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लगातार बढ़ रहा टेंपरेचर, सेहत के लिए कौन सी परेशानियां कर सकता है पैदा? डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके

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How Temperatures Affect Your Heart: इस बार गर्मी का असर कुछ ज्यादा देखने को मिल रहा है. मार्च का महीना आधा भी नहीं बीता है, लेकिन धूप से लोगों का बुरा हाल हो गया है. टेंपरेचर तेजी से बढ़ रहा है और दोपहर के वक्त लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है. देश के कई हिस्सों में पारा सामान्य से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ता तापमान केवल असहजता ही पैदा नहीं करता, बल्कि यह हमारे शरीर पर काफी असर डालता है. यह थर्मोरेगुलेशन पर भारी दबाव डालता है. अगर इस बढ़ते तापमान को लेकर सावधानी न बरती जाए, तो यह डिहाइड्रेशन और थकान से लेकर जानलेवा मल्टी-ऑर्गन फेलियर तक का कारण बन सकता है. इसे लेकर लापरवाही बरतना खतरनाक है.

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और सीनियर फिजीशियन डॉ. अनिल बंसल ने News18 को बताया कि गर्मियों में जब तापमान बढ़ता है, तब अधिकतर लोग डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं. दरअसल गर्मी में शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मात्रा में पसीना निकालता है. इस प्रक्रिया में केवल पानी ही नहीं, बल्कि शरीर के जरूरी साल्ट जैसे सोडियम और पोटेशियम भी बाहर निकल जाते हैं. इसे इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस कहा जाता है. पानी की कमी से डिहाइड्रेशन की नौबत आ जाती है. इससे हार्ट पर दबाव बढ़ता है और किडनी फंक्शन पर भी बुरा असर पड़ता है. गर्मी में प्यास लगने का इंतजार न करें, क्योंकि प्यास महसूस होना इस बात का संकेत है कि आपका शरीर पहले से ही डिहाइड्रेटेड हो चुका है.

डॉक्टर बंसल ने बताया कि बढ़ते तापमान की सबसे गंभीर कंडीशन हीट स्ट्रोक यानी लू लगना है. जब शरीर का तापमान 104°F के पार चला जाता है, तो ब्रेन और अन्य महत्वपूर्ण ऑर्गन्स काम करना बंद कर सकते हैं. इससे पहले हीट एग्जॉशन की स्थिति आती है, जिसमें अत्यधिक पसीना आना, चक्कर आना, कमजोरी और मतली जैसे लक्षण दिखते हैं. अगर इस स्तर पर शरीर को ठंडा न किया जाए, तो यह हीट स्ट्रोक में बदल जाता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है. इसमें व्यक्ति बेहोश हो सकता है और सही समय पर इलाज न मिलने पर यह घातक साबित हो सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

एक्सपर्ट के मुताबिक बढ़ता तापमान दिल के मरीजों के लिए खतरनाक है. शरीर को ठंडा रखने के लिए हार्ट को स्किन की ओर खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हार्ट रेट बढ़ जाता है. जिन लोगों को पहले से ही हार्ट डिजीज या हाई ब्लड प्रेशर है, उनके लिए यह अतिरिक्त दबाव हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा सकता है. इसके अलावा अत्यधिक गर्मी और प्रदूषण मिलकर हवा की गुणवत्ता खराब करते हैं, जिससे अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है. सांस के मरीजों को भी गर्मियों में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.

सूरज की यूवी किरणों और पसीने के मेल से त्वचा की कई बीमारियां जन्म लेती हैं. फोटोडर्मेटाइटिस या सन एलर्जी, सनबर्न और घमोरियां इस मौसम की कॉमन समस्याएं हैं. पसीना आने के बाद जब हवा नहीं लगती, तो पसीने की ग्रंथियां बंद हो जाती हैं, जिससे त्वचा पर लाल दाने और खुजली होने लगती है. इसके अलावा नमी और गर्मी के कारण फंगल इन्फेक्शन जैसे- दाद का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है. गर्मियों में ढीले कपड़े पहनने चाहिए, ताकि स्किन से जुड़ी परेशानियां न हों.

डॉक्टर अनिल बंसल ने बताया कि बढ़ते तापमान से बचने के लिए सबसे जरूरी है स्मार्ट हाइड्रेशन. केवल सादा पानी ही नहीं, बल्कि ओआरएस, नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ का सेवन करें, ताकि इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस बना रहे. दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें. अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर को छाते या गीले कपड़े से ढकें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें. खान-पान में खीरा, तरबूज और खरबूजा जैसे पानी से भरपूर फलों को शामिल करें और कैफीन या शराब से बचें, क्योंकि ये डिहाइड्रेशन बढ़ाते हैं. बचाव ही सबसे बेहतर इलाज है.

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दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और सीनियर फिजीशियन डॉ. अनिल बंसल ने News18 को बताया कि गर्मियों में जब तापमान बढ़ता है, तब अधिकतर लोग डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं. दरअसल गर्मी में शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मात्रा में पसीना निकालता है. इस प्रक्रिया में केवल पानी ही नहीं, बल्कि शरीर के जरूरी साल्ट जैसे सोडियम और पोटेशियम भी बाहर निकल जाते हैं. इसे इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस कहा जाता है. पानी की कमी से डिहाइड्रेशन की नौबत आ जाती है. इससे हार्ट पर दबाव बढ़ता है और किडनी फंक्शन पर भी बुरा असर पड़ता है. गर्मी में प्यास लगने का इंतजार न करें, क्योंकि प्यास महसूस होना इस बात का संकेत है कि आपका शरीर पहले से ही डिहाइड्रेटेड हो चुका है.

डॉक्टर बंसल ने बताया कि बढ़ते तापमान की सबसे गंभीर कंडीशन हीट स्ट्रोक यानी लू लगना है. जब शरीर का तापमान 104°F के पार चला जाता है, तो ब्रेन और अन्य महत्वपूर्ण ऑर्गन्स काम करना बंद कर सकते हैं. इससे पहले हीट एग्जॉशन की स्थिति आती है, जिसमें अत्यधिक पसीना आना, चक्कर आना, कमजोरी और मतली जैसे लक्षण दिखते हैं. अगर इस स्तर पर शरीर को ठंडा न किया जाए, तो यह हीट स्ट्रोक में बदल जाता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है. इसमें व्यक्ति बेहोश हो सकता है और सही समय पर इलाज न मिलने पर यह घातक साबित हो सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

एक्सपर्ट के मुताबिक बढ़ता तापमान दिल के मरीजों के लिए खतरनाक है. शरीर को ठंडा रखने के लिए हार्ट को स्किन की ओर खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हार्ट रेट बढ़ जाता है. जिन लोगों को पहले से ही हार्ट डिजीज या हाई ब्लड प्रेशर है, उनके लिए यह अतिरिक्त दबाव हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा सकता है. इसके अलावा अत्यधिक गर्मी और प्रदूषण मिलकर हवा की गुणवत्ता खराब करते हैं, जिससे अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है. सांस के मरीजों को भी गर्मियों में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.

सूरज की यूवी किरणों और पसीने के मेल से त्वचा की कई बीमारियां जन्म लेती हैं. फोटोडर्मेटाइटिस या सन एलर्जी, सनबर्न और घमोरियां इस मौसम की कॉमन समस्याएं हैं. पसीना आने के बाद जब हवा नहीं लगती, तो पसीने की ग्रंथियां बंद हो जाती हैं, जिससे त्वचा पर लाल दाने और खुजली होने लगती है. इसके अलावा नमी और गर्मी के कारण फंगल इन्फेक्शन जैसे- दाद का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है. गर्मियों में ढीले कपड़े पहनने चाहिए, ताकि स्किन से जुड़ी परेशानियां न हों.

डॉक्टर अनिल बंसल ने बताया कि बढ़ते तापमान से बचने के लिए सबसे जरूरी है स्मार्ट हाइड्रेशन. केवल सादा पानी ही नहीं, बल्कि ओआरएस, नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ का सेवन करें, ताकि इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस बना रहे. दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें. अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर को छाते या गीले कपड़े से ढकें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें. खान-पान में खीरा, तरबूज और खरबूजा जैसे पानी से भरपूर फलों को शामिल करें और कैफीन या शराब से बचें, क्योंकि ये डिहाइड्रेशन बढ़ाते हैं. बचाव ही सबसे बेहतर इलाज है.

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