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275 Ex-Judges & Officers Criticize USCIRF Report, Demand US Govt Probe

275 Ex-Judges & Officers Criticize USCIRF Report, Demand US Govt Probe

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता की संस्था USCIRF की मार्च में जारी हुई रिपोर्ट में RSS पर बैन लगाने की बात कही गई है। भारत के 275 पूर्व जजों, अधिकारियों और सैन्य लोगों ने इसका विरोध किया और कहा कि रिपोर्ट गलत और पक्षपाती है।

शनिवार को जारी बयान में इन पूर्व अधिकारियों ने कहा कि यह रिपोर्ट किसी मकसद से बनाई गई है और इसमें ठीक से सोच-समझकर बात नहीं की गई। उनका कहना है कि बिना पक्के सबूतों के भारतीय संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है।

बयान में कहा गया कि RSS जैसे संगठन पर बैन लगाना, उसकी संपत्ति जब्त करना और लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना बिल्कुल गलत और बेकार सुझाव हैं।

पूर्व अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से कहा कि जो लोग यह रिपोर्ट बना रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ भारत-विरोधी लोग ऐसी रिपोर्ट के जरिए दोनों देशों के बीच भरोसा खराब करना चाहते हैं।

USCIRF पर संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाने का आरोप

पूर्व जजों और अधिकारियों ने बयान में यह भी कहा कि USCIRF बार-बार भारतीय संस्थाओं को बिना पूरी जानकारी के गलत तरीके से दिखाता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर शक होता है।

पूर्व अधिकारियों ने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है, जहां अदालतें और दूसरी संस्थाएं सही तरीके से काम करती हैं। इसलिए धार्मिक आजादी के मामलों को अनदेखा होने की संभावना बहुत कम है।

बयान देने वालों में 25 रिटायर्ड जज शामिल

इस संयुक्त बयान पर कुल 275 लोगों ने साइन किए हैं। इनमें 25 रिटायर्ड जज, 119 पूर्व सरकारी अधिकारी (जिनमें 10 राजदूत भी हैं) और 131 पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हैं।

इस बयान पर साइन करने वाले प्रमुख लोगों में आदर्श कुमार गोयल, हेमंत गुप्ता, ओपी रावत, सुनील अरोड़ा और कंवल सिब्बल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस पूरे बयान को तैयार करने और जोड़ने का काम भास्वती मुखर्जी और एम. मदन गोपाल ने किया।

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अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता की संस्था USCIRF की मार्च में जारी हुई रिपोर्ट में RSS पर बैन लगाने की बात कही गई है। भारत के 275 पूर्व जजों, अधिकारियों और सैन्य लोगों ने इसका विरोध किया और कहा कि रिपोर्ट गलत और पक्षपाती है।

शनिवार को जारी बयान में इन पूर्व अधिकारियों ने कहा कि यह रिपोर्ट किसी मकसद से बनाई गई है और इसमें ठीक से सोच-समझकर बात नहीं की गई। उनका कहना है कि बिना पक्के सबूतों के भारतीय संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है।

बयान में कहा गया कि RSS जैसे संगठन पर बैन लगाना, उसकी संपत्ति जब्त करना और लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना बिल्कुल गलत और बेकार सुझाव हैं।

पूर्व अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से कहा कि जो लोग यह रिपोर्ट बना रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ भारत-विरोधी लोग ऐसी रिपोर्ट के जरिए दोनों देशों के बीच भरोसा खराब करना चाहते हैं।

USCIRF पर संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाने का आरोप

पूर्व जजों और अधिकारियों ने बयान में यह भी कहा कि USCIRF बार-बार भारतीय संस्थाओं को बिना पूरी जानकारी के गलत तरीके से दिखाता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर शक होता है।

पूर्व अधिकारियों ने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है, जहां अदालतें और दूसरी संस्थाएं सही तरीके से काम करती हैं। इसलिए धार्मिक आजादी के मामलों को अनदेखा होने की संभावना बहुत कम है।

बयान देने वालों में 25 रिटायर्ड जज शामिल

इस संयुक्त बयान पर कुल 275 लोगों ने साइन किए हैं। इनमें 25 रिटायर्ड जज, 119 पूर्व सरकारी अधिकारी (जिनमें 10 राजदूत भी हैं) और 131 पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हैं।

इस बयान पर साइन करने वाले प्रमुख लोगों में आदर्श कुमार गोयल, हेमंत गुप्ता, ओपी रावत, सुनील अरोड़ा और कंवल सिब्बल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस पूरे बयान को तैयार करने और जोड़ने का काम भास्वती मुखर्जी और एम. मदन गोपाल ने किया।

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