मिल रहे अच्छे भाव किसानों का कहना है कि इस समय मंडी में चने और धान की उपज के अच्छे दाम मिल रहे हैं। इससे उन्हें अपनी फसल बेचने में लाभ मिल रहा है। कई किसानों का कहना है कि इस बार बाजार में मांग अच्छी होने से उन्हें उम्मीद से बेहतर कीमत मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से बढ़ी धान की मांग किसानों और व्यापारियों का कहना है कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे घटनाक्रमों के कारण स्थानीय मिलों में धान की मांग बढ़ गई है। इस मांग का असर मंडी के भाव पर भी देखने को मिल रहा है, जिससे किसानों को धान के बेहतर दाम मिल रहे हैं। 1 अप्रैल से शुरू होगी सरकारी खरीदी इस वर्ष सरकारी खरीदी केंद्रों पर गेहूं और चने की खरीद 1 अप्रैल से शुरू की जाएगी। सरकारी खरीदी शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल लेकर खरीदी केंद्रों पर पहुंचेंगे, जिससे मंडियों और खरीदी केंद्रों पर गतिविधियां और बढ़ने की संभावना है।













































