उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम की सड़कों पर रोज की तरह 6 मई की रात करीब सवा दस बजे हलचल थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह शानदार एक क्राइम सीन में बदलाव वाला था। ब्लैक स्कॉर्पियो, खून से सनी दर्शनीय स्थल और रोड पर पादरियों की गाड़ी- पुलिस स्टेशन के माने तो यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि एक सु वैज्ञानिक ‘एग्जीक्यूशन’ का संकेत दे रही थी। मारे गए पूर्व राष्ट्रपति चंद्रनाथ रथ भाजपा नेता और सेंचुरी के नए सिरमौर के प्रबल दावेदार शुभेंदु अधिकारी के अत्यंत करीबी सहयोगी और निजी सहायक थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच में साफ कहा गया है कि यह हत्या नहीं, ‘ऑपरेशन’ था।
पीछा शुरू हुआ शहर से, अंजाम घर के पास
अध्ययन शास्त्र के अनुसार, चंद्रनाथ रथ की गाड़ी कोलकाता से ही ट्रैक की जा रही थी। सीसीटीवी फुटेज में एक सिल्वर कलर की सैंट्रो कार (WB74AX2270) और एक मोटरसाइकिल कॉन्स्टेंट के पीछे उनकी स्कार्पियो दिखाई दे रही है। जैसे ही गाड़ी मध्यमग्राम के दोहाड़िया इलाके में दक्षिणी घर से 100 मीटर दूर का खेल शुरू हो गया था। सैंट्रो कार ने ओवरटेक कार स्कॉर्पियो को मॉडल स्लो किया। अगले ही पल बिना नंबर प्लेट वाली बाइक पास आई और फिर शुरू हुई बारिश की बारिश।
10 से अधिक गोल आग, छाती-सर पर फ़्लोरिडा
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एलिजाबेथ ने सीधे हथियार के पास से उड़ान भरी थी। पुलिस के मुताबिक कम से कम 10 गोलियां चलाईं। हालाँकि यह संख्या बहुत अधिक भी हो सकती है. चंद्रनाथ रथ को घोड़े, पेट और सिर में स्टॉक स्टॉक। उनके संगीत पर ही गंभीर संकट आ गया। संयुक्त उद्यम में सहयोगी अस्पताल लेकर भागे, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही वो दम तोड़ चुके थे। अस्पताल के वकीलों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनका ड्राइवर बुद्धदेव बेड़ा भी शूटिंग में घायल हो गया और अभी भी कोलकाता के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।
रेकी से एस्केप रूट तक पूरी तरह से
पुलिस का कहना है कि राठौड़ ने पहले इलाके की रेकी रोज की, चंद्रनाथ रथ केना के रूट और टाइमिंग को समझाया और फिर पूरी तरह से काम किया। वसीयत के बाद बाइक सवार दो दिशाओं में बरात हो गए। एक जेसोर रोड की ओर और दूसरा किंगरहॉट का सबसे बड़ा निर्माण कार्य निकल गया। जिस स्कार्पियो कार को छोड़ा गया था, उसे मशीन पर छोड़ दिया गया था। पुलिस ने गाड़ी को कब्जे में लेकर जांच की, जिसमें सामने आया कि कार का नंबर प्लेट फर्जी था, जबकि असली मालिक सिलीगुड़ी का एक व्यक्ति है, जिसने गाड़ी के लिए अपनी तस्वीरें ऑनलाइन डाली थीं।
ग्लॉक नोट का शक ‘प्रोफ़ेशनल हिट’ का संकट
फ़ोरेंसिक टीम को मशीन से खोखे, जिंदा कार्ट्रिज और कलाकृतियों के निशान मिले हैं। आरंभिक जांच में शक है कि ग्रैब्स ने ऑस्ट्रियन ग्लॉक जैसे आधुनिक हथियार का इस्तेमाल किया था। एक वयोवृद्ध अधिकारी का कहना है, “ऐसे हथियार आम बाजारों के पास नहीं होते। इससे पेशेवर फिल्मों की हानि और मजबूती होती है।”
सीसीटीवी में कैद हर निकल गया, लेकिन डाकू चोर
पुलिस अब जेसोर रोड और आसपास के इलाकों में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। कई अभिलेख बनाए गए हैं और तीन स्थानीय क्लिज़ोरिज़ोन से पूछताछ हो रही है। अतुल सिद्ध नाथ गुप्ता ने बताया, “एक ग़रीब गाड़ी को ज़ब्त कर लिया गया है। नंबर प्लेट से चोरी की गई थी। कई सीसीटीवी फुटेज की जांच हो रही है।” फिर भी, मुख्य व्यापारी अभी भी बच्चा है और यही जांच की सबसे बड़ी चुनौती है।
यथार्थ की शुरूआत: आरोप-प्रत्यारोप तेज
इस हत्या ने राजनीतिक पारा भी बढ़ाया है। शुभेंदु अधिकारी ने इसे प्री-प्लांड म्युचुअल और व्यक्तिगत क्षति का वर्णन किया और सोशियलिटी से शांति बनाए रखने की अपील की। वहीं बीजेपी नेता अर्जुन सिंह ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा, “अभिषेक बनर्जी ने इस हत्या की साजिश रची है… वे संदेश देना चाहते हैं कि सत्य में कोई अस्तित्व नहीं है और वे इसकी साजिश रच रहे हैं।” दूसरी तरफ कैथोलिक कांग्रेस ने इन वामपंथियों को खारिज करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है और मामले की अदालत में जांच की मांग की जा रही है।
जांच के सामने बड़ा सवाल
मध्यमग्राम के इस विश्वविद्यालय में शिलालेखों के सामने कई अभिलेख वाले प्रश्न दिए गए हैं। सबसे पहला सवाल यही है कि क्या ये सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्वियों का मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है? जिस तरह के दस्तावेज़ों को ट्रैक किया गया था, रास्ता निकाला गया और उत्खनन से उत्खनन किया गया, वह सामान्य अपराध की तरह नहीं दिखता है। दूसरा अहम किरदार- क्या इस हमले में प्रोफेशनल स्टूडियो शामिल थे? प्रारंभिक संकेत हथियार और हमलों का साधन किसी भी शिक्षण नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।
सबसे बड़ा सवाल- चंद्रनाथ रथ को सबसे पहले क्या कहा जा रहा था? अगर हां तो क्या सुरक्षा में कोई खराबी हुई? यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं है, बल्कि एक सु नियोजित ऑपरेशन जैसा है, जहां टाइमिंग, कॉमेडी और एस्केप सब कुछ हासिल था। अब पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ चौथे को गोली मारने की नहीं, बल्कि उस मकसद की झलक सामने आई है, जिसने इस हत्या को अंजाम तक पहुंचाया। क्योंकि समय अभी सत्ता के स्थानांतरण का है, राजनीतिक आरोप सत्ता से बेदख़ल पार्टी पर लग रहे हैं और जो सत्ता में आ रहा है, वो पीड़ित है।
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