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10 Big Changes in Perks & Salary Tax from April 2026

10 Big Changes in Perks & Salary Tax from April 2026
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नई दिल्ली17 मिनट पहले

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केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से देश में नया इनकम टैक्स सिस्टम लागू करने जा रही है। यह नया कानून मौजूदा इंकम-टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। इनकम-टैक्स रूल्स 2026 के ड्राफ्ट के मुताबिक, मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों और बड़े बिजनेस घरानों के लिए टैक्स कैलकुलेशन के तरीके पूरी तरह बदल जाएंगे।

इन ड्राफ्ट नियमों को 22 फरवरी 2026 तक जनता के सुझावों के लिए रखा गया था। नए नियमों का मकसद सैलरी के साथ मिलने वाली सुविधाओं जैसे- कंपनी का घर, कार और गिफ्ट्स की वैल्यू तय करने के लिए एक फिक्स फॉर्मूला बनाना है, ताकि टैक्स असेसमेंट यानी कैलकुलेशन में पारदर्शिता रहे।

10 बड़े बदलाव जो आपकी जेब पर असर डालेंगे…

1. नया कानून FY 2026-27 से प्रभावी होगा

इनकम-टैक्स रूल्स 2026 आधिकारिक तौर पर 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इसका मतलब है कि ये नियम वित्त वर्ष 2026-27 की कमाई और असेसमेंट ईयर 2027-28 के टैक्स रिटर्न पर लागू होंगे।

यह नया इनकम-टैक्स एक्ट 2025 को सपोर्ट करने के लिए लाया गया है। जिसमें टैक्स कैलकुलेशन की प्रोसेस को और सरल बनाया गया है।

2. रिटायरमेंट फंड में ₹7.5 लाख से ज्यादा योगदान पर टैक्स

अगर आपकी कंपनी आपके PF, NPS और सुपरएन्युएशन फंड में सालभर में ₹7.5 लाख से ज्यादा जमा करती है, तो अब उस पर टैक्स लगेगा।

ड्राफ्ट रूल्स में एक खास फॉर्मूला दिया गया है, जिससे ₹7.5 लाख की सीमा से ऊपर वाले कॉन्ट्रीब्यूशन और उस पर मिलने वाले रिटर्न (ब्याज/लाभांश) को ‘टैक्सेबल पर्र्क्स’ माना जाएगा।

3. कंपनी के एकोमोडेशन की वैल्यू फिक्स होगी

प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों को मिलने वाले एकोमोडेशन यानी घर की टैक्स वैल्यू अब शहर की आबादी के आधार पर तय होगी…

  • 40 लाख से ज्यादा आबादी: सैलरी का 10% हिस्सा टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा।
  • 15 से 40 लाख की आबादी: सैलरी का 7.5% हिस्सा टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा।
  • अन्य शहर: सैलरी का 5% हिस्सा। यदि कर्मचारी खुद कुछ किराया चुका रहा है, तो उसे इस वैल्यू में से घटा दिया जाएगा।

4. लीज पर लिए घर के लिए अलग नियम

अगर कंपनी खुद घर किराए पर लेकर कर्मचारी को देती है, तो नियम अलग होगा। इस मामले में कंपनी द्वारा चुकाया गया वास्तविक किराया या कर्मचारी की सैलरी का 10%, इनमें से जो भी कम हो उसे टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा। यह नियम मेट्रो शहरों के लीज रेंटल पर लागू होगा।

5. ऑफिस की कार का इस्तेमाल अब महंगा पड़ेगा

ऑफिस की गाड़ी पर्सनल और आधिकारिक दोनों कामों के लिए इस्तेमाल करने पर फिक्स मंथली टैक्स वैल्यू तय की गई है…

  • 1.6 लीटर इंजन तक: ₹5,000 प्रति महीना।
  • 1.6 लीटर से बड़े इंजन: ₹7,000 प्रति महीना।
  • ड्राइवर की सुविधा: ₹3,000 प्रति महीना अतिरिक्त।

इन फिक्स वैल्यू को सैलरी इनकम के साथ जोड़कर टैक्स निकाला जाएगा।

6. त्यौहार पर गिफ्ट्स की लिमिट ₹15,000 की

कंपनियों से मिलने वाले गिफ्ट, वाउचर या टोकन अब सालभर में कुल ₹15,000 तक ही टैक्स-फ्री होंगे। अगर पूरे साल में गिफ्ट्स की वैल्यू ₹15,000 से ज्यादा हुई, तो पूरी राशि पर टैक्स देना होगा। अब तक यह सीमा काफी कम थी।

7. ऑफिस में ₹200 तक का खाना टैक्स-फ्री

वर्किंग ऑवर्स के दौरान मिलने वाले खाने या नॉन-अल्कोहलिक बेवरेज पर टैक्स नहीं लगेगा, बशर्ते उसकी वैल्यू ₹200 प्रति मील से ज्यादा न हो। इसमें ऑफिस कैंटीन, मील कूपन और कॉर्पोरेट मील प्रोग्राम शामिल हैं।

8. एम्प्लॉयर से लिए गए लोन पर टैक्स

अगर कंपनी बिना ब्याज या कम ब्याज पर लोन देती है, तो उस फायदे पर टैक्स लगेगा। टैक्स का कैलकुलेशन SBI की ब्याज दर के आधार पर होगी। ₹2 लाख तक के लोन या गंभीर बीमारी के इलाज के लिए लिए गए लोन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

9. टैक्स-फ्री इनकम से जुड़े खर्चों पर नियम

अगर आप ऐसी कमाई करते हैं जिस पर टैक्स नहीं लगता, तो उससे जुड़े खर्चों को क्लेम करने का नया फॉर्मूला आया है। निवेश की एवरेज सालाना वैल्यू का 1% हिस्सा खर्च के रूप में माना जाएगा, लेकिन यह राशि आपके द्वारा क्लेम किए गए कुल खर्च से ज्यादा नहीं हो सकती।

10. विदेशी डिजिटल बिजनेस पर ₹2 करोड़ की लिमिट

डिजिटल बिजनेस करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए ‘सिग्निफिकेंट इकोनॉमिक प्रेजेंस’ की सीमा तय की गई है। अगर किसी कंपनी का भारत में रेवेन्यू ₹2 करोड़ से ज्यादा है या उसके 3 लाख से ज्यादा भारतीय यूजर्स हैं, तो उसे भारत में टैक्स देना होगा।

क्या होता है ‘पर्र्क्स’?

सैलरी के अलावा कंपनी से मिलने वाली सुविधाओं को पर्र्क्स कहते हैं। जैसे फ्री कार, घर, क्लब मेंबरशिप या नौकर। इनकम टैक्स विभाग इन्हें भी आपकी ‘कमाई’ मानता है और इनकी एक वैल्यू निकालकर उस पर टैक्स वसूलता है।

फॉर्म 16 और सैलरी स्लिप पर असर

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन बदलावों का सीधा असर आपकी ‘टेक होम’ सैलरी पर पड़ सकता है। कंपनियों को अपनी सैलरी स्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर अपडेट करने होंगे ताकि फॉर्म 16 और सैलरी स्लिप में नई वैल्यू दिख सके।

क्या करें टैक्सपेयर्स?

नए नियम लागू होने से पहले अपने एम्प्लॉयर के साथ सैलरी कंपोनेंट्स (जैसे कार, घर और रिटायरमेंट फंड) को रिव्यू करें ताकि टैक्स लायबिलिटी को मैनेज किया जा सके।

ये खबर भी पढ़ें…

नए इनकम टैक्स नियमों का ड्राफ्ट जारी: नियमों की संख्या 511 से घटकर 333 हुई; 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया सिस्टम

इनकम टैक्स विभाग ने शनिवार को ‘इनकम टैक्स रूल्स, 2026’ का नया ड्राफ्ट जारी कर दिया है। ये नए नियम अगले फाइनेंशियल ईयर यानी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। सरकार का मकसद टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को सरल बनाना और आम टैक्स पेयर्स के लिए नियमों को आसान बनाना है।

नए प्रस्तावित ड्राफ्ट में नियमों और फॉर्म की संख्या में भी कटौती की गई है। अभी तक लागू ‘इनकम टैक्स रूल्स, 1962’ में कुल 511 नियम और 399 फॉर्म थे। नए ड्राफ्ट में इन्हें घटाकर अब सिर्फ 333 नियम और 190 फॉर्म कर दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…

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केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से देश में नया इनकम टैक्स सिस्टम लागू करने जा रही है। यह नया कानून मौजूदा इंकम-टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। इनकम-टैक्स रूल्स 2026 के ड्राफ्ट के मुताबिक, मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों और बड़े बिजनेस घरानों के लिए टैक्स कैलकुलेशन के तरीके पूरी तरह बदल जाएंगे।

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यह नया इनकम-टैक्स एक्ट 2025 को सपोर्ट करने के लिए लाया गया है। जिसमें टैक्स कैलकुलेशन की प्रोसेस को और सरल बनाया गया है।

2. रिटायरमेंट फंड में ₹7.5 लाख से ज्यादा योगदान पर टैक्स

अगर आपकी कंपनी आपके PF, NPS और सुपरएन्युएशन फंड में सालभर में ₹7.5 लाख से ज्यादा जमा करती है, तो अब उस पर टैक्स लगेगा।

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3. कंपनी के एकोमोडेशन की वैल्यू फिक्स होगी

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  • 40 लाख से ज्यादा आबादी: सैलरी का 10% हिस्सा टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा।
  • 15 से 40 लाख की आबादी: सैलरी का 7.5% हिस्सा टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा।
  • अन्य शहर: सैलरी का 5% हिस्सा। यदि कर्मचारी खुद कुछ किराया चुका रहा है, तो उसे इस वैल्यू में से घटा दिया जाएगा।

4. लीज पर लिए घर के लिए अलग नियम

अगर कंपनी खुद घर किराए पर लेकर कर्मचारी को देती है, तो नियम अलग होगा। इस मामले में कंपनी द्वारा चुकाया गया वास्तविक किराया या कर्मचारी की सैलरी का 10%, इनमें से जो भी कम हो उसे टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा। यह नियम मेट्रो शहरों के लीज रेंटल पर लागू होगा।

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ऑफिस की गाड़ी पर्सनल और आधिकारिक दोनों कामों के लिए इस्तेमाल करने पर फिक्स मंथली टैक्स वैल्यू तय की गई है…

  • 1.6 लीटर इंजन तक: ₹5,000 प्रति महीना।
  • 1.6 लीटर से बड़े इंजन: ₹7,000 प्रति महीना।
  • ड्राइवर की सुविधा: ₹3,000 प्रति महीना अतिरिक्त।

इन फिक्स वैल्यू को सैलरी इनकम के साथ जोड़कर टैक्स निकाला जाएगा।

6. त्यौहार पर गिफ्ट्स की लिमिट ₹15,000 की

कंपनियों से मिलने वाले गिफ्ट, वाउचर या टोकन अब सालभर में कुल ₹15,000 तक ही टैक्स-फ्री होंगे। अगर पूरे साल में गिफ्ट्स की वैल्यू ₹15,000 से ज्यादा हुई, तो पूरी राशि पर टैक्स देना होगा। अब तक यह सीमा काफी कम थी।

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8. एम्प्लॉयर से लिए गए लोन पर टैक्स

अगर कंपनी बिना ब्याज या कम ब्याज पर लोन देती है, तो उस फायदे पर टैक्स लगेगा। टैक्स का कैलकुलेशन SBI की ब्याज दर के आधार पर होगी। ₹2 लाख तक के लोन या गंभीर बीमारी के इलाज के लिए लिए गए लोन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।

9. टैक्स-फ्री इनकम से जुड़े खर्चों पर नियम

अगर आप ऐसी कमाई करते हैं जिस पर टैक्स नहीं लगता, तो उससे जुड़े खर्चों को क्लेम करने का नया फॉर्मूला आया है। निवेश की एवरेज सालाना वैल्यू का 1% हिस्सा खर्च के रूप में माना जाएगा, लेकिन यह राशि आपके द्वारा क्लेम किए गए कुल खर्च से ज्यादा नहीं हो सकती।

10. विदेशी डिजिटल बिजनेस पर ₹2 करोड़ की लिमिट

डिजिटल बिजनेस करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए ‘सिग्निफिकेंट इकोनॉमिक प्रेजेंस’ की सीमा तय की गई है। अगर किसी कंपनी का भारत में रेवेन्यू ₹2 करोड़ से ज्यादा है या उसके 3 लाख से ज्यादा भारतीय यूजर्स हैं, तो उसे भारत में टैक्स देना होगा।

क्या होता है ‘पर्र्क्स’?

सैलरी के अलावा कंपनी से मिलने वाली सुविधाओं को पर्र्क्स कहते हैं। जैसे फ्री कार, घर, क्लब मेंबरशिप या नौकर। इनकम टैक्स विभाग इन्हें भी आपकी ‘कमाई’ मानता है और इनकी एक वैल्यू निकालकर उस पर टैक्स वसूलता है।

फॉर्म 16 और सैलरी स्लिप पर असर

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन बदलावों का सीधा असर आपकी ‘टेक होम’ सैलरी पर पड़ सकता है। कंपनियों को अपनी सैलरी स्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर अपडेट करने होंगे ताकि फॉर्म 16 और सैलरी स्लिप में नई वैल्यू दिख सके।

क्या करें टैक्सपेयर्स?

नए नियम लागू होने से पहले अपने एम्प्लॉयर के साथ सैलरी कंपोनेंट्स (जैसे कार, घर और रिटायरमेंट फंड) को रिव्यू करें ताकि टैक्स लायबिलिटी को मैनेज किया जा सके।

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नए प्रस्तावित ड्राफ्ट में नियमों और फॉर्म की संख्या में भी कटौती की गई है। अभी तक लागू ‘इनकम टैक्स रूल्स, 1962’ में कुल 511 नियम और 399 फॉर्म थे। नए ड्राफ्ट में इन्हें घटाकर अब सिर्फ 333 नियम और 190 फॉर्म कर दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…

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