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CAG रिपोर्ट: कई जवानों को समय पर वेतन-भत्ते नहीं मिले:मिलिट्री अस्पतालों में कमियां मिली, सेना से जुड़े काम के रिकॉर्ड डिजिटल करने की सिफारिश

CAG रिपोर्ट: कई जवानों को समय पर वेतन-भत्ते नहीं मिले:मिलिट्री अस्पतालों में कमियां मिली, सेना से जुड़े काम के रिकॉर्ड डिजिटल करने की सिफारिश

CAG यानी सरकारी खर्च और कामकाज का ऑडिट करने वाली संस्था की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में कई मिलिट्री अस्पतालों के रखरखाव में कमी की ओर भी इशारा किया गया है। यह भी बताया गया है कि काफी संख्या में सेना के जवानों को उनके वेतन-भत्ते समय पर और सही तरीके से नहीं मिले। रिपोर्ट के मुताबिक सेना के निर्माण कार्यों से जुड़े साइट रिकॉर्ड्स ठीक से नहीं रखे गए। इससे काम की क्वालिटी और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हुआ। ऑडिट ने सिफारिश की है कि रक्षा मंत्रालय साइट रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज करे। ये वही कागज होते हैं जिनमें काम की प्रगति, मटेरियल और टेस्ट रिपोर्ट जैसी जानकारी रिकॉर्ड होती है। रिपोर्ट में तीन प्रमुख हिस्सों की ऑडिट की गई… कई जवानों को समय पर भुगतान नहीं मिला रिपोर्ट के मुताबिक प्रोविजनल फाइनल सेटलमेंट ऑफ अकाउंट्स (PFSA) की समीक्षा तय समय पर नहीं हुई। इसके कारण रिटायरमेंट के समय अधिकारियों, जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (JCOs) और दूसरे रैंक (ORs) के कर्मीयों से एक साथ बड़ी राशि की वसूली करनी पड़ी। आईटी सिस्टम में जरूरी नियम शामिल नहीं होने से कई सेना के जवानों को उनका भुगतान समय पर और सही तरीके से नहीं मिला। PTO में देरी, सिस्टम आपस में ठीक से नहीं जुड़े रिपोर्ट में PTO (प्रिविलेज टिकट ऑर्डर) जारी करने में देरी की बात कही गई है। ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) में डेटा सही से नहीं मिला, इसलिए कई आवेदन रिजेक्ट हो गए। ऑडिट ने कहा है कि अलग-अलग सिस्टम के बीच तालमेल बेहतर किया जाए और रिजेक्ट मामलों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया जाए। मिलिट्री अस्पतालों की इमारतें पुरानी, कई जगह जरूरी सुविधाएं नहीं डिफेंस मंत्रालय के तहत आने वाले मिलिट्री अस्पतालों में कई दिक्कतें मिलीं। कई अस्पतालों की इमारतें पुरानी हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच नहीं हुई। एक मामले में जून 2022 में लैंसडाउन के एक मिलिट्री अस्पताल का हिस्सा गिर गया था। कई जगह HVAC (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) और फायरफाइटिंग सिस्टम भी पूरे नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल स्टोर्स डिपो (AFMSD) मिलिट्री अस्पतालों की जरूरत की दवाएं पूरी नहीं दे पाए। कॉमन ड्रग लिस्ट की दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थीं। दो डिपो में दवाओं को समय पर बदला नहीं गया, जिससे ₹13.52 करोड़ की दवाएं फंसी रहीं। बिना लाइसेंस X-ray मशीनें चल रही थी ऑडिट में पाया गया कि कई जगह बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन नहीं हुआ। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े दस्तावेज भी नहीं रखे गए। कुछ अस्पतालों में बिना लाइसेंस के X-ray मशीनें चलाई जा रही थी। सात कमांड्स की समीक्षा में वेस्टर्न कमांड में सबसे ज्यादा नियमों का उल्लंघन मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय ने कुछ मामलों में सुधार के कदम उठाने शुरू किए हैं, लेकिन कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। ————

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CAG यानी सरकारी खर्च और कामकाज का ऑडिट करने वाली संस्था की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में कई मिलिट्री अस्पतालों के रखरखाव में कमी की ओर भी इशारा किया गया है। यह भी बताया गया है कि काफी संख्या में सेना के जवानों को उनके वेतन-भत्ते समय पर और सही तरीके से नहीं मिले। रिपोर्ट के मुताबिक सेना के निर्माण कार्यों से जुड़े साइट रिकॉर्ड्स ठीक से नहीं रखे गए। इससे काम की क्वालिटी और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हुआ। ऑडिट ने सिफारिश की है कि रक्षा मंत्रालय साइट रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज करे। ये वही कागज होते हैं जिनमें काम की प्रगति, मटेरियल और टेस्ट रिपोर्ट जैसी जानकारी रिकॉर्ड होती है। रिपोर्ट में तीन प्रमुख हिस्सों की ऑडिट की गई… कई जवानों को समय पर भुगतान नहीं मिला रिपोर्ट के मुताबिक प्रोविजनल फाइनल सेटलमेंट ऑफ अकाउंट्स (PFSA) की समीक्षा तय समय पर नहीं हुई। इसके कारण रिटायरमेंट के समय अधिकारियों, जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स (JCOs) और दूसरे रैंक (ORs) के कर्मीयों से एक साथ बड़ी राशि की वसूली करनी पड़ी। आईटी सिस्टम में जरूरी नियम शामिल नहीं होने से कई सेना के जवानों को उनका भुगतान समय पर और सही तरीके से नहीं मिला। PTO में देरी, सिस्टम आपस में ठीक से नहीं जुड़े रिपोर्ट में PTO (प्रिविलेज टिकट ऑर्डर) जारी करने में देरी की बात कही गई है। ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) में डेटा सही से नहीं मिला, इसलिए कई आवेदन रिजेक्ट हो गए। ऑडिट ने कहा है कि अलग-अलग सिस्टम के बीच तालमेल बेहतर किया जाए और रिजेक्ट मामलों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया जाए। मिलिट्री अस्पतालों की इमारतें पुरानी, कई जगह जरूरी सुविधाएं नहीं डिफेंस मंत्रालय के तहत आने वाले मिलिट्री अस्पतालों में कई दिक्कतें मिलीं। कई अस्पतालों की इमारतें पुरानी हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच नहीं हुई। एक मामले में जून 2022 में लैंसडाउन के एक मिलिट्री अस्पताल का हिस्सा गिर गया था। कई जगह HVAC (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) और फायरफाइटिंग सिस्टम भी पूरे नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल स्टोर्स डिपो (AFMSD) मिलिट्री अस्पतालों की जरूरत की दवाएं पूरी नहीं दे पाए। कॉमन ड्रग लिस्ट की दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थीं। दो डिपो में दवाओं को समय पर बदला नहीं गया, जिससे ₹13.52 करोड़ की दवाएं फंसी रहीं। बिना लाइसेंस X-ray मशीनें चल रही थी ऑडिट में पाया गया कि कई जगह बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन नहीं हुआ। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े दस्तावेज भी नहीं रखे गए। कुछ अस्पतालों में बिना लाइसेंस के X-ray मशीनें चलाई जा रही थी। सात कमांड्स की समीक्षा में वेस्टर्न कमांड में सबसे ज्यादा नियमों का उल्लंघन मिला। रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय ने कुछ मामलों में सुधार के कदम उठाने शुरू किए हैं, लेकिन कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। ————

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