अटलांटिक महासागर में ‘एमवी होंडियस’ नाम के क्रूज़ जहाज पर हंता वायरस के हमले में तीन लोगों की जान चली गई। इस वायरस ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
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ऐसे में जानते हैं अंतिम हंता वायरस क्या है, कैसे फल है, इसके लक्षण और बचाव क्या है।
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हंता वायरल चेज़र से क्राफ्ट है। WHO का कहना है, अगर कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति या उसके संपर्क में आने के बाद अपने चेहरे को छूता है, तो खतरे की संभावना बढ़ जाती है।
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यह इंसान के फेफड़े या किडनी पर सीधा हमला करता है। फेफड़े में संक्रमण होने पर सांस लेने में तकलीफ होती है, जिससे मरीज की जान तक जा सकती है।
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आमतौर पर हंता वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं होता है। इसके संक्रमण का पता लगाने में एक से आठ हजार का समय लग सकता है।
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हंता वायरस से अगर कोई विकृति होती है तो उसे सिरदर्द, सिरदर्द, बुखार, थकान, अनिद्रा, सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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इसके अलावा इस वायरस से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी, फेफड़े में पानी भरना, किडनी फेल होना, लोबिया गंजापन जैसी समस्या हो सकती है।
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हंता वायरस से बचाव के लिए साफ-सफाई का जरूरी ध्यान रखना जरूरी है। चहारदीवारी या अपार्टमेंट वाली जगह से दूरी रखें और घर को साफ रखें।
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किसी भी वास्तुशिल्प स्थान की सफाई में टाइम मास्क या ग्लव्स का उपयोग कमाल साबित हो सकता है।
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