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बार-बार चश्मे का बदल रहा नंबर? चेतावनी को न करें नजरअंदाज, हमेशा के लिए जा सकती है रोशनी

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Symptoms of Cataracts: नजर धुंधली होने लगे या बार-बार चश्मे का नंबर बदलने लगे तो इसे नजरअंदाज न करें. आंखों की ये समस्या मोतियाबिंद का लक्षण हो सकती हैं. समय रहते ध्यान देने और सही उपाय अपनाने से इससे राहत पाया जा सकता है.

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आज के इस डिजिटल यूग में आंखों से जुड़ी समस्याएं बहुत कॉमन होती जा रही है. लगातार स्क्रिन को देखते रहने से कम उम्र में ही आंखों पर मोटे चश्मे चढ़ रहे हैं. नजर धुंधली हो रही है. ऐसी बीमारियां जो कि आज से पहले तक सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित थी अब जवानों में भी होने लगी है. मोतियाबिंद ऐसी ही आंख से जुड़ी समस्या है.

नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, मोतियाबिंद आजकल एक आम बीमारी बन चुकी है. इसमें आंख के लेंस पर धुंधलापन आ जाता है, जिससे साफ देखना मुश्किल हो जाता है. यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो नजर और कमजोर हो सकती है. अच्छी बात यह है कि आज के समय में मोतियाबिंद का ऑपरेशन काफी सुरक्षित और आसान हो गया है. ज्यादातर मामलों में ऑपरेशन के बाद मरीज की नजर फिर से साफ हो जाती है और वह सामान्य रूप से देख पाता है.

मोतियाबिंद के कुछ आम लक्षण
धुंधला या धुएं जैसा दिखना, रोशनी के आसपास चमक या हलो नजर आना, रात में देखने में परेशानी, पढ़ने या छोटे अक्षर पहचानने में दिक्कत, रंग फीके या पीले दिखाई देना और बार-बार चश्मे का नंबर बदलना. ये लक्षण आमतौर पर 60 साल से ऊपर के लोगों में ज्यादा दिखते हैं, लेकिन कभी-कभी युवाओं में भी यह समस्या हो सकती है. अगर किसी बुजुर्ग की नजर धीरे-धीरे कमजोर हो रही है, तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.

मोतियाबिंद का ऑपरेशन कैसे होता है
डॉक्टर बताते हैं कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन एक छोटी और आसान प्रक्रिया है. इसमें आंख की धुंधली लेंस को हटाकर उसकी जगह एक कृत्रिम लेंस लगाया जाता है. यह ऑपरेशन लगभग 15–20 मिनट में पूरा हो जाता है और मरीज उसी दिन घर भी जा सकता है. इसमें दर्द बहुत कम होता है और जल्दी रिकवरी हो जाती है.

समय पर इलाज जरूरी
अगर समय पर इलाज नहीं कराया गया, तो मोतियाबिंद बढ़ सकता है और आंखों की रोशनी पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसलिए धुंधली नजर को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या से बचाव के लिए नियमित आंखों की जांच बहुत जरूरी है. 50 साल की उम्र के बाद हर साल कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए. इसके अलावा, संतुलित आहार लेना, हरी सब्जियां और फल खाना और तेज धूप से आंखों को बचाना भी आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है.

About the Author

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, मोतियाबिंद आजकल एक आम बीमारी बन चुकी है. इसमें आंख के लेंस पर धुंधलापन आ जाता है, जिससे साफ देखना मुश्किल हो जाता है. यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो नजर और कमजोर हो सकती है. अच्छी बात यह है कि आज के समय में मोतियाबिंद का ऑपरेशन काफी सुरक्षित और आसान हो गया है. ज्यादातर मामलों में ऑपरेशन के बाद मरीज की नजर फिर से साफ हो जाती है और वह सामान्य रूप से देख पाता है.

मोतियाबिंद के कुछ आम लक्षण
धुंधला या धुएं जैसा दिखना, रोशनी के आसपास चमक या हलो नजर आना, रात में देखने में परेशानी, पढ़ने या छोटे अक्षर पहचानने में दिक्कत, रंग फीके या पीले दिखाई देना और बार-बार चश्मे का नंबर बदलना. ये लक्षण आमतौर पर 60 साल से ऊपर के लोगों में ज्यादा दिखते हैं, लेकिन कभी-कभी युवाओं में भी यह समस्या हो सकती है. अगर किसी बुजुर्ग की नजर धीरे-धीरे कमजोर हो रही है, तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.

मोतियाबिंद का ऑपरेशन कैसे होता है
डॉक्टर बताते हैं कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन एक छोटी और आसान प्रक्रिया है. इसमें आंख की धुंधली लेंस को हटाकर उसकी जगह एक कृत्रिम लेंस लगाया जाता है. यह ऑपरेशन लगभग 15–20 मिनट में पूरा हो जाता है और मरीज उसी दिन घर भी जा सकता है. इसमें दर्द बहुत कम होता है और जल्दी रिकवरी हो जाती है.

समय पर इलाज जरूरी
अगर समय पर इलाज नहीं कराया गया, तो मोतियाबिंद बढ़ सकता है और आंखों की रोशनी पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसलिए धुंधली नजर को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या से बचाव के लिए नियमित आंखों की जांच बहुत जरूरी है. 50 साल की उम्र के बाद हर साल कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए. इसके अलावा, संतुलित आहार लेना, हरी सब्जियां और फल खाना और तेज धूप से आंखों को बचाना भी आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है.

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