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Interesting Facts: नाक और लिप्स के बीच वाले हिस्से को क्या कहते हैं? कर लीजिए अपनी परीक्षा

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Name of area between Nose and lips: हमारा शरीर ईश्वर का दिया हुआ अनमोल वरदान है. इस शरीर में इतने तंत्र हैं और इतनी कारीगरी है कि विज्ञान भी कभी-कभी भौचक रह जाता है. आमतौर पर हम अपने शरीर के हर हिस्से के बारे में जानते हैं, उनका नाम भी जानते हैं. इसके बावजूद शरीर के कई ऐसे हिस्से हैं जिनके बारे में आम लोगों को पता नहीं होता. जैसे नाक और होंठ के बीच के हिस्से को क्या आप जानते हैं. मुश्किल से ही कोई-कोई जानता होगा. आइए हम बताते हैं.

हम रोज आईने में हम अपना चेहरा देखते हैं लेकिन चेहरे की कुछ बारीक हिस्सों के बारे में हम शायद ही जानते होंगे. कम से कम इसका नाम तो शायद ही किसी को पता है. डॉक्टर ही इसे जानते होंगे. ऐसे में क्या कभी आपने कभी सोचा है कि आपकी नाक के ठीक नीचे और ऊपरी होंठ के बीच का जो हिस्सा होता है, उसे क्या कहते हैं. आम बोलचाल की भाषा में इसे क्या कहते हैं और उसे वैज्ञानिक भाषा में क्या कहते हैं? यह हिस्सा न केवल हमारे चेहरे को एक खास शेप देता है, बल्कि इसके होने के पीछे जीव विज्ञान और भ्रूण के विकास का एक अद्भुत रहस्य छिपा है.

हमारे शरीर का हर अंग अपना-अपना काम करता है. चेहरे पर आंखें, नाक, कान और माथा जैसे कई अंग होते हैं. इनमें से प्रत्येक का अपना नाम है. अब सोशल मीडिया पर यह सवाल खूब वायरल हो रहा है कि नाक और होंठ के बीच के हिस्से को क्या कहते हैं? कोई कुछ कहता है तो कोई कुछ लिख रहा है. लेकिन वास्तव में इस हिस्से को क्या कहते हैं? आइए जानते हैं कि यह हिस्सा इतना गहरा क्यों होता है और इसका क्या काम है.

ज्यादातर लोग इसे बस नाक के नीचे का हिस्सा कहकर टाल देते हैं लेकिन शरीर विज्ञान में इसे फिल्ट्रम (Philtrum) कहा जाता है. प्राचीन मान्यताओं से लेकर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तक, इस छोटे से हिस्से को लेकर कई दिलचस्प थ्योरी मौजूद हैं. क्या आप जानते हैं कि मां के गर्भ में चेहरा बनते समय यह हिस्सा कैसे आकार लेता है? और अगर यह हिस्सा न हो, तो चेहरे पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है? आइए इसके सीक्रेट के बारे में जानते हैं.

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जैसा कि पहले बताया गया है, फिल्ट्रम का आकार हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है. लोगों ने इसे सुंदरता का मापदंड बना दिया है. लेकिन वास्तव में गर्भ के अंदर चेहरे के दाएं और बाएं हिस्से जिस जगह पर आपस में जुड़ते हैं, वहां यह फिल्ट्रम बनता है.

एफडीए की वेबसाइट के अनुसार, जिन लोगों के ऊपरी होंठ का निचला हिस्सा (फिलट्रम) गहरा या लंबा होता है, उन्हें कोई दुर्लभ बीमारी या आनुवंशिक सिंड्रोम हो सकता है. इस ऊपरी होंठ के निचले हिस्से का आकार माता-पिता के ऊपरी होंठ के निचले हिस्से के आकार पर निर्भर करता है.

अक्सर यह सवाल उठता है कि चेहरे का फिलट्रम बाकी त्वचा की तरह सीधा क्यों नहीं होता और उसमें गहराई क्यों होती है. दरअसल, जब चेहरे की त्वचा इस हिस्से पर मुड़ती है, तो यह अतिरिक्त त्वचा ऊपरी होंठ और मांसपेशियों को हिलाने में मदद करती है, जिससे व्यक्ति बोल पाता है. अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसारॉ फिलट्रम की त्वचा मुख की गति, यानी ऊपरी होंठ की गति में मदद करती है. यानी इसी के कारण हम अपने चेहरे में मूवमेंट या भाव-भंगिमा प्रदर्शित करते हैं.

फिल्ट्रम जेनेटिक स्थितियों की पहचान का जरिया भी है. कुछ खास जेनेटिक स्थितियों की पहचान इसी हिस्से की बनावट को देखकर की जाती है. फिल्ट्रम शब्द ग्रीक शब्द फिलट्रोन से आया है, जिसका प्राचीन अर्थ प्यार का जादू या चूमने की जगह से जोड़ा जाता था. वास्तव में यह एरिया किसी व्यक्ति की सुंदरता में चार चांद लगाने में बहुत मायने रखता है.

इसके बारे में एक और फेक्ट है. फिल्ट्रम के नीचें होंठों पर कभी पसीना नहीं आता. इसका कारण यह है कि पसीना उत्पन्न करने वाली ग्रंथियां होंठों पर नहीं होतीं. यही एक प्रमुख कारण है कि गर्म या ठंडे वातावरण में होंठ जल्दी सूख जाते हैं. (डिस्क्लेमर : यहां दी गई जानकारी सोशल मीडिया और खबरों पर आधारित है. न्यूज़18 हिन्दी किसी भी दावे की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.

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हम रोज आईने में हम अपना चेहरा देखते हैं लेकिन चेहरे की कुछ बारीक हिस्सों के बारे में हम शायद ही जानते होंगे. कम से कम इसका नाम तो शायद ही किसी को पता है. डॉक्टर ही इसे जानते होंगे. ऐसे में क्या कभी आपने कभी सोचा है कि आपकी नाक के ठीक नीचे और ऊपरी होंठ के बीच का जो हिस्सा होता है, उसे क्या कहते हैं. आम बोलचाल की भाषा में इसे क्या कहते हैं और उसे वैज्ञानिक भाषा में क्या कहते हैं? यह हिस्सा न केवल हमारे चेहरे को एक खास शेप देता है, बल्कि इसके होने के पीछे जीव विज्ञान और भ्रूण के विकास का एक अद्भुत रहस्य छिपा है.

हमारे शरीर का हर अंग अपना-अपना काम करता है. चेहरे पर आंखें, नाक, कान और माथा जैसे कई अंग होते हैं. इनमें से प्रत्येक का अपना नाम है. अब सोशल मीडिया पर यह सवाल खूब वायरल हो रहा है कि नाक और होंठ के बीच के हिस्से को क्या कहते हैं? कोई कुछ कहता है तो कोई कुछ लिख रहा है. लेकिन वास्तव में इस हिस्से को क्या कहते हैं? आइए जानते हैं कि यह हिस्सा इतना गहरा क्यों होता है और इसका क्या काम है.

ज्यादातर लोग इसे बस नाक के नीचे का हिस्सा कहकर टाल देते हैं लेकिन शरीर विज्ञान में इसे फिल्ट्रम (Philtrum) कहा जाता है. प्राचीन मान्यताओं से लेकर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तक, इस छोटे से हिस्से को लेकर कई दिलचस्प थ्योरी मौजूद हैं. क्या आप जानते हैं कि मां के गर्भ में चेहरा बनते समय यह हिस्सा कैसे आकार लेता है? और अगर यह हिस्सा न हो, तो चेहरे पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है? आइए इसके सीक्रेट के बारे में जानते हैं.

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जैसा कि पहले बताया गया है, फिल्ट्रम का आकार हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है. लोगों ने इसे सुंदरता का मापदंड बना दिया है. लेकिन वास्तव में गर्भ के अंदर चेहरे के दाएं और बाएं हिस्से जिस जगह पर आपस में जुड़ते हैं, वहां यह फिल्ट्रम बनता है.

एफडीए की वेबसाइट के अनुसार, जिन लोगों के ऊपरी होंठ का निचला हिस्सा (फिलट्रम) गहरा या लंबा होता है, उन्हें कोई दुर्लभ बीमारी या आनुवंशिक सिंड्रोम हो सकता है. इस ऊपरी होंठ के निचले हिस्से का आकार माता-पिता के ऊपरी होंठ के निचले हिस्से के आकार पर निर्भर करता है.

अक्सर यह सवाल उठता है कि चेहरे का फिलट्रम बाकी त्वचा की तरह सीधा क्यों नहीं होता और उसमें गहराई क्यों होती है. दरअसल, जब चेहरे की त्वचा इस हिस्से पर मुड़ती है, तो यह अतिरिक्त त्वचा ऊपरी होंठ और मांसपेशियों को हिलाने में मदद करती है, जिससे व्यक्ति बोल पाता है. अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसारॉ फिलट्रम की त्वचा मुख की गति, यानी ऊपरी होंठ की गति में मदद करती है. यानी इसी के कारण हम अपने चेहरे में मूवमेंट या भाव-भंगिमा प्रदर्शित करते हैं.

फिल्ट्रम जेनेटिक स्थितियों की पहचान का जरिया भी है. कुछ खास जेनेटिक स्थितियों की पहचान इसी हिस्से की बनावट को देखकर की जाती है. फिल्ट्रम शब्द ग्रीक शब्द फिलट्रोन से आया है, जिसका प्राचीन अर्थ प्यार का जादू या चूमने की जगह से जोड़ा जाता था. वास्तव में यह एरिया किसी व्यक्ति की सुंदरता में चार चांद लगाने में बहुत मायने रखता है.

इसके बारे में एक और फेक्ट है. फिल्ट्रम के नीचें होंठों पर कभी पसीना नहीं आता. इसका कारण यह है कि पसीना उत्पन्न करने वाली ग्रंथियां होंठों पर नहीं होतीं. यही एक प्रमुख कारण है कि गर्म या ठंडे वातावरण में होंठ जल्दी सूख जाते हैं. (डिस्क्लेमर : यहां दी गई जानकारी सोशल मीडिया और खबरों पर आधारित है. न्यूज़18 हिन्दी किसी भी दावे की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.

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