Wednesday, 16 Sep 2026 | 09:12 PM

Trending :

EXCLUSIVE

घरों तक जंग की आंच, दूध-किराना-इलाज सब महंगे होंगे:रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ाने की तैयारी; कमर्शियल LPG की कमी से हजारों प्लास्टिक यूनिट बंद

घरों तक जंग की आंच, दूध-किराना-इलाज सब महंगे होंगे:रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ाने की तैयारी; कमर्शियल LPG की कमी से हजारों प्लास्टिक यूनिट बंद

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ रही है और कंपनियां दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इससे बोतलबंद पानी, नमक, तेल जैसी रोजमर्रा की चीजें, एसी, फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल से लेकर नॉन-सर्जिकल मेडिकल आइटम के दाम बढ़ सकते हैं। वजह यह है कि इस जंग ने प्लास्टिक उद्योग की रीढ़ तोड़ दी है। बीते 30 दिनों में कच्चे माल के दाम 50-70% तक बढ़ चुके हैं। सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाले प्लास्टिक दाने एलडीपीई के दाम 110 रु/ किलो से 180 रुपए तक पहुंच गए हैं। अन्य पॉलीमर और रॉ मटेरियल भी 30 हजार से 70 हजार रुपए प्रति टन तक वृद्धि हुई है। ऐसे में अप्रैल में प्लास्टिक कीमतें 50-60% तक बढ़ सकती हैं। प्लास्टिक टंकी व कंटेनर के दाम 30-40% तक बढ़ने की आशंका है। ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुनील शाह कहते हैं कि प्लास्टिक इंडस्ट्री से 5 लाख लोग जुड़े है। संकट बढ़ा तो दो-तीन लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं। हमारी मांग है कि स्थिति सामान्य होने तक प्लास्टिक प्रोडक्ट्स पर 18% जीएसटी को कम करके 5% तक लाया जाए। बैंक वर्किंग कैपिटल लिमिट 20% तक बढ़ा दें। इससे कैश फ्लो समस्या हल होगी। एलपीजी संकट से 20 हजार छोटे उद्योगों पर लगा ताला असर 50 हजार प्लास्टिक फैक्ट्रियों पर पड़ा है। कमर्शियल एलपीजी की कमी झेल रहे अधिकांश यूनिट्स ने उत्पादन बंद कर दिया या घटा दिया। करीब 20 हजार कारखाने बंद होने का अनुमान है। हैदराबाद के एक ईपीई निर्माता ने बताया, ‘हम गैस के बिना उत्पादन नहीं कर सकते। 80 रुपए/किलो तो छोड़िए 150 में भी नहीं मिल रही।’ गुजरात के राजकोट में 40 से ज्यादा प्लांट बंद हो चुके हैं। मध्यप्रदेश, रायपुर और हैदराबाद में भी कई प्लांट बंद हैं। प्लास्टिक पैकेजिंग निर्माता लंबे समय तक मार्जिन का दबाव नहीं झेल पा रहे। कई यूनिट्स ने पुराने ऑर्डर रद्द कर दिए हैं। बड़े शहरों में घरेलू कामगारों के लौटने से ‘रेडी टू ईट’ प्रोडक्ट्स की मांग में कई गुना उछाल

एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और प्रवासी घरेलू कामगारों के लौटने के कारण शहरी घरों में खाना पकाने का तरीका बदल रहा है। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर रेडी-टु-ईट खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ रही हैै। शहरी परिवार अब कम मेहनत वाले भोजन के विकल्पों की ओर झुक रहे हैं। बिगबॉस्केट के चीफ मर्चेंडाइजिंग ऑफिसर शेषु कुमार तिरुमाला ने बताया कि रेडी-टू-ईट कैटेगरी की बिक्री सामान्य स्तर से 10% अधिक है।बीते पांच दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री सामान्य से 10 गुना रही है। रेडी-टू-ईट उत्पाद बनाने वाली कंपनी फ्रेशकॉन इंडिया के सह-संस्थापक अनुपम बोके ने कहा, उपभोक्ता और खाद्य व्यवसाय अब कुशल कुकिंग सॉल्यूशंस की ओर बढ़ रहे हैं। जो प्रोडक्ट खाना पकाने के समय को 80% तक कम करते हैं और 60% गैस बचाते हैं, उनमें डिस्ट्रीब्यूटर्स और एक्सपोर्टर्स की भारी रुचि देखी जा रही है। वहीं, अमेजन इंडिया के प्रवक्ता के अनुसार, इंस्टेंट नूडल्स, जूस, नट्स और प्रोटीन-आधारित स्नैक्स की मांग में ‘उल्लेखनीय वृद्धि’ हुई है। इसके लिए एक समर्पित ‘रेडी टू ईट स्टोर’ भी बनाया है। सीमेंट के दाम बढ़ाए, फिर वापस ली वृद्धि इस संकट के चलते पेटकोक, कोयले और पैकेजिंग सामग्री की कीमतें एक झटके में बढ़ गई है। इससे सीमेंट इंडस्ट्री पर असर पड़ा है। चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट आशुतोष मुरारका के अनुसार, इस भू-राजनीतिक संकट से उत्पादन लागत में 150 से 200 प्रति टन की बढ़ोतरी हो सकती है, जो सीधे तौर पर कंपनियों के मुनाफे को चोट पहुंचाएगी। सीमेंट की बोरियों के लिए इस्तेमाल होने वाला पॉलीप्रोपाइलीन सीधे कच्चे तेल से जुड़ा है। इस नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियों को कीमतों में 4-5% की वृद्धि करनी होगी, लेकिन बाजार की मौजूदा स्थिति इसे स्वीकार करने के पक्ष में नहीं दिखती। चौथी तिमाही में कंपनियों ने प्रति बोरी 15-20 रुपए की बढ़ोतरी की, लेकिन अत्यधिक आपूर्ति के कारण बढ़ोतरी वापस लेनी पड़ी। हालांकि उत्तर में 10-15 रु/बोरी की बढ़ोतरी टिकी हुई है। एक्सपर्ट क्या कहते हैं… अभी के शुरुआती रुझान किसी आपातकालीन खरीदारी का संकेत नहीं देतीं। लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष के चौथे सप्ताह तक मांग में उल्लेखनीय अंतर दिख सकता है, क्योंकि रेस्त्रां परिचालन में दिक्कत आ रही है। शहर से कुछ प्रवासी गृहनगर लौट रहे हैं। सतीश मेहना, फाउंडर, डेटम इंटेलिजेंस कच्चे माल के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में कीमतें 7-10 प्रतिशत तक बढ़ेंगी। हम मई तक अपनी फैक्ट्रियां पूरी क्षमता से चलाने का इरादा रखते हैं, लेकिन चुनौती यह है कि इन बढ़ी हुई कीमतों का मांग पर क्या असर पड़ेगा। कमल नंदी, अप्लायंसेज बिजनेस हेड, गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Monalisa Alleges Molestation by Director Sanoj Mishra

March 25, 2026/
10:25 am

8 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रयागराज के कुंभ मेले से चर्चा में आईं मोनालिसा भोंसले ने मंगलवार को डायरेक्टर सनोज...

खरगोन में पारा 41°C, फिर भी स्कूल टाइम नहीं बदला:तेज धूप में घर लौटने को मजबूर छात्र, मांग के बाद भी फैसला नहीं

April 17, 2026/
7:06 pm

खरगोन जिले में भीषण गर्मी के बावजूद स्कूलों के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दोपहर में स्कूल...

परमवीर ने ‘मर्दानी3’ और ‘धुरंधर’ का ऑफर ठुकरा दिया था:बोले- सही वक्त नहीं था, सीरीज की स्टारकास्ट बोली- सपना टूटना मरने जैसा है

April 30, 2026/
5:30 am

सीरीज ‘सपने वर्सेस एवरीवन’ का दूसरा सीजन सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, टूटने और फिर खड़े होने की असली...

उत्तराखंड में 984 फीट खाई में गिरी पिकअप,8 की मौत:हरिद्वार से अंतिम संस्कार करके लौट रहे थे, SDRF ने 2 लोगों का रेस्क्यू किया

April 23, 2026/
4:10 pm

टिहरी गढ़वाल में 10 लोगों से भरी पिकअप खाई में गिरी गई, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई है,...

UP SIR Voter List Update; Election Commission

April 10, 2026/
11:51 am

यूपी में चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की फाइनल लिस्ट शुक्रवार को जारी कर दी। यूपी में वोटर्स...

देवास में शीतला सप्तमी पर मंदिरों में भीड़:महिलाओं ने एक दिन पहले बनाकर रखा भोजन, बासी प्रसाद के रूप में करेंगे ग्रहण

March 10, 2026/
1:07 pm

देवास शीतला सप्तमी के अवसर पर मंगलवार को शहर के शीतला माता मंदिरों में महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं...

राजनीति

घरों तक जंग की आंच, दूध-किराना-इलाज सब महंगे होंगे:रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ाने की तैयारी; कमर्शियल LPG की कमी से हजारों प्लास्टिक यूनिट बंद

घरों तक जंग की आंच, दूध-किराना-इलाज सब महंगे होंगे:रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ाने की तैयारी; कमर्शियल LPG की कमी से हजारों प्लास्टिक यूनिट बंद

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कंपनियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ रही है और कंपनियां दाम बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इससे बोतलबंद पानी, नमक, तेल जैसी रोजमर्रा की चीजें, एसी, फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल से लेकर नॉन-सर्जिकल मेडिकल आइटम के दाम बढ़ सकते हैं। वजह यह है कि इस जंग ने प्लास्टिक उद्योग की रीढ़ तोड़ दी है। बीते 30 दिनों में कच्चे माल के दाम 50-70% तक बढ़ चुके हैं। सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाले प्लास्टिक दाने एलडीपीई के दाम 110 रु/ किलो से 180 रुपए तक पहुंच गए हैं। अन्य पॉलीमर और रॉ मटेरियल भी 30 हजार से 70 हजार रुपए प्रति टन तक वृद्धि हुई है। ऐसे में अप्रैल में प्लास्टिक कीमतें 50-60% तक बढ़ सकती हैं। प्लास्टिक टंकी व कंटेनर के दाम 30-40% तक बढ़ने की आशंका है। ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुनील शाह कहते हैं कि प्लास्टिक इंडस्ट्री से 5 लाख लोग जुड़े है। संकट बढ़ा तो दो-तीन लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं। हमारी मांग है कि स्थिति सामान्य होने तक प्लास्टिक प्रोडक्ट्स पर 18% जीएसटी को कम करके 5% तक लाया जाए। बैंक वर्किंग कैपिटल लिमिट 20% तक बढ़ा दें। इससे कैश फ्लो समस्या हल होगी। एलपीजी संकट से 20 हजार छोटे उद्योगों पर लगा ताला असर 50 हजार प्लास्टिक फैक्ट्रियों पर पड़ा है। कमर्शियल एलपीजी की कमी झेल रहे अधिकांश यूनिट्स ने उत्पादन बंद कर दिया या घटा दिया। करीब 20 हजार कारखाने बंद होने का अनुमान है। हैदराबाद के एक ईपीई निर्माता ने बताया, ‘हम गैस के बिना उत्पादन नहीं कर सकते। 80 रुपए/किलो तो छोड़िए 150 में भी नहीं मिल रही।’ गुजरात के राजकोट में 40 से ज्यादा प्लांट बंद हो चुके हैं। मध्यप्रदेश, रायपुर और हैदराबाद में भी कई प्लांट बंद हैं। प्लास्टिक पैकेजिंग निर्माता लंबे समय तक मार्जिन का दबाव नहीं झेल पा रहे। कई यूनिट्स ने पुराने ऑर्डर रद्द कर दिए हैं। बड़े शहरों में घरेलू कामगारों के लौटने से ‘रेडी टू ईट’ प्रोडक्ट्स की मांग में कई गुना उछाल

एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और प्रवासी घरेलू कामगारों के लौटने के कारण शहरी घरों में खाना पकाने का तरीका बदल रहा है। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर रेडी-टु-ईट खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ रही हैै। शहरी परिवार अब कम मेहनत वाले भोजन के विकल्पों की ओर झुक रहे हैं। बिगबॉस्केट के चीफ मर्चेंडाइजिंग ऑफिसर शेषु कुमार तिरुमाला ने बताया कि रेडी-टू-ईट कैटेगरी की बिक्री सामान्य स्तर से 10% अधिक है।बीते पांच दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री सामान्य से 10 गुना रही है। रेडी-टू-ईट उत्पाद बनाने वाली कंपनी फ्रेशकॉन इंडिया के सह-संस्थापक अनुपम बोके ने कहा, उपभोक्ता और खाद्य व्यवसाय अब कुशल कुकिंग सॉल्यूशंस की ओर बढ़ रहे हैं। जो प्रोडक्ट खाना पकाने के समय को 80% तक कम करते हैं और 60% गैस बचाते हैं, उनमें डिस्ट्रीब्यूटर्स और एक्सपोर्टर्स की भारी रुचि देखी जा रही है। वहीं, अमेजन इंडिया के प्रवक्ता के अनुसार, इंस्टेंट नूडल्स, जूस, नट्स और प्रोटीन-आधारित स्नैक्स की मांग में ‘उल्लेखनीय वृद्धि’ हुई है। इसके लिए एक समर्पित ‘रेडी टू ईट स्टोर’ भी बनाया है। सीमेंट के दाम बढ़ाए, फिर वापस ली वृद्धि इस संकट के चलते पेटकोक, कोयले और पैकेजिंग सामग्री की कीमतें एक झटके में बढ़ गई है। इससे सीमेंट इंडस्ट्री पर असर पड़ा है। चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट आशुतोष मुरारका के अनुसार, इस भू-राजनीतिक संकट से उत्पादन लागत में 150 से 200 प्रति टन की बढ़ोतरी हो सकती है, जो सीधे तौर पर कंपनियों के मुनाफे को चोट पहुंचाएगी। सीमेंट की बोरियों के लिए इस्तेमाल होने वाला पॉलीप्रोपाइलीन सीधे कच्चे तेल से जुड़ा है। इस नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियों को कीमतों में 4-5% की वृद्धि करनी होगी, लेकिन बाजार की मौजूदा स्थिति इसे स्वीकार करने के पक्ष में नहीं दिखती। चौथी तिमाही में कंपनियों ने प्रति बोरी 15-20 रुपए की बढ़ोतरी की, लेकिन अत्यधिक आपूर्ति के कारण बढ़ोतरी वापस लेनी पड़ी। हालांकि उत्तर में 10-15 रु/बोरी की बढ़ोतरी टिकी हुई है। एक्सपर्ट क्या कहते हैं… अभी के शुरुआती रुझान किसी आपातकालीन खरीदारी का संकेत नहीं देतीं। लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष के चौथे सप्ताह तक मांग में उल्लेखनीय अंतर दिख सकता है, क्योंकि रेस्त्रां परिचालन में दिक्कत आ रही है। शहर से कुछ प्रवासी गृहनगर लौट रहे हैं। सतीश मेहना, फाउंडर, डेटम इंटेलिजेंस कच्चे माल के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में कीमतें 7-10 प्रतिशत तक बढ़ेंगी। हम मई तक अपनी फैक्ट्रियां पूरी क्षमता से चलाने का इरादा रखते हैं, लेकिन चुनौती यह है कि इन बढ़ी हुई कीमतों का मांग पर क्या असर पड़ेगा। कमल नंदी, अप्लायंसेज बिजनेस हेड, गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.