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Energy & AI are India’s National Priorities for 21st Century Freedom

Energy & AI are India's National Priorities for 21st Century Freedom
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नई दिल्ली28 मिनट पहले

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अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने कहा कि आज के दौर में एनर्जी और इंटेलिजेंस एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इन्हें राष्ट्रीय प्राथमिकता के तौर पर देखा जाना चाहिए। सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित CII एनुअल बिजनेस समिट 2026 में अडाणी ने भारत की भविष्य की जरूरतों पर यह बात कही है।

अडाणी ने मिडिल ईस्ट के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि एनर्जी सिक्योरिटी और डिजिटल सिक्योरिटी अब अलग-अलग नहीं रह गए हैं। ये दोनों ही अब किसी देश की राष्ट्रीय शक्ति के आधार हैं। उन्होंने कहा कि जो देश शांति के समय अपनी क्षमता नहीं बनाता, उसे संकट के समय इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।

21वीं सदी में असली आजादी का मतलब

अडाणी ने समिट में कहा कि 21वीं सदी में सच्ची स्वतंत्रता का मतलब उस ऊर्जा पर मालिकाना हक होना है जो हमारे घरों को रोशन करती है और उस इंटेलिजेंस (AI) पर कंट्रोल करना है जो हमारे दिमाग का मार्गदर्शन करती है।

उन्होंने बताया कि अमेरिका और चीन जैसी दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने इस बात को गहराई से समझा है।

पश्चिमी देशों की तरह AI से डरने की जरूरत नहीं

अडाणी ने उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया कि AI वर्कर्स की जगह ले लेगा या इंसानी फैसले कम कर देगा। उन्होंने कहा कि भारत को पश्चिमी देशों से ‘डर’ इंपोर्ट करने की जरूरत नहीं है।

भारत को AI को एक ऐसी ताकत के रूप में बनाना चाहिए जो अवसर छीनने के बजाय उत्पादकता बढ़ाए और नई नौकरियां जनरेट करें।

डेटा सेंटर की क्षमता 75 GW तक पहुंचने की उम्मीद

अडाणी ने भारत की मोबाइल डेटा क्रांति का उदाहरण देते हुए कहा कि AI से भी ऐसा ही उछाल आएगा, लेकिन इसमें बिजली की खपत बहुत ज्यादा होगी।

भारत की डेटा सेंटर क्षमता जो 2030 तक 5 गीगावाट (GW) होने की उम्मीद है, वह 2047 तक बढ़कर 75 GW तक पहुंच सकती है। मार्च 2026 तक भारत ने 500 GW स्थापित बिजली क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है।

अडाणी ग्रुप का 100 बिलियन डॉलर का निवेश प्लान

गौतम अडाणी ने बताया कि उनका ग्रुप डिजिटल भविष्य के लिए तीन पिलर्स – एनर्जी, डेटा सेंटर्स और लोगों पर काम कर रहा है।

क्लीन एनर्जी: एनर्जी ट्रांजेक्शन के लिए ग्रुप ने 100 बिलियन डॉलर यानी 9.52 लाख करोड़ रुपए के निवेश का वादा किया है।

सॉवरेन कंप्यूटिंग: भारतीय धरती पर डेटा सेंटर्स बनाने के लिए भी 100 बिलियन डॉलर के निवेश का प्लान है।

अडाणी फाउंडेशन: ग्रुप ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के लिए 60,000 करोड़ रुपए का लंबी अवधि का निवेश तय किया है, जिसका बड़ा हिस्सा AI-आधारित स्किलिंग पर खर्च होगा।

अगली आजादी की जंग लैब और डेटा सेंटर्स में होगी

अडाणी ने कहा कि भारत को अपने इंटेलिजेंस फ्यूचर के इंफ्रास्ट्रक्चर को किराए पर नहीं लेना चाहिए, बल्कि उसे अपनी मिट्टी पर बनाना और चलाना चाहिए।

अडाणी के मुताबिक, अगली आजादी की लड़ाई केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि हमारे ग्रिड, डेटा सेंटर्स, फैक्ट्रियों, क्लासरूम, लैब और हमारे दिमागों में लड़ी जाएगी।

क्या है सॉवरेन कंप्यूटिंग?

इसका मतलब है कि किसी देश का डेटा और उसे प्रोसेस करने वाली शक्ति (कंप्यूट) उसी देश की सीमाओं के भीतर हो, ताकि बाहरी हस्तक्षेप न हो सके।

भारत का पावर विजन 2047

भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी बिजली क्षमता को 4 गुना बढ़ाकर 2,000 गीगावाट (GW) तक ले जाना है।

ये खबर भी पढ़ें…

सरकार ने कहा- पेट्रोल-डीजल और LPG की कमी नहीं: एक दिन पहले PM मोदी ने कहा था- इनका इस्तेमाल कम करें

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच सरकार ने देश में ईंधन की कमी की खबरों को खारिज किया है। सरकार ने सोमवार को नागरिकों को आश्वासन दिया कि देश में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है।

यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रविवार को ईंधन पर निर्भरता कम करने और बचत करने की अपील के एक दिन बाद आया है। पूरी खबर पढ़ें…

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अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने कहा कि आज के दौर में एनर्जी और इंटेलिजेंस एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इन्हें राष्ट्रीय प्राथमिकता के तौर पर देखा जाना चाहिए। सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित CII एनुअल बिजनेस समिट 2026 में अडाणी ने भारत की भविष्य की जरूरतों पर यह बात कही है।

अडाणी ने मिडिल ईस्ट के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि एनर्जी सिक्योरिटी और डिजिटल सिक्योरिटी अब अलग-अलग नहीं रह गए हैं। ये दोनों ही अब किसी देश की राष्ट्रीय शक्ति के आधार हैं। उन्होंने कहा कि जो देश शांति के समय अपनी क्षमता नहीं बनाता, उसे संकट के समय इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।

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अडाणी ने समिट में कहा कि 21वीं सदी में सच्ची स्वतंत्रता का मतलब उस ऊर्जा पर मालिकाना हक होना है जो हमारे घरों को रोशन करती है और उस इंटेलिजेंस (AI) पर कंट्रोल करना है जो हमारे दिमाग का मार्गदर्शन करती है।

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भारत को AI को एक ऐसी ताकत के रूप में बनाना चाहिए जो अवसर छीनने के बजाय उत्पादकता बढ़ाए और नई नौकरियां जनरेट करें।

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भारत की डेटा सेंटर क्षमता जो 2030 तक 5 गीगावाट (GW) होने की उम्मीद है, वह 2047 तक बढ़कर 75 GW तक पहुंच सकती है। मार्च 2026 तक भारत ने 500 GW स्थापित बिजली क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है।

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अडाणी फाउंडेशन: ग्रुप ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के लिए 60,000 करोड़ रुपए का लंबी अवधि का निवेश तय किया है, जिसका बड़ा हिस्सा AI-आधारित स्किलिंग पर खर्च होगा।

अगली आजादी की जंग लैब और डेटा सेंटर्स में होगी

अडाणी ने कहा कि भारत को अपने इंटेलिजेंस फ्यूचर के इंफ्रास्ट्रक्चर को किराए पर नहीं लेना चाहिए, बल्कि उसे अपनी मिट्टी पर बनाना और चलाना चाहिए।

अडाणी के मुताबिक, अगली आजादी की लड़ाई केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि हमारे ग्रिड, डेटा सेंटर्स, फैक्ट्रियों, क्लासरूम, लैब और हमारे दिमागों में लड़ी जाएगी।

क्या है सॉवरेन कंप्यूटिंग?

इसका मतलब है कि किसी देश का डेटा और उसे प्रोसेस करने वाली शक्ति (कंप्यूट) उसी देश की सीमाओं के भीतर हो, ताकि बाहरी हस्तक्षेप न हो सके।

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