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Iran War Halts Raw Material Supply; Ammonia, Silicon Oil Shortage After Oil & Gas

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नई दिल्ली6 घंटे पहले

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देश में कंडोम की कीमत 50% तक बढ़ सकती है, क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच चल रही जंग के कारण सप्लाई चेन टूट गई है। इससे तेल और गैस के बाद अब कंडोम बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की किल्लत हो गई है।

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, कंडोम बनाने वाली दिग्गज कंपनियों जैसे HLL लाइफकेयर, मैनकाइंड फार्मा और क्यूपिड लिमिटेड को अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट में इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने दावा किया कि इनपुट कॉस्ट बढ़ने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और कीमतें 40 से 50% तक बढ़ सकती हैं।

अमोनिया के लिए 86% आयात पर निर्भर है भारत

भारत का कंडोम बाजार करीब 1.7 बिलियन डॉलर (लगभग 14 हजार करोड़ रुपए) का है। कंडोम निर्माण में जरूरी ‘एनहाइड्रस अमोनिया’ के लिए भारत 86% आयात पर निर्भर है, जो मुख्य रूप से सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे खाड़ी देशों से आता है।

हॉर्मुज रूट में युद्ध से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई ठप हो गई है। अमोनिया का इस्तेमाल लेटेक्स (रबड़) को जमने से बचाने और उसे सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। इसके बिना कंडोम बनाने वाली मशीनों में कच्चे माल का इस्तेमाल नहीं हो सकता।

सिलिकॉन ऑयल और पैकेजिंग मटेरियल भी महंगे

कंडोम निर्माण में लुब्रिकेंट के रूप में इस्तेमाल होने वाले सिलिकॉन ऑयल की कीमतें बढ़ी हैं। यह मुख्य रूप से चीन से आता है, लेकिन इसकी सप्लाई चेन रिफाइनरी प्रोसेस और ग्लोबल लॉजिस्टिक्स से जुड़ी है।

मिंट के अनुसार, एक प्रमुख कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ने बताया कि कच्चे माल के साथ PVC फॉयल, एल्युमीनियम फॉयल और अन्य रसायनों की कीमतें भी अस्थिर हैं। ग्लोबल सप्लायर्स से माल न मिल पाने के कारण प्रोडक्शन और ऑर्डर्स को पूरा करने में देरी हो रही है।

गरीब तबके और फैमिली प्लानिंग मिशन पर असर पड़ेगा

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पूर्व अध्यक्ष राजीव जयदेवन के मुताबिक, कंडोम की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को प्रभावित करती है। अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल कम हो सकता है।

इसका सीधा असर अनचाहे गर्भ, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर पर पड़ेगा। साथ ही, यौन संचारित रोगों (STIs) के मामले भी बढ़ सकते हैं। भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक आधुनिक गर्भनिरोधक तरीकों की मांग को 75% तक पूरा करना है, लेकिन इस किल्लत से नेशनल फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम के लक्ष्यों को झटका लग सकता है।

रॉ-मटेरियल का स्टॉक कर रहीं कंपनियां

इस संकट को लेकर जब मैनफोर्स बनाने वाली कंपनी मैनकाइंड फार्मा, ड्यूरेक्स बनाने वाली रेकिट बेंकिजर और कामसूत्र ब्रांड की मालिक गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स से संपर्क किया गया, तो उन्होंने फिलहाल कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

हालांकि, इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि युद्ध लंबा खिंचने के डर से कई बड़े सप्लायर्स और मैन्युफैक्चरर्स ने कच्चे माल का स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है। इस ‘होल्डिंग’ की वजह से बाजार में इनपुट कॉस्ट और ज्यादा बढ़ गई है। आने वाले दिनों में अगर सरकार ने दखल नहीं दिया, तो बाजार से कंडोम के कुछ ब्रांड्स गायब भी हो सकते हैं।

दिल्ली में ड्राई फ्रूट्स 50% और पैरासिटामोल 47% महंगी

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी की वजह से दिल्ली के बाजारों में डाई फ्रूट्स 50% तक महंगे हो गए हैं। पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत भी 47% तक बढ़ गई है। वहीं, अमेजन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर रेडी-टू-ईट मील और पैक्ड फूड की डिमांड में 15% से ज्यादा बढ़ गई है।

ड्राई फ्रूट्स महंगे: बादाम, पिस्ता और खजूर की सप्लाई रुकी

एशिया की सबसे बड़ी थोक मंडी खारी बावली में ड्राई फ्रूट्स और जड़ी-बूटियों की कीमतों में 20% से 50% तक का उछाल आया है। व्यापारियों का कहना है कि काजू को छोड़कर ज्यादातर ड्राई फ्रूट्स मिडल-ईस्ट से आते हैं, जिनकी सप्लाई अभी ठप है।

कीमतों का गणित: ईरान से आने वाले पिस्ता, आलूबुखारा, अंजीर और ममरा बादाम के दाम 30-40% बढ़ गए हैं।

त्योहारों पर असर: बाजार में खजूर की मांग बढ़ गई है, लेकिन स्टॉक सीमित होने से कीमतें बढ़ रही हैं।

दवाइयां भी महंगी: खारी बावली के व्यापारियों के मुताबिक, दवाओं में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियों की सप्लाई भी रुक गई है। वहीं, पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत 47% तक बढ़ गई है।

बदला ट्रेंड: रेडी-टू-ईट और पैकेट बंद खाने की डिमांड 15% बढ़ी

घरों में कुकिंग गैस की कमी के चलते लोग अब ऐसा खाना पसंद कर रहे हैं, जिसे पकाने में कम समय लगे या जो तुरंत खाया जा सके। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन इंडिया पर इंस्टेंट नूडल्स, पैकेट बंद मील और स्नैक्स जैसे रेडी-टू-ईट या अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की डिमांड 15% से ज्यादा हो गई है।

छोटे शहरों में भी मांग: यह ट्रेंड सिर्फ दिल्ली-मुंबई जैसे मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सोनीपत और पणजी जैसे टियर-2 शहरों में भी लोग रेडी-टू-ईट फूड ऑर्डर कर रहे हैं।

क्विक कॉमर्स: अमेजन नाउ (Amazon Now) जैसे प्लेटफॉर्म पर रेडी-टू-ईट फूड की सेल मंथ-ऑन-मंथ 20% बढ़ी है।

स्ट्रीट फूड वेंडर्स पर खतरा: दिल्ली के करीब 50,000 स्ट्रीट फूड वेंडर्स में से 20-30% वेंडर्स गैस की कमी और बढ़ती लागत के कारण बंद होने की कगार पर हैं।

क्यों बने ऐसे हालात?

ईरान पर अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी 2026 को हमला कर दिया था। दोनों देशों ने मिलकर ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों, परमाणु सुविधाओं और नेतृत्व पर सैकड़ों हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनी समेत कई उच्च अधिकारी मारे गए। अमेरिका ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया।

इस युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और आपूर्ति बाधित हुई। यहां से भारत का 80-85% LPG आयात होता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और 60% से ज्यादा LPG बाहर से आती है।

इसी के कारण भारत में LPG किल्लत जैसे हालत बने लेकिन भारत सरकार ने लगातार लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की। सरकार ने कहा कि देश में LPG और तेल की कोई कमी नहीं है।

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देश में कंडोम की कीमत 50% तक बढ़ सकती है, क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच चल रही जंग के कारण सप्लाई चेन टूट गई है। इससे तेल और गैस के बाद अब कंडोम बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की किल्लत हो गई है।

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, कंडोम बनाने वाली दिग्गज कंपनियों जैसे HLL लाइफकेयर, मैनकाइंड फार्मा और क्यूपिड लिमिटेड को अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट में इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने दावा किया कि इनपुट कॉस्ट बढ़ने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और कीमतें 40 से 50% तक बढ़ सकती हैं।

अमोनिया के लिए 86% आयात पर निर्भर है भारत

भारत का कंडोम बाजार करीब 1.7 बिलियन डॉलर (लगभग 14 हजार करोड़ रुपए) का है। कंडोम निर्माण में जरूरी ‘एनहाइड्रस अमोनिया’ के लिए भारत 86% आयात पर निर्भर है, जो मुख्य रूप से सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे खाड़ी देशों से आता है।

हॉर्मुज रूट में युद्ध से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई ठप हो गई है। अमोनिया का इस्तेमाल लेटेक्स (रबड़) को जमने से बचाने और उसे सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। इसके बिना कंडोम बनाने वाली मशीनों में कच्चे माल का इस्तेमाल नहीं हो सकता।

सिलिकॉन ऑयल और पैकेजिंग मटेरियल भी महंगे

कंडोम निर्माण में लुब्रिकेंट के रूप में इस्तेमाल होने वाले सिलिकॉन ऑयल की कीमतें बढ़ी हैं। यह मुख्य रूप से चीन से आता है, लेकिन इसकी सप्लाई चेन रिफाइनरी प्रोसेस और ग्लोबल लॉजिस्टिक्स से जुड़ी है।

मिंट के अनुसार, एक प्रमुख कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ने बताया कि कच्चे माल के साथ PVC फॉयल, एल्युमीनियम फॉयल और अन्य रसायनों की कीमतें भी अस्थिर हैं। ग्लोबल सप्लायर्स से माल न मिल पाने के कारण प्रोडक्शन और ऑर्डर्स को पूरा करने में देरी हो रही है।

गरीब तबके और फैमिली प्लानिंग मिशन पर असर पड़ेगा

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पूर्व अध्यक्ष राजीव जयदेवन के मुताबिक, कंडोम की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को प्रभावित करती है। अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल कम हो सकता है।

इसका सीधा असर अनचाहे गर्भ, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर पर पड़ेगा। साथ ही, यौन संचारित रोगों (STIs) के मामले भी बढ़ सकते हैं। भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक आधुनिक गर्भनिरोधक तरीकों की मांग को 75% तक पूरा करना है, लेकिन इस किल्लत से नेशनल फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम के लक्ष्यों को झटका लग सकता है।

रॉ-मटेरियल का स्टॉक कर रहीं कंपनियां

इस संकट को लेकर जब मैनफोर्स बनाने वाली कंपनी मैनकाइंड फार्मा, ड्यूरेक्स बनाने वाली रेकिट बेंकिजर और कामसूत्र ब्रांड की मालिक गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स से संपर्क किया गया, तो उन्होंने फिलहाल कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

हालांकि, इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि युद्ध लंबा खिंचने के डर से कई बड़े सप्लायर्स और मैन्युफैक्चरर्स ने कच्चे माल का स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है। इस ‘होल्डिंग’ की वजह से बाजार में इनपुट कॉस्ट और ज्यादा बढ़ गई है। आने वाले दिनों में अगर सरकार ने दखल नहीं दिया, तो बाजार से कंडोम के कुछ ब्रांड्स गायब भी हो सकते हैं।

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कीमतों का गणित: ईरान से आने वाले पिस्ता, आलूबुखारा, अंजीर और ममरा बादाम के दाम 30-40% बढ़ गए हैं।

त्योहारों पर असर: बाजार में खजूर की मांग बढ़ गई है, लेकिन स्टॉक सीमित होने से कीमतें बढ़ रही हैं।

दवाइयां भी महंगी: खारी बावली के व्यापारियों के मुताबिक, दवाओं में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियों की सप्लाई भी रुक गई है। वहीं, पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत 47% तक बढ़ गई है।

बदला ट्रेंड: रेडी-टू-ईट और पैकेट बंद खाने की डिमांड 15% बढ़ी

घरों में कुकिंग गैस की कमी के चलते लोग अब ऐसा खाना पसंद कर रहे हैं, जिसे पकाने में कम समय लगे या जो तुरंत खाया जा सके। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन इंडिया पर इंस्टेंट नूडल्स, पैकेट बंद मील और स्नैक्स जैसे रेडी-टू-ईट या अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की डिमांड 15% से ज्यादा हो गई है।

छोटे शहरों में भी मांग: यह ट्रेंड सिर्फ दिल्ली-मुंबई जैसे मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सोनीपत और पणजी जैसे टियर-2 शहरों में भी लोग रेडी-टू-ईट फूड ऑर्डर कर रहे हैं।

क्विक कॉमर्स: अमेजन नाउ (Amazon Now) जैसे प्लेटफॉर्म पर रेडी-टू-ईट फूड की सेल मंथ-ऑन-मंथ 20% बढ़ी है।

स्ट्रीट फूड वेंडर्स पर खतरा: दिल्ली के करीब 50,000 स्ट्रीट फूड वेंडर्स में से 20-30% वेंडर्स गैस की कमी और बढ़ती लागत के कारण बंद होने की कगार पर हैं।

क्यों बने ऐसे हालात?

ईरान पर अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी 2026 को हमला कर दिया था। दोनों देशों ने मिलकर ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों, परमाणु सुविधाओं और नेतृत्व पर सैकड़ों हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनी समेत कई उच्च अधिकारी मारे गए। अमेरिका ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया।

इस युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और आपूर्ति बाधित हुई। यहां से भारत का 80-85% LPG आयात होता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और 60% से ज्यादा LPG बाहर से आती है।

इसी के कारण भारत में LPG किल्लत जैसे हालत बने लेकिन भारत सरकार ने लगातार लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की। सरकार ने कहा कि देश में LPG और तेल की कोई कमी नहीं है।

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