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Artemis-II Mission Launch Today | NASA Moon Orbit

Artemis-II Mission Launch Today | NASA Moon Orbit

वॉशिंगटन2 घंटे पहले

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अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा आज 2 अप्रैल को ‘आर्टेमिस-2’ मिशन लॉन्च करेगा। सुबह 3:54 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना होगा। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ये लॉन्चिंग होगी।

साल 1972 में ‘अपोलो-17’ के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा। चारों यात्री इस मिशन में चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर वापस धरती पर लौटेंगे। ये मिशन करीब 10 दिनों का होगा।

'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना होगा।

‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना होगा।

मकसद: ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच चाहता है नासा

मिशन का मकसद ओरियन स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना है। नासा यह देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने के रास्ते को आसान बनाएगा।

4 एस्ट्रोनॉट्स: पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुचेगी

मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है।

1. रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन (50) इस मिशन के लिए कमांडर हैं। 2014 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 6 महीने बिताने वाले वाइजमैन जमीन पर ऊंचाई से डरते हैं। 2020 में अपनी पत्नी को खोने के बाद वाइजमैन अपनी दो बेटियों की अकेले परवरिश कर रहे हैं।

2. क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच (47) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। बचपन में अपोलो-8 की खींची गई ‘अर्थराइज’ फोटो देखकर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठानी थी।

3. जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन (50) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। अगर सब-कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो हैनसन इस मिशन के जरिए चांद तक पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे। हैनसन अपने साथ कनाडा का मशहूर मैपल सिरप और कुकीज ले जाएंगे।

4. विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट के तौर पर चुने गए ग्लोवर (49) चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। ग्लोवर अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठियां ले जाएंगे। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड में अपनी जगह को तलाशना और सीखना ही इंसान होने का असली मतलब है।

लॉन्च पैड की ओर बढ़ते अंतरिक्ष यात्री (बाएं से दाएं) जेरेमी हैनसन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और रीड वाइजमैन; केनेडी स्पेस सेंटर में लॉन्च डे रिहर्सल के दौरान की तस्वीर।

लॉन्च पैड की ओर बढ़ते अंतरिक्ष यात्री (बाएं से दाएं) जेरेमी हैनसन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और रीड वाइजमैन; केनेडी स्पेस सेंटर में लॉन्च डे रिहर्सल के दौरान की तस्वीर।

अगला कदम: चांद की सतह पर उतरने की तैयारी

आर्टेमिस-II के बाद नासा ‘आर्टेमिस-III’ मिशन पर काम करेगा। उसमें डॉकिंग सिस्टम की टेस्टिंग होगी। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो साल 2028 में आर्टेमिस-IV के जरिए इंसान एक बार फिर चांद पर कदम रखेगा। इससे पहले 2022 में मानवरहित आर्टेमिस-1 भेजा गया था।

अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर

70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही ‘स्पेस रेस’ में खुद को बेहतर साबित करना था। लेकिन आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है।

नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा।

साल 1969 में चंद्रमा की सतह पर अमेरिकी झंडे के पास खड़े अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन।

साल 1969 में चंद्रमा की सतह पर अमेरिकी झंडे के पास खड़े अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन।

यूट्यूब और नासा की वेबसाइट पर 24/7 कवरेज

दुनियाभर के लोग इस ऐतिहासिक पल को घर बैठे देख सकते हैं। नासा अपने यूट्यूब चैनल और ‘NASA+’ प्लेटफॉर्म पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग करेगा। ओरियन स्पेसक्राफ्ट के अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद वहां से लाइव व्यूज भी शेयर किए जाएंगे।

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अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा आज 2 अप्रैल को ‘आर्टेमिस-2’ मिशन लॉन्च करेगा। सुबह 3:54 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना होगा। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ये लॉन्चिंग होगी।

साल 1972 में ‘अपोलो-17’ के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा। चारों यात्री इस मिशन में चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर वापस धरती पर लौटेंगे। ये मिशन करीब 10 दिनों का होगा।

'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना होगा।

‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना होगा।

मकसद: ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच चाहता है नासा

मिशन का मकसद ओरियन स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना है। नासा यह देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने के रास्ते को आसान बनाएगा।

4 एस्ट्रोनॉट्स: पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुचेगी

मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है।

1. रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन (50) इस मिशन के लिए कमांडर हैं। 2014 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 6 महीने बिताने वाले वाइजमैन जमीन पर ऊंचाई से डरते हैं। 2020 में अपनी पत्नी को खोने के बाद वाइजमैन अपनी दो बेटियों की अकेले परवरिश कर रहे हैं।

2. क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच (47) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। बचपन में अपोलो-8 की खींची गई ‘अर्थराइज’ फोटो देखकर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री बनने की ठानी थी।

3. जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन (50) मिशन स्पेशलिस्ट हैं। अगर सब-कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो हैनसन इस मिशन के जरिए चांद तक पहुंचने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे। हैनसन अपने साथ कनाडा का मशहूर मैपल सिरप और कुकीज ले जाएंगे।

4. विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट के तौर पर चुने गए ग्लोवर (49) चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। ग्लोवर अपने साथ बाइबिल, अपनी शादी की अंगूठियां ले जाएंगे। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड में अपनी जगह को तलाशना और सीखना ही इंसान होने का असली मतलब है।

लॉन्च पैड की ओर बढ़ते अंतरिक्ष यात्री (बाएं से दाएं) जेरेमी हैनसन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और रीड वाइजमैन; केनेडी स्पेस सेंटर में लॉन्च डे रिहर्सल के दौरान की तस्वीर।

लॉन्च पैड की ओर बढ़ते अंतरिक्ष यात्री (बाएं से दाएं) जेरेमी हैनसन, क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर और रीड वाइजमैन; केनेडी स्पेस सेंटर में लॉन्च डे रिहर्सल के दौरान की तस्वीर।

अगला कदम: चांद की सतह पर उतरने की तैयारी

आर्टेमिस-II के बाद नासा ‘आर्टेमिस-III’ मिशन पर काम करेगा। उसमें डॉकिंग सिस्टम की टेस्टिंग होगी। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो साल 2028 में आर्टेमिस-IV के जरिए इंसान एक बार फिर चांद पर कदम रखेगा। इससे पहले 2022 में मानवरहित आर्टेमिस-1 भेजा गया था।

अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर

70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही ‘स्पेस रेस’ में खुद को बेहतर साबित करना था। लेकिन आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है।

नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा।

साल 1969 में चंद्रमा की सतह पर अमेरिकी झंडे के पास खड़े अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन।

साल 1969 में चंद्रमा की सतह पर अमेरिकी झंडे के पास खड़े अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन।

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दुनियाभर के लोग इस ऐतिहासिक पल को घर बैठे देख सकते हैं। नासा अपने यूट्यूब चैनल और ‘NASA+’ प्लेटफॉर्म पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग करेगा। ओरियन स्पेसक्राफ्ट के अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद वहां से लाइव व्यूज भी शेयर किए जाएंगे।

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