बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: कोलकाता की सड़कों पर इस बार चुनाव सिर्फ पोस्टर, रेल और सुरक्षा रेल्वे तक सीमित नहीं है। यहां लोकतंत्र का स्वाद भी मिल रहा है—वो भी लोकतंत्र के साथ। जब एक तरफ सुरक्षा बल चौकन्ने हैं, तो वहीं शहर के प्रतिष्ठित मिठाई घोटालेबाजों ने चुनाव को एक अलग रंग दे दिया है।
मिष्ठान विक्रेता ने ‘इलेक्शन स्पेशल मैसेज’ लॉन्च किया
कोलकाता के एक प्रमुख मिष्ठान विक्रेता ने ‘इलेक्शन स्पेशल’ मैसेज लॉन्च किया है। ये पारंपरिक बाहुबली अब खास रंग में रंगी नजर आ रही है-टीएमसी, बीजेपी और सी सूचियां(एम) के चुनाव चिह्न के साथ। हर सन्देश सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि ये राक्षस की कहानी कह रही है।
दुकान के मालिक कहते हैं, “बंगाल में मिठाई के बिना कुछ नहीं होता, न कोई क्रांति होती और न ही चुनाव। हम चाहते हैं कि लोग लोकतंत्र के इस त्योहार पर कुछ मीठा खाएं।”
#घड़ी | पश्चिम बंगाल | 29 अप्रैल को होने वाले पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले कोलकाता में एक मिठाई की दुकान पर विशेष चुनाव-थीम वाले संदेश तैयार किए गए हैं; 4 मई को गिनती होनी है. pic.twitter.com/VRVZnueSs4
– एएनआई (@ANI) 26 अप्रैल 2026
यानी जहां एक तरफ वोट की राजनीति है, वहीं दूसरी तरफ ‘मीठी राजनीति’ भी लोगों को आकर्षित कर रही है।
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हाई प्रोफाइल चैंपियनशिप प्रतियोगिता 29 अप्रैल को होने वाली है
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा, जिसमें 142 सीटों पर मतदान होगा। यह वही चरण है जहां नोएडा के मजबूत गढ़—कोलकाता और आसपास के शहरी औद्योगिक क्षेत्र—दांव पर हैं। बीजेपी ने यहां सेंध लगाने की पूरी कोशिश की है, जिसमें मुकाबला बेहद दिलचस्प और लंबा हो गया है।
पहले चरण में करीब 93% की रिकॉर्ड वोट ने पहले ही यह संकेत दे दिया है कि जनता इस बार पूरी तरह से सक्रिय है। ऐसे में दूसरे चरण पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला भी इसी चरण में है-मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट पर असफ़लता की कोशिश में हैं, जहां उनका सामना उम्मीदवार के नेता सुवेंदु अधिकारी से है।
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कुल 294 नामांकन वाले इस चुनाव में यह चरण खास इसलिए भी है क्योंकि तय किया गया है कि क्या शहरवासी अपना किला बचाए क्षितिज या बीजेपी दक्षिण बंगाल में बड़ा राजनीतिक प्रवेश कर सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ राजनीतिक बयानबाजी और रणनीतियां अपनी-अपनी चरम पर हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता के बीच चुनाव में एक उत्सव के रूप में भी उत्साह बना हुआ है–सामुदायिक मिठाइयां भी अपनी-अपनी भूमिका निभा रही हैं।
कोलकाता के इन ‘सियासी संदेश’ में दिखाया गया है कि बंगाल में चुनाव सिर्फ सत्ता का खेल नहीं, बल्कि संस्कृति, भावना और परंपरा का भी हिस्सा है। अब 29 अप्रैल को जब वोट पड़ेंगे, तो यह होगा कि लोकतंत्र का यह ‘मीठा स्वाद’ जातीय पक्ष में जाता है – और जाति के लिए गद्दार साबित होता है।















































