Wednesday, 08 Jul 2026 | 07:27 AM

Trending :

बच्चे के जन्म के बाद पिता में भी आते हैं ये शारीरिक बदलाव, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

authorimg

Last Updated:

अक्सर यह माना जाता है कि बच्चे के जन्म के बाद सिर्फ मां ही शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरती है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं अलग है. हाल की रिसर्च बताती है कि पिता भी इस दौरान बड़े स्तर पर बदलाव महसूस करते हैं, जिनमें तनाव, थकान और यहां तक कि डिप्रेशन भी शामिल है. यानी नए बच्चे की जिम्मेदारी सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि पिता के मन और शरीर पर भी गहरा असर डालती है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

Zoom

9 से 12 महीने बाद बढ़ता है सबसे ज्यादा मानसिक दबाव.

घर में बच्चे का जन्म हर परिवार के लिए बेहद खास और खुशी भरा पल होता है. नवजात की किलकारी पूरे माहौल को बदल देती है और घर में नई ऊर्जा और उम्मीदें लेकर आती है. आमतौर पर इस दौरान मां की सेहत और उनके मानसिक बदलावों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, खासकर ‘पोस्टपार्टम ब्लूज’ को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है. लेकिन इसी खुशी के बीच एक और महत्वपूर्ण पहलू अक्सर नजरअंदाज हो जाता है, और वह है पिता का मानसिक स्वास्थ्य. एक पिता भी इस नए बदलाव से गुजर रहा होता है, लेकिन वह अपनी जिम्मेदारियों और भावनाओं को अक्सर खुद तक ही सीमित रखता है.

हाल ही में सामने आई एक स्टडी ने इसी छिपे पहलू को उजागर किया है. ‘JAMA Network Open’ में प्रकाशित इस रिसर्च के अनुसार, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद नहीं बल्कि लगभग एक साल के भीतर पिता के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है. इस दौरान डिप्रेशन और तनाव से जुड़ी समस्याओं का खतरा 30 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जाता है. यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि पिता भी मानसिक दबाव से गुजरते हैं, लेकिन उनके संघर्ष को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. यह स्टडी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समाज में पिता की भूमिका को एक नए नजरिए से देखने की जरूरत बताती है.

स्वीडन में हुआ बड़ा रिसर्च, लाखों लोगों का डेटा शामिल
यह अध्ययन स्वीडन में किया गया, जिसमें करीब 10 लाख से अधिक पुरुषों के डेटा का विश्लेषण किया गया. इतने बड़े स्तर पर किए गए इस शोध ने यह स्पष्ट किया कि बच्चे के जन्म के शुरुआती महीनों में पिता अपेक्षाकृत सामान्य और स्थिर नजर आते हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि उस समय उनका पूरा ध्यान मां और नवजात की देखभाल पर होता है. वे अपनी नींद, थकान और मानसिक दबाव को पीछे छोड़कर परिवार की जिम्मेदारियां निभाने में जुट जाते हैं. लेकिन धीरे-धीरे यही अनदेखा किया गया तनाव उनके अंदर जमा होने लगता है.

9 से 12 महीने बाद बढ़ता है सबसे ज्यादा मानसिक दबाव
समय बीतने के साथ जब जिम्मेदारियां और बढ़ती हैं, तो मानसिक दबाव भी बढ़ने लगता है. रिसर्च के मुताबिक, बच्चे के जन्म के 9 से 12 महीने के बीच का समय सबसे ज्यादा संवेदनशील होता है. इस दौरान पिता को लगातार नींद की कमी का सामना करना पड़ता है, काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है, आर्थिक जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और रिश्तों में भी बदलाव आने लगते हैं. इन सभी कारणों का संयुक्त असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जो आगे चलकर डिप्रेशन या स्ट्रेस डिसऑर्डर के रूप में सामने आ सकता है.

क्यों छिपी रह जाती है पिता की मानसिक परेशानी?
इस अध्ययन का एक अहम निष्कर्ष यह भी है कि पिता अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं करते. समाज में पुरुषों से मजबूत बने रहने की अपेक्षा और भावनाएं छिपाने की आदत के कारण वे अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बात करने से बचते हैं. कई बार वे खुद भी यह स्वीकार नहीं कर पाते कि उन्हें मदद की जरूरत है. यही वजह है कि उनकी परेशानी तब सामने आती है जब स्थिति काफी गंभीर हो चुकी होती है. इसलिए जरूरी है कि पिता के मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही अहमियत दी जाए जितनी मां के लिए दी जाती है, ताकि उन्हें समय रहते सही समर्थन और समझ मिल सके.

About the Author

authorimg

Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
G Khan Sonam Bajwa Banter at IPL Match

April 20, 2026/
7:14 am

सोनम बाजवा और जी खान मजाकिया अंदाज में बातचीत करते हुए। न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादविंदर सिंह स्टेडियम में रविवार...

French Open: Gauff Out, Potapova Wins

May 31, 2026/
12:25 pm

पेरिस34 मिनट पहले कॉपी लिंक फ्रेंच ओपन में शनिवार रात बड़ा उलटफेर हुआ। डिफेंडिंग चैंपियन कोको गॉफ तीसरे दौर में...

कैदी पर आया लेडी जेल अफसर का दिल:उम्रकैद की सजा पूरी होने के बाद हिंदू रीति-रिवाज से की शादी, विश्व हिंदू परिषद ने कराया कन्यादान

May 7, 2026/
8:17 am

सतना सेंट्रल जेल की सहायक अधीक्षक फिरोजा खातून ने हत्या के मामले में सजा काट चुके अभिलाष नाम के युवक...

इजराइली PM को प्रोस्टेट कैंसर हुआ, चुपचाप इलाज कराया:2 महीने तक जानकारी छिपाई; ट्यूमर खत्म करने रेडिएशन थेरेपी ली

April 24, 2026/
7:21 pm

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को बताया कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर हुआ था। उन्होंने रेडिएशन थेरेपी से इसका...

IPL क्रिकेटर शशांक, उनके IPS पिता पर भोपाल में FIR:अच्छा खाना नहीं बनाने पर कुक को पीटा-गालियां दीं, रोते हुए VIDEO किया जारी

June 29, 2026/
7:57 pm

मध्यप्रदेश के भोपाल में IPL टीम पंजाब किंग्स के बल्लेबाज शशांक सिंह और उनके पिता रिटायर्ड स्पेशल डीजी शैलेष सिंह...

श्रीलंका विमेंस ने बांग्लादेश से टी20 सीरीज जीती:दूसरे टी-20 में 21 रन से हराया; तीन मैच की सीरीज में 2-0 से आगे

April 30, 2026/
8:32 pm

श्रीलंका महिला टीम ने सिलहट में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में बांग्लादेश को 21 रन से हराकर 2-0 से...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

बच्चे के जन्म के बाद पिता में भी आते हैं ये शारीरिक बदलाव, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

authorimg

Last Updated:

अक्सर यह माना जाता है कि बच्चे के जन्म के बाद सिर्फ मां ही शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरती है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं अलग है. हाल की रिसर्च बताती है कि पिता भी इस दौरान बड़े स्तर पर बदलाव महसूस करते हैं, जिनमें तनाव, थकान और यहां तक कि डिप्रेशन भी शामिल है. यानी नए बच्चे की जिम्मेदारी सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि पिता के मन और शरीर पर भी गहरा असर डालती है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

Zoom

9 से 12 महीने बाद बढ़ता है सबसे ज्यादा मानसिक दबाव.

घर में बच्चे का जन्म हर परिवार के लिए बेहद खास और खुशी भरा पल होता है. नवजात की किलकारी पूरे माहौल को बदल देती है और घर में नई ऊर्जा और उम्मीदें लेकर आती है. आमतौर पर इस दौरान मां की सेहत और उनके मानसिक बदलावों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, खासकर ‘पोस्टपार्टम ब्लूज’ को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है. लेकिन इसी खुशी के बीच एक और महत्वपूर्ण पहलू अक्सर नजरअंदाज हो जाता है, और वह है पिता का मानसिक स्वास्थ्य. एक पिता भी इस नए बदलाव से गुजर रहा होता है, लेकिन वह अपनी जिम्मेदारियों और भावनाओं को अक्सर खुद तक ही सीमित रखता है.

हाल ही में सामने आई एक स्टडी ने इसी छिपे पहलू को उजागर किया है. ‘JAMA Network Open’ में प्रकाशित इस रिसर्च के अनुसार, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद नहीं बल्कि लगभग एक साल के भीतर पिता के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है. इस दौरान डिप्रेशन और तनाव से जुड़ी समस्याओं का खतरा 30 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जाता है. यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि पिता भी मानसिक दबाव से गुजरते हैं, लेकिन उनके संघर्ष को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. यह स्टडी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समाज में पिता की भूमिका को एक नए नजरिए से देखने की जरूरत बताती है.

स्वीडन में हुआ बड़ा रिसर्च, लाखों लोगों का डेटा शामिल
यह अध्ययन स्वीडन में किया गया, जिसमें करीब 10 लाख से अधिक पुरुषों के डेटा का विश्लेषण किया गया. इतने बड़े स्तर पर किए गए इस शोध ने यह स्पष्ट किया कि बच्चे के जन्म के शुरुआती महीनों में पिता अपेक्षाकृत सामान्य और स्थिर नजर आते हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि उस समय उनका पूरा ध्यान मां और नवजात की देखभाल पर होता है. वे अपनी नींद, थकान और मानसिक दबाव को पीछे छोड़कर परिवार की जिम्मेदारियां निभाने में जुट जाते हैं. लेकिन धीरे-धीरे यही अनदेखा किया गया तनाव उनके अंदर जमा होने लगता है.

9 से 12 महीने बाद बढ़ता है सबसे ज्यादा मानसिक दबाव
समय बीतने के साथ जब जिम्मेदारियां और बढ़ती हैं, तो मानसिक दबाव भी बढ़ने लगता है. रिसर्च के मुताबिक, बच्चे के जन्म के 9 से 12 महीने के बीच का समय सबसे ज्यादा संवेदनशील होता है. इस दौरान पिता को लगातार नींद की कमी का सामना करना पड़ता है, काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है, आर्थिक जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और रिश्तों में भी बदलाव आने लगते हैं. इन सभी कारणों का संयुक्त असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जो आगे चलकर डिप्रेशन या स्ट्रेस डिसऑर्डर के रूप में सामने आ सकता है.

क्यों छिपी रह जाती है पिता की मानसिक परेशानी?
इस अध्ययन का एक अहम निष्कर्ष यह भी है कि पिता अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं करते. समाज में पुरुषों से मजबूत बने रहने की अपेक्षा और भावनाएं छिपाने की आदत के कारण वे अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बात करने से बचते हैं. कई बार वे खुद भी यह स्वीकार नहीं कर पाते कि उन्हें मदद की जरूरत है. यही वजह है कि उनकी परेशानी तब सामने आती है जब स्थिति काफी गंभीर हो चुकी होती है. इसलिए जरूरी है कि पिता के मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही अहमियत दी जाए जितनी मां के लिए दी जाती है, ताकि उन्हें समय रहते सही समर्थन और समझ मिल सके.

About the Author

authorimg

Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.