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अमेरिका में बच्चों के लिए ‘द बैलेंस प्रोजेक्ट’:फोन-फ्री बचपन; असली दुनिया को इतना दिलचस्प बनाइए कि बच्चे स्क्रीन भूल जाएं

अमेरिका में बच्चों के लिए ‘द बैलेंस प्रोजेक्ट’:फोन-फ्री बचपन; असली दुनिया को इतना दिलचस्प बनाइए कि बच्चे स्क्रीन भूल जाएं

अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के लिटिल सिल्वर शहर में 7 साल की मौली रोज साइकिल से अकेले स्कूल जाती है। कुछ समय पहले तक यह सामान्य बात थी, लेकिन आज के स्क्रीन-डोमिनेटेड दौर में यह आंदोलन बन चुका है। मौली और उसके दोस्त ‘द बैलेंस प्रोजेक्ट’ नाम की पहल का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य बच्चों को मोबाइल से दूर कर स्वतंत्र बचपन लौटाना है। यह पहल अभिभावकों द्वारा शुरू की गई है। उन्होंने शहर में सुरक्षित साइकिल रूट मैप बनाए, बच्चों के लिए ‘बाइक-बडी’ समूह बनाए और स्कूलों में फोन-फ्री माहौल की मांग की। रेस्टोरेंट में बच्चों को मोबाइल देने के बजाय बैलेंस बॉक्स दिए जाते हैं…, जिनमें रंग, खिलौने और छोटे गेम होते हैं। पहल का लक्ष्य असली दुनिया को इतना रोचक बनाना है कि बच्चे खुद स्क्रीन छोड़ दें। विशेष साइकिल रूट मैप, बाइक-बडी जैसे समूह बने इसके तहत पार्क, प्ले-स्पेस और थर्ड स्पेस यानी घर और स्कूल से अलग मिलने-जुलने की जगहें विकसित की जा रही हैं। सर्वे बताते हैं कि ज्यादातर बच्चे ऑनलाइन रहने के बजाय दोस्तों के साथ बाहर खेलना पसंद करते हैं, लेकिन अवसर नहीं मिलते।

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अमेरिका में बच्चों के लिए ‘द बैलेंस प्रोजेक्ट’:फोन-फ्री बचपन; असली दुनिया को इतना दिलचस्प बनाइए कि बच्चे स्क्रीन भूल जाएं

अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के लिटिल सिल्वर शहर में 7 साल की मौली रोज साइकिल से अकेले स्कूल जाती है। कुछ समय पहले तक यह सामान्य बात थी, लेकिन आज के स्क्रीन-डोमिनेटेड दौर में यह आंदोलन बन चुका है। मौली और उसके दोस्त ‘द बैलेंस प्रोजेक्ट’ नाम की पहल का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य बच्चों को मोबाइल से दूर कर स्वतंत्र बचपन लौटाना है। यह पहल अभिभावकों द्वारा शुरू की गई है। उन्होंने शहर में सुरक्षित साइकिल रूट मैप बनाए, बच्चों के लिए ‘बाइक-बडी’ समूह बनाए और स्कूलों में फोन-फ्री माहौल की मांग की। रेस्टोरेंट में बच्चों को मोबाइल देने के बजाय बैलेंस बॉक्स दिए जाते हैं…, जिनमें रंग, खिलौने और छोटे गेम होते हैं। पहल का लक्ष्य असली दुनिया को इतना रोचक बनाना है कि बच्चे खुद स्क्रीन छोड़ दें। विशेष साइकिल रूट मैप, बाइक-बडी जैसे समूह बने इसके तहत पार्क, प्ले-स्पेस और थर्ड स्पेस यानी घर और स्कूल से अलग मिलने-जुलने की जगहें विकसित की जा रही हैं। सर्वे बताते हैं कि ज्यादातर बच्चे ऑनलाइन रहने के बजाय दोस्तों के साथ बाहर खेलना पसंद करते हैं, लेकिन अवसर नहीं मिलते।

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