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आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

अभिलाष थपलियाल इन दिनों वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ के सीजन 3 को लेकर चर्चा में हैं, जहां उनका ‘एसके’ का किरदार दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुका है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभिलाष ने बताया कि इस बार भी शो को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, खासकर दोस्ती से जुड़े इमोशनल सीन लोगों को गहराई से छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘एसके’ का किरदार उन लोगों की कहानी है जो जिंदगी में फेल होते हैं, इसलिए दर्शक उससे खुद को जोड़ पाते हैं। अभिलाष ने अपने करियर की शुरुआत, रेडियो जॉकी से लेकर फिल्मों और वेब सीरीज तक के सफर को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक्टिंग उनका पहला सपना नहीं था, बल्कि वह आर्मी जॉइन करना चाहते थे। इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के कारण आई चुनौतियों और लगातार खुद को साबित करने की जरूरत पर भी उन्होंने खुलकर बात की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 3 को लेकर कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? बहुत शानदार। एस्पिरेंट्स से लोग पहले ही जुड़ चुके हैं, इसलिए इस बार भी प्यार मिल रहा है। खासकर दोस्ती वाले सीन काफी वायरल हुए हैं। लोग कहते हैं कि देखकर भावुक हो गए। आपके किरदार ‘एसके’ से लोग इतना कनेक्ट क्यों करते हैं? क्योंकि ये सिर्फ टॉपर की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो फेल हो जाते हैं। हम सब कहीं न कहीं वैसा ही महसूस करते हैं, इसलिए कनेक्शन बनता है। क्या बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे? बिल्कुल नहीं। मैं तो आर्मी जॉइन करना चाहता था। मैं फौजी परिवार से हूं, NDA क्लियर करना सपना था, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ। एक्टिंग में एंट्री कैसे हुई? मैं दिल्ली में रेडियो जॉकी था। वहीं फिल्म ‘तेवर’ के डायरेक्टर अमित शर्मा से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे फिल्मों में ट्राई करने को कहा। फिर मुंबई आया और पहली फिल्म पहली फिल्म ‘दिल जंगली’ मिली। ‘एस्पिरेंट्स’ से पहले करियर कैसा था? शुरुआत में फिल्में ज्यादा नहीं चलीं, फिर टीवी और कॉमेडी शोज किए। सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल सटायर भी करता था। लेकिन असली पहचान ‘एस्पिरेंट्स’ से मिली। इस सीरीज में ‘एसके’ का रोल कैसे मिला? मैंने ऑडिशन दिया था। पहले मुझे लगा मैं ‘अभिलाष’ का किरदार करूंगा, लेकिन बाद में पता चला कि मुझे ‘एसके’ का रोल मिल रहा है। ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 1 के बाद क्या जिम्मेदारी बढ़ गई थी? हां, लेकिन मैं स्क्रिप्ट में ज्यादा बदलाव नहीं करता। जो लिखा होता है, उसे ईमानदारी से निभाता हूं। मेरा मानना है “कम में बम”, कम सीन हों, लेकिन असरदार हों। रेडियो से एक्टिंग तक का सफर कैसा रहा? रेडियो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। वहां सिर्फ आवाज से पहचान बनती है। वही कॉन्फिडेंस एक्टिंग में काम आया। क्या आपने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली है? नहीं, मैंने कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली। जो सीखा, लाइफ से सीखा। अलग-अलग जगह रहने से अलग-अलग भाषा और एक्सेंट पकड़ना आसान हो गया। ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद करियर में क्या बदलाव आया? इसके बाद मुझे कॉन्फिडेंस आया कि मैं खुद को एक्टर कह सकता हूं। फिर मैंने अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टर्स के साथ काम किया और अलग-अलग रोल मिले। आपने किन-किन फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में काम किया है? ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद मुझे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स मिले। मैंने फिल्म ‘ब्लर’ में काम किया, अनुराग कश्यप के साथ फिल्म ‘केनेडी’ में काम किया। और अश्विनी अय्यर तिवारी के साथ वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में काम किया। इन प्रोजेक्ट्स ने मुझे एक एक्टर के तौर पर काफी कॉन्फिडेंस दिया। इंडस्ट्री में सबसे बड़ा स्ट्रगल क्या रहा? आउटसाइडर होने का। आपको खुद जाकर लोगों को बताना पड़ता है कि आप क्या कर सकते हैं। यहां कोई गॉडफादर नहीं होता। आज भी स्ट्रगल जारी है? बिल्कुल। मैं आज भी डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स से मिलता हूं, खुद को पिच करता हूं। यह प्रोसेस कभी खत्म नहीं होती। खुद को बेहतर बनाने के लिए क्या कर रहे हैं? मैं FTII और NSD के स्टूडेंट्स के साथ शॉर्ट फिल्म्स कर रहा हूं। वहां से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मैं अपनी एक्टिंग को लगातार बेहतर करना चाहता हूं।

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