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TCS Nashik Sexual Harassment, POSH Non-Compliance

TCS Nashik Sexual Harassment, POSH Non-Compliance

नई दिल्ली27 मिनट पहले

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TCS की नासिक यूनिट से जुड़े सेक्सुअल हैरेसमेंट और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपी।

नेशनल कमीशन फॉर वीमेन (NCW) ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक ऑफिस में व्यापक यौन उत्पीड़न, सिस्टमेटिक बुलिंग और POSH कानून के शून्य पालन की बात कही। यह निष्कर्ष फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में सामने आया। रिपोर्ट 8 मई को महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई।

रिपोर्ट में कहा गया कि कई महिलाएं शिकायत करना चाहती थीं, लेकिन डर, सामाजिक बदनामी और भरोसेमंद सिस्टम की कमी से आगे नहीं आईं। आवाज उठाने वालों को ट्रांसफर या नौकरी जाने का डर दिखाया जाता था।

NCW ने मामले में खुद संज्ञान लिया था। इसके बाद चेयरपर्सन विजया राहतकर के निर्देश पर कमेटी बनाई गई, जिसने 18-19 अप्रैल को नासिक जाकर जांच की।

नासिक ऑफिस का माहौल टॉक्सिक था

कमेटी में बॉम्बे हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व DGP बीके सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा और NCW की सीनियर कोऑर्डिनेटर लीलाबती शामिल थीं। टीम ने पीड़ितों, POSH कमेटी, पुलिस और अन्य लोगों से बातचीत कर 50 पेज से ज्यादा की रिपोर्ट तैयार की।

रिपोर्ट में कहा गया कि नासिक ऑफिस का माहौल गंभीर रूप से परेशान करने वाला और टॉक्सिक था। इसमें सत्ता का दुरुपयोग, यौन उत्पीड़न और मानसिक दबाव के मामले सामने आए। आरोपी युवा और कमजोर महिला कर्मचारियों को निशाना बनाते थे और उनके साथ यौन, मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न करते थे।

महिलाओं पर दबाव बनाया गया

कमेटी ने कहा कि कई मामलों में छेड़छाड़ की कोशिशें हुईं। इसे वर्कप्लेस पर यौन उत्पीड़न का सामान्य उदाहरण बताया गया, जहां महिलाओं को बुलिंग, स्टॉकिंग और अपमानजनक व्यवहार झेलना पड़ा और उन्हें लगातार मानसिक तनाव हुआ।

रिपोर्ट में धार्मिक टिप्पणियों का भी जिक्र है। आरोप है कि महिला कर्मचारियों को हिंदू धर्म, परंपराओं और मान्यताओं को नीचा दिखाकर परेशान किया जाता था। उनके सामने इस्लाम को बेहतर धर्म बताया जाता था, जिससे दबाव वाला माहौल बनता था।

रिपोर्ट के अनुसार आरोपी बार-बार धार्मिक टिप्पणी कर महिलाओं पर दबाव बनाते थे। इससे खासतौर पर युवा कर्मचारियों पर असर पड़ा, जिन्हें ज्यादा असुरक्षित बताया गया।

कमेटी ने आरोप लगाया कि नासिक ऑफिस पर प्रभावी नियंत्रण डेनिश, तौसीफ और रजा मेमन के पास था, जबकि अश्विनी चैनानी ने “चुप्पी और असंवेदनशीलता” के जरिए इन्हें बढ़ावा दिया।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट में कहा गया कि ऑफिस में लगे CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे थे, जिससे निगरानी में बड़ी कमी सामने आई।

पुणे और नासिक ऑफिस के लिए एक ही इंटरनल कमेटी

  • रिपोर्ट में POSH कानून के पालन को “शून्य अनुपालन” बताया गया। कहा गया कि पुणे और नासिक ऑफिस के लिए एक ही इंटरनल कमेटी (IC) बनाई गई थी, जो नियमों के खिलाफ है। कोई IC सदस्य नासिक ऑफिस का निरीक्षण करने नहीं गया था।
  • यह पाया गया कि कर्मचारियों को POSH कानून की जानकारी देने के लिए कोई बोर्ड, पोस्टर या जागरूकता सामग्री नहीं थी। न कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग हुई और न IC सदस्यों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम हुआ।
  • कमेटी ने POSH कमेटी के रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि उनमें महिला कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता की कमी थी। उन्होंने धारा 19(C) के तहत जरूरी ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रम नहीं कराए।

रिपोर्ट में कहा गया कि यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि “गवर्नेंस की भी कमी” है। कमेटी ने सुझाव दिया कि POSH कानून की धारा 19, 25 और 26 का सख्ती से पालन हो और हर ऑफिस में मजबूत रोकथाम और शिकायत व्यवस्था हो। ——————————————————-

ये खबर भी पढ़ें:

नासिक TCS केस की आरोपी निदा को अग्रिम जमानत नहीं:प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में कहा, आरोप गंभीर; कस्टडी में पूछताछ करना जरूरी

नासिक कोर्ट ने शनिवार को TCS की नासिक यूनिट से जुड़े सेक्सुअल हैरेसमेंट और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में आरोपी निदा खान की एंटीसिपेटरी बेल याचिका खारिज कर दी। प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में कहा कि आरोप गंभीर हैं और उनसे कस्टडी में पूछताछ जरूरी है। निदा अब तक फरार है। पढ़ें पूरी खबर…

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राजनीति

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नई दिल्ली27 मिनट पहले

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TCS की नासिक यूनिट से जुड़े सेक्सुअल हैरेसमेंट और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपी।

नेशनल कमीशन फॉर वीमेन (NCW) ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक ऑफिस में व्यापक यौन उत्पीड़न, सिस्टमेटिक बुलिंग और POSH कानून के शून्य पालन की बात कही। यह निष्कर्ष फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में सामने आया। रिपोर्ट 8 मई को महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई।

रिपोर्ट में कहा गया कि कई महिलाएं शिकायत करना चाहती थीं, लेकिन डर, सामाजिक बदनामी और भरोसेमंद सिस्टम की कमी से आगे नहीं आईं। आवाज उठाने वालों को ट्रांसफर या नौकरी जाने का डर दिखाया जाता था।

NCW ने मामले में खुद संज्ञान लिया था। इसके बाद चेयरपर्सन विजया राहतकर के निर्देश पर कमेटी बनाई गई, जिसने 18-19 अप्रैल को नासिक जाकर जांच की।

नासिक ऑफिस का माहौल टॉक्सिक था

कमेटी में बॉम्बे हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व DGP बीके सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा और NCW की सीनियर कोऑर्डिनेटर लीलाबती शामिल थीं। टीम ने पीड़ितों, POSH कमेटी, पुलिस और अन्य लोगों से बातचीत कर 50 पेज से ज्यादा की रिपोर्ट तैयार की।

रिपोर्ट में कहा गया कि नासिक ऑफिस का माहौल गंभीर रूप से परेशान करने वाला और टॉक्सिक था। इसमें सत्ता का दुरुपयोग, यौन उत्पीड़न और मानसिक दबाव के मामले सामने आए। आरोपी युवा और कमजोर महिला कर्मचारियों को निशाना बनाते थे और उनके साथ यौन, मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न करते थे।

महिलाओं पर दबाव बनाया गया

कमेटी ने कहा कि कई मामलों में छेड़छाड़ की कोशिशें हुईं। इसे वर्कप्लेस पर यौन उत्पीड़न का सामान्य उदाहरण बताया गया, जहां महिलाओं को बुलिंग, स्टॉकिंग और अपमानजनक व्यवहार झेलना पड़ा और उन्हें लगातार मानसिक तनाव हुआ।

रिपोर्ट में धार्मिक टिप्पणियों का भी जिक्र है। आरोप है कि महिला कर्मचारियों को हिंदू धर्म, परंपराओं और मान्यताओं को नीचा दिखाकर परेशान किया जाता था। उनके सामने इस्लाम को बेहतर धर्म बताया जाता था, जिससे दबाव वाला माहौल बनता था।

रिपोर्ट के अनुसार आरोपी बार-बार धार्मिक टिप्पणी कर महिलाओं पर दबाव बनाते थे। इससे खासतौर पर युवा कर्मचारियों पर असर पड़ा, जिन्हें ज्यादा असुरक्षित बताया गया।

कमेटी ने आरोप लगाया कि नासिक ऑफिस पर प्रभावी नियंत्रण डेनिश, तौसीफ और रजा मेमन के पास था, जबकि अश्विनी चैनानी ने “चुप्पी और असंवेदनशीलता” के जरिए इन्हें बढ़ावा दिया।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट में कहा गया कि ऑफिस में लगे CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे थे, जिससे निगरानी में बड़ी कमी सामने आई।

पुणे और नासिक ऑफिस के लिए एक ही इंटरनल कमेटी

  • रिपोर्ट में POSH कानून के पालन को “शून्य अनुपालन” बताया गया। कहा गया कि पुणे और नासिक ऑफिस के लिए एक ही इंटरनल कमेटी (IC) बनाई गई थी, जो नियमों के खिलाफ है। कोई IC सदस्य नासिक ऑफिस का निरीक्षण करने नहीं गया था।
  • यह पाया गया कि कर्मचारियों को POSH कानून की जानकारी देने के लिए कोई बोर्ड, पोस्टर या जागरूकता सामग्री नहीं थी। न कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग हुई और न IC सदस्यों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम हुआ।
  • कमेटी ने POSH कमेटी के रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि उनमें महिला कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता की कमी थी। उन्होंने धारा 19(C) के तहत जरूरी ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रम नहीं कराए।

रिपोर्ट में कहा गया कि यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि “गवर्नेंस की भी कमी” है। कमेटी ने सुझाव दिया कि POSH कानून की धारा 19, 25 और 26 का सख्ती से पालन हो और हर ऑफिस में मजबूत रोकथाम और शिकायत व्यवस्था हो। ——————————————————-

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नासिक TCS केस की आरोपी निदा को अग्रिम जमानत नहीं:प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में कहा, आरोप गंभीर; कस्टडी में पूछताछ करना जरूरी

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