महाराष्ट्र की सभ्यता में बारामती एक बार फिर भावनाओं और रणनीति के केंद्र में आ गई है। कांग्रेस नेतृत्व से एक अहम और प्रेरक अपील की है। उन्होंने मांग की है कि बारामती में चुनाव निर्विरोध मनाया जाए।
अजित राइटर के असामयिक निधन ने न केवल उनके निधन को बताया, बल्कि पूरे राजनीतिक वर्ग को झकझोर दिया है। इसी संदर्भ में सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “अजित राव के असामयिक निधन के बाद बारामती सीट पर विधानसभा होनी है।”
उन्होंने आगे अपने राजनीतिक जीवन को याद करते हुए कहा, “अजित दादा की राजनीतिक यात्रा कांग्रेस पार्टी से हुई थी और अपने पूरे इतिहास में उन्होंने अपने साथियों के साथ लंबे समय तक संबंध बनाए रखा।”
सुप्रिया सुले की अपील का सबसे अहम हिस्सा वह उपदेश संदेश है, जो सीधे तौर पर राजनीतिक आश्रम की अपील को चुनौती देता है। उन्होंने लिखा, “इस शोक और स्मरण के क्षण में, बारामती में निर्विरोध चुनाव उनकी सार्वजनिक सेवा और समावेशी राजनीति की विरासत को एक गरिमा और सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
और अंत में कांग्रेस ने सीधे तौर पर आग्रह किया, “मैं कांग्रेस नेतृत्व से ईमानदारी से अपील करता हूं कि वे एकता और एकता की भावना का सम्मान करें और इस पर सबसे पहले विचार करें।”
23 अप्रैल को वाले वाले में अब तक कुल 53 को नामांकन मिला है, जिसमें सुनेत्रा अभिनेत्री और कांग्रेस के आकाश मोरे शामिल हैं। नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 9 अप्रैल है, जिससे पहले राजनीतिक जोड़-तोड़ और तेज होने के संकेत हैं।
(टैग्सटूट्रांसलेट)बारामती(टी)सुप्रिया सुले(टी)सुप्रिया सुले(टी)बारामती स्मारक















































