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Iran Missile Arsenal Intact: US Intel Report Reveals

Iran Missile Arsenal Intact: US Intel Report Reveals

वॉशिंगटन डीसी58 मिनट पहले

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फाइल।

लगातार पांच हफ्तों से जारी अमेरिका और इजराइल के हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अमेरिकी खुफिया आकलन, जिसका हवाला CNN ने तीन सूत्रों के जरिए दिया, बताता है कि ईरान के करीब आधे मिसाइल लॉन्चर अब भी सुरक्षित हैं और उसके पास हजारों आत्मघाती ड्रोन मौजूद हैं।

खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लॉन्चर ऐसे हैं जो हमलों के बाद जमीन के नीचे दब गए हैं या पहुंच से बाहर हो गए हैं, लेकिन नष्ट नहीं हुए। एक सूत्र का कहना है कि ईरान अब भी पूरे क्षेत्र में गंभीर नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

ड्रोन ताकत भी काफी हद तक बची हुई है। अनुमान है कि ईरान की लगभग आधी ड्रोन क्षमता अब भी सक्रिय है। इसके अलावा तटीय रक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली क्रूज मिसाइलें भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जो होर्मुज में जहाजों के लिए खतरा बनी हुई हैं।

यह तस्वीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके प्रशासन के दावों से अलग है। ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी हद तक खत्म कर दी गई है और उसके हथियार उत्पादन ठिकाने तबाह कर दिए गए हैं।

9 मार्च 2026 को जारी एक वीडियो का स्क्रीनशॉट है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि यह ईरान का मिसाइल लॉन्चर था और इसी जगह पर अमेरिका ने हमला किया था।

9 मार्च 2026 को जारी एक वीडियो का स्क्रीनशॉट है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि यह ईरान का मिसाइल लॉन्चर था और इसी जगह पर अमेरिका ने हमला किया था।

अमेरिकी मंत्री बोले- ट्रम्प की छवि खराब कर रहे गुमनाम सूत्र

व्हाइट हाउस ने इन खुफिया आकलनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि गुमनाम सूत्र ट्रम्प की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

सरकार का दावा है कि ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है, दो-तिहाई सैन्य उत्पादन क्षमता नष्ट हो गई है और अमेरिका तथा इजराइल को हवाई बढ़त हासिल है।

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा है कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है।

हालांकि जमीनी स्थिति इससे अलग संकेत देती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार 12,300 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद ईरान की क्षमताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं।

इजराइल का अनुमान है कि केवल 20 से 25 प्रतिशत लॉन्चर सक्रिय हैं, हालांकि इसमें वे सिस्टम शामिल नहीं हैं जो सुरंगों और गुफाओं में छिपे हुए हैं।

ईरान की रणनीति का अहम हिस्सा उसके भूमिगत ठिकाने हैं। उसने मिसाइल और लॉन्च सिस्टम को सुरंगों और गुफाओं में छिपाकर रखा है, जिससे उन्हें ढूंढना और नष्ट करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा मोबाइल लॉन्चर तेजी से जगह बदलते हैं, जिससे उन पर निशाना साधना और भी कठिन हो जाता है।

ईरान ने शुक्रवार रात इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल अटैक किए।

ईरान ने शुक्रवार रात इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल अटैक किए।

जमीन और सुरंगों के नीचे छिपे ईरानी हथियार

अमेरिका और इजराइल अब इन ठिकानों के एंट्री पॉइंट और उन्हें फिर से चालू करने वाले उपकरणों को निशाना बना रहे हैं। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियां अब तक यह तय नहीं कर पाई हैं कि ईरान की मिसाइल क्षमता को कितना नुकसान पहुंचाया जा चुका है और कितने लॉन्चर अब भी बचे हैं।

अधिकारियों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी इतनी बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्च सिस्टम मौजूद हैं कि वह इजराइल और क्षेत्र के अन्य ठिकानों पर हमला कर सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित करना भी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि तटीय मिसाइल क्षमता खत्म नहीं हुई है और संभव है कि यह भी भूमिगत ठिकानों में छिपी हो।

जहां ईरान की नियमित नौसेना को नुकसान हुआ है, वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड की समुद्री ताकत अब भी काफी हद तक बची हुई है। उसके पास सैकड़ों छोटी नावें और बिना चालक वाली नौकाएं हैं, जिनका इस्तेमाल समुद्री रास्तों को बाधित करने में किया जा सकता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उसके पास अभी भी ड्रोन, मिसाइल और सहयोगी नेटवर्क जैसी क्षमताएं मौजूद हैं, जिससे वह जवाबी कार्रवाई जारी रख सकता है।

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ईरान जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट:ट्रम्प का ईरानी आसमान पर कब्जे का दावा गलत; अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह

ईरान जंग के एक महीने बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। 19 मिनट के भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और उनके पास जवाब देने की क्षमता नहीं बची है।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर कब्जा हो चुका है। उनके विमान तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर पा रहा है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ऐसे ही दावे किए। लेकिन हालात अब अलग कहानी बता रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लॉन्चर ऐसे हैं जो हमलों के बाद जमीन के नीचे दब गए हैं या पहुंच से बाहर हो गए हैं, लेकिन नष्ट नहीं हुए। एक सूत्र का कहना है कि ईरान अब भी पूरे क्षेत्र में गंभीर नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

ड्रोन ताकत भी काफी हद तक बची हुई है। अनुमान है कि ईरान की लगभग आधी ड्रोन क्षमता अब भी सक्रिय है। इसके अलावा तटीय रक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली क्रूज मिसाइलें भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जो होर्मुज में जहाजों के लिए खतरा बनी हुई हैं।

यह तस्वीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके प्रशासन के दावों से अलग है। ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी हद तक खत्म कर दी गई है और उसके हथियार उत्पादन ठिकाने तबाह कर दिए गए हैं।

9 मार्च 2026 को जारी एक वीडियो का स्क्रीनशॉट है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि यह ईरान का मिसाइल लॉन्चर था और इसी जगह पर अमेरिका ने हमला किया था।

9 मार्च 2026 को जारी एक वीडियो का स्क्रीनशॉट है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि यह ईरान का मिसाइल लॉन्चर था और इसी जगह पर अमेरिका ने हमला किया था।

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सरकार का दावा है कि ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है, दो-तिहाई सैन्य उत्पादन क्षमता नष्ट हो गई है और अमेरिका तथा इजराइल को हवाई बढ़त हासिल है।

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा है कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है।

हालांकि जमीनी स्थिति इससे अलग संकेत देती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार 12,300 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद ईरान की क्षमताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं।

इजराइल का अनुमान है कि केवल 20 से 25 प्रतिशत लॉन्चर सक्रिय हैं, हालांकि इसमें वे सिस्टम शामिल नहीं हैं जो सुरंगों और गुफाओं में छिपे हुए हैं।

ईरान की रणनीति का अहम हिस्सा उसके भूमिगत ठिकाने हैं। उसने मिसाइल और लॉन्च सिस्टम को सुरंगों और गुफाओं में छिपाकर रखा है, जिससे उन्हें ढूंढना और नष्ट करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा मोबाइल लॉन्चर तेजी से जगह बदलते हैं, जिससे उन पर निशाना साधना और भी कठिन हो जाता है।

ईरान ने शुक्रवार रात इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल अटैक किए।

ईरान ने शुक्रवार रात इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल अटैक किए।

जमीन और सुरंगों के नीचे छिपे ईरानी हथियार

अमेरिका और इजराइल अब इन ठिकानों के एंट्री पॉइंट और उन्हें फिर से चालू करने वाले उपकरणों को निशाना बना रहे हैं। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियां अब तक यह तय नहीं कर पाई हैं कि ईरान की मिसाइल क्षमता को कितना नुकसान पहुंचाया जा चुका है और कितने लॉन्चर अब भी बचे हैं।

अधिकारियों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी इतनी बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्च सिस्टम मौजूद हैं कि वह इजराइल और क्षेत्र के अन्य ठिकानों पर हमला कर सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित करना भी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि तटीय मिसाइल क्षमता खत्म नहीं हुई है और संभव है कि यह भी भूमिगत ठिकानों में छिपी हो।

जहां ईरान की नियमित नौसेना को नुकसान हुआ है, वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड की समुद्री ताकत अब भी काफी हद तक बची हुई है। उसके पास सैकड़ों छोटी नावें और बिना चालक वाली नौकाएं हैं, जिनका इस्तेमाल समुद्री रास्तों को बाधित करने में किया जा सकता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उसके पास अभी भी ड्रोन, मिसाइल और सहयोगी नेटवर्क जैसी क्षमताएं मौजूद हैं, जिससे वह जवाबी कार्रवाई जारी रख सकता है।

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23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट:ट्रम्प का ईरानी आसमान पर कब्जे का दावा गलत; अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह

ईरान जंग के एक महीने बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। 19 मिनट के भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और उनके पास जवाब देने की क्षमता नहीं बची है।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर कब्जा हो चुका है। उनके विमान तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर पा रहा है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ऐसे ही दावे किए। लेकिन हालात अब अलग कहानी बता रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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