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क्या AC बना रहा आपको कमजोर? सेहत पर कैसे डाल रहा असर, जानें एक्सपर्ट्स से

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Side effects of AC: गर्मी से राहत पाने के लिए एसी का इस्तेमाल आम बात है, लेकिन घंटों एसी की हवा में रहने से आंखों की सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है. ड्राईनेस, जलन और इन्फेक्शन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं.

अलीगढ़: जैसे-जैसे गर्मियां अपने चरम की ओर बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे घरों में एसी का उपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है. लोग अपने आराम और ठंडक के लिए एयर कंडीशनर का सहारा लेते हैं, लेकिन इसके लगातार इस्तेमाल से न सिर्फ पर्यावरण बल्कि स्वास्थ्य पर भी कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं. आइए जानते हैं एसी के नुकसान.

एएमयू के जोग्राफी विभाग की प्रोफेसर सालेहा जमाल ने बताया कि एसी का आपके शरीर पर कैसा असर पड़ता है इसके बारे में बात करें तो एसी बंद कमरे की हवा को बार-बार सर्कुलेट करता है. इस प्रक्रिया में हवा में मौजूद धूल के कण (डस्ट पार्टिकल्स) और परागकण (पोलन) भी लगातार घूमते रहते हैं. ऐसे में जिन लोगों को सांस से जुड़ी समस्याएं हैं, जैसे अस्थमा या अन्य क्रॉनिक पल्मोनरी डिजीज, उनके लिए यह स्थिति परेशानी बढ़ाने वाली हो सकती है.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा एसी हवा को ठंडा करने के साथ-साथ कमरे की नमी (मॉइस्चर) भी कम कर देता है. नमी की कमी के कारण आंखों में सूखापन, गले में खराश और सांस की नलियों में ड्रायनेस की समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए कमरे में पानी से भरा खुला बर्तन रखने से नमी को कुछ हद तक बनाए रखा जा सकता है. एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लगातार ठंडे वातावरण में रहने से शरीर उस तापमान का आदी हो जाता है. ऐसे में जब व्यक्ति अचानक तेज गर्मी में बाहर निकलता है, तो शरीर पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसलिए एसी का तापमान बहुत कम 16-18 डिग्री रखने के बजाय 24-26 डिग्री के बीच रखना अधिक उचित माना जाता है.

उन्होंने बताया कि एसी की नियमित सफाई और सर्विसिंग भी बेहद जरूरी है. यदि समय-समय पर इसकी देखभाल नहीं की जाए, तो इसमें बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं. अगर पर्यावरण पर इसके प्रभाव की बात करें, तो एसी से निकलने वाली गैसें जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती हैं और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देती हैं. इसके अलावा एसी की बाहरी यूनिट गर्म हवा छोड़ती है, जिससे आसपास का तापमान और अधिक बढ़ जाता है.

हालांकि, अब नई तकनीकों के माध्यम से इन प्रभावों को कम करने की कोशिश की जा रही है. इन्वर्टर एसी और इको-फ्रेंडली रेफ्रिजरेंट्स वाले एसी का उपयोग करके ऊर्जा की खपत और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है. इस प्रकार, एसी का उपयोग जहां एक ओर आराम देता है, वहीं इसके सही इस्तेमाल और रखरखाव पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को सुरक्षित रखा जा सके.

About the Author

काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें

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अलीगढ़: जैसे-जैसे गर्मियां अपने चरम की ओर बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे घरों में एसी का उपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है. लोग अपने आराम और ठंडक के लिए एयर कंडीशनर का सहारा लेते हैं, लेकिन इसके लगातार इस्तेमाल से न सिर्फ पर्यावरण बल्कि स्वास्थ्य पर भी कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं. आइए जानते हैं एसी के नुकसान.

एएमयू के जोग्राफी विभाग की प्रोफेसर सालेहा जमाल ने बताया कि एसी का आपके शरीर पर कैसा असर पड़ता है इसके बारे में बात करें तो एसी बंद कमरे की हवा को बार-बार सर्कुलेट करता है. इस प्रक्रिया में हवा में मौजूद धूल के कण (डस्ट पार्टिकल्स) और परागकण (पोलन) भी लगातार घूमते रहते हैं. ऐसे में जिन लोगों को सांस से जुड़ी समस्याएं हैं, जैसे अस्थमा या अन्य क्रॉनिक पल्मोनरी डिजीज, उनके लिए यह स्थिति परेशानी बढ़ाने वाली हो सकती है.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा एसी हवा को ठंडा करने के साथ-साथ कमरे की नमी (मॉइस्चर) भी कम कर देता है. नमी की कमी के कारण आंखों में सूखापन, गले में खराश और सांस की नलियों में ड्रायनेस की समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए कमरे में पानी से भरा खुला बर्तन रखने से नमी को कुछ हद तक बनाए रखा जा सकता है. एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लगातार ठंडे वातावरण में रहने से शरीर उस तापमान का आदी हो जाता है. ऐसे में जब व्यक्ति अचानक तेज गर्मी में बाहर निकलता है, तो शरीर पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसलिए एसी का तापमान बहुत कम 16-18 डिग्री रखने के बजाय 24-26 डिग्री के बीच रखना अधिक उचित माना जाता है.

उन्होंने बताया कि एसी की नियमित सफाई और सर्विसिंग भी बेहद जरूरी है. यदि समय-समय पर इसकी देखभाल नहीं की जाए, तो इसमें बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं. अगर पर्यावरण पर इसके प्रभाव की बात करें, तो एसी से निकलने वाली गैसें जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती हैं और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देती हैं. इसके अलावा एसी की बाहरी यूनिट गर्म हवा छोड़ती है, जिससे आसपास का तापमान और अधिक बढ़ जाता है.

हालांकि, अब नई तकनीकों के माध्यम से इन प्रभावों को कम करने की कोशिश की जा रही है. इन्वर्टर एसी और इको-फ्रेंडली रेफ्रिजरेंट्स वाले एसी का उपयोग करके ऊर्जा की खपत और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है. इस प्रकार, एसी का उपयोग जहां एक ओर आराम देता है, वहीं इसके सही इस्तेमाल और रखरखाव पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को सुरक्षित रखा जा सके.

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