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मछुआ नीति में बदलाव को रोकने छतरपुर में ज्ञापन सौंपा:मछुआरों की आजीविका पर असर, सरकार को चेतावनी- नीलामी की तैयारी से विरोध करेंगे

मछुआ नीति में बदलाव को रोकने छतरपुर में ज्ञापन सौंपा:मछुआरों की आजीविका पर असर, सरकार को चेतावनी- नीलामी की तैयारी से विरोध करेंगे

प्रदेश में मछुआ नीति 2008 में बदलाव की संभावनाओं के बीच मांझी (निषाद) समाज में आक्रोश बढ़ रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को छतरपुर जिले में समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें नीति में किसी भी प्रकार का परिवर्तन न करने की मांग की गई है। समाज के प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वंशानुगत मछुआरों के हितों की रक्षा के लिए यह मछुआ नीति लागू की थी। इस नीति के तहत, तालाबों का संचालन पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों द्वारा किया जाता है, जिससे पारंपरिक रूप से मछली पकड़ने वाले परिवारों को आजीविका मिलती है। हालांकि, अब सरकार इस व्यवस्था में बदलाव करने और तालाबों की खुली नीलामी कराने की तैयारी कर रही है। वंशानुगत अधिकार छिनने का डर
समाज का आरोप है कि इस बदलाव से वंशानुगत मछुआरों का अधिकार छिन जाएगा और बाहरी ठेकेदारों का प्रभाव बढ़ेगा। इससे उनकी आजीविका पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसी बीच, पूरे प्रदेश में निषाद समाज गुहराज निषाद की जयंती मना रहा है। इस अवसर पर समाज के लोगों ने अपनी परंपरा और भगवान श्रीराम से जुड़े इतिहास का हवाला देते हुए सरकार से अपनी आजीविका के अधिकारों को सुरक्षित रखने की मांग दोहराई है। छतरपुर में सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मछुआ नीति 2008 में कोई बदलाव न किया जाए। ऐसा न होने पर प्रदेशभर में आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है।

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मछुआ नीति में बदलाव को रोकने छतरपुर में ज्ञापन सौंपा:मछुआरों की आजीविका पर असर, सरकार को चेतावनी- नीलामी की तैयारी से विरोध करेंगे

मछुआ नीति में बदलाव को रोकने छतरपुर में ज्ञापन सौंपा:मछुआरों की आजीविका पर असर, सरकार को चेतावनी- नीलामी की तैयारी से विरोध करेंगे

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