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स्मार्टफोन की लत दिमाग को बना रहा 10 साल बूढ़ा? ‘डिजिटल डिटॉक्स’ से ब्रेन हेल्‍थ को ऐसे करें रीवर्स, रिसर्च में बड़ा खुलासा

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Social media addiction and brain health : शोधकर्ताओं ने पाया कि स्मार्टफोन से दूरी बनाने पर दिमाग की एकाग्रता (Attention) में इतना सुधार हुआ, जो उम्र के साथ आने वाली 10 साल की गिरावट को मिटाने के बराबर था. यानी, सिर्फ 14 दिन का संयम आपके दिमाग को 10 साल तक जवां बना सकता है.

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न्यू मैक्सिको में भी कोर्ट ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के लिए मेटा पर भारी जुर्माना लगाया है.

Impact of social media on memory and attention :क्या आपकी सुबह फोन की स्क्रीन से शुरू होती है और रात उसी नीली रोशनी के साथ खत्म हो जाती है? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं. रिसर्च बताती है कि एक औसत इंसान दिन के 4 से 5 घंटे सिर्फ फोन पर बिता रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह लत आपके दिमाग को समय से पहले बूढ़ा बना रही है? विज्ञान का दावा है कि सोशल मीडिया की यह आदत आपके दिमाग को 10 साल तक पीछे धकेल सकती है. राहत की बात यह है कि इसे ‘रिवर्स’ यानी ठीक करना भी आपके ही हाथ में है.

दुनियाभर की कोर्ट ले रही ऐतिहासिक फैसले
सोशल मीडिया का जाल अब इतना गहरा हो गया है कि इसे लेकर दुनिया भर की अदालतें सख्त हो गई हैं. पिछले महीने कैलिफोर्निया में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया, जहाँ टेक दिग्गज मेटा और यूट्यूब को एक युवती को करीब 50 करोड़ रुपये ($6 मिलियन) हर्जाना देने का आदेश मिला. वजह? वह इन प्लेटफॉर्म्स की इतनी बुरी तरह आदी हो गई थी कि उसका मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह बिगड़ गया. न्यू मैक्सिको में भी कोर्ट ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के लिए मेटा पर भारी जुर्माना लगाया है. ये फैसले साफ बताते हैं कि अब पानी सिर के ऊपर से गुजर चुका है.

क्या है डिजिटल डिटॉक्स, जो लौटाएगा दिमाग की जवानी?
‘PNAS नेक्सस’ द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन में 467 लोगों पर रिसर्च की गई. इन लोगों ने सिर्फ दो हफ्ते के लिए अपने फोन से इंटरनेट का नाता तोड़ दिया. नतीजे चौंकाने वाले थे! शोधकर्ताओं ने पाया कि स्मार्टफोन से दूरी बनाने पर दिमाग की एकाग्रता (Attention) में इतना सुधार हुआ, जो उम्र के साथ आने वाली 10 साल की गिरावट को मिटाने के बराबर था. यानी, सिर्फ 14 दिन का संयम आपके दिमाग को 10 साल तक जवां बना सकता है.

फोन और कंप्यूटर के इस्तेमाल में बड़ा फर्क
अध्ययन में एक दिलचस्प बात सामने आई. शोधकर्ताओं का मानना है कि हम कंप्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल किसी काम के लिए करते हैं, लेकिन फोन का इस्तेमाल “मजबूरी और बिना सोचे-समझे” (Mindless scrolling) होता है. यही वह आदत है जो हमारे डिनर, वॉक और परिवार के साथ बिताए जाने वाले सुकून के पलों को छीन रही है. जब प्रतिभागियों ने फोन का इंटरनेट बंद किया, तो उनका ऑनलाइन समय 314 मिनट से घटकर महज 161 मिनट रह गया.

मूड और नींद में जबरदस्त सुधार
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक और स्टडी बताती है कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम करने से केवल एक हफ्ते के भीतर चिंता (Anxiety), अवसाद (Depression) और अनिद्रा (Insomnia) जैसी समस्याओं में बड़ी गिरावट आती है. अगर आप रात भर करवटें बदलते हैं या बिना वजह तनाव महसूस करते हैं, तो शायद इसकी जड़ आपके हाथ में मौजूद वह छोटा सा गैजेट ही है.

बच्चों पर मंडराता खतरा और कड़े कानून
सोशल मीडिया के खतरों को देखते हुए अब कई देश सख्त कानून बना रहे हैं. अमेरिका के मैसाचुसेट्स में 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की तैयारी है, वहीं इंडोनेशिया ने 16 साल से कम उम्र वालों पर इसे प्रतिबंधित कर दिया है. वैज्ञानिक अब उन लोगों की पहचान कर रहे हैं जो दूसरों से अपनी तुलना करके दुखी होते हैं या अकेलेपन को दूर करने के लिए घंटों रील स्क्रॉल करते हैं.

कैसे करें शुरुआत? एक्सपर्ट की सलाह
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कोस्टाडिन कुश्लेव का कहना है कि आपको हमेशा के लिए फोन छोड़ने की जरूरत नहीं है. बस कुछ दिनों का ‘आंशिक डिटॉक्स’ (Partial Detox) भी जादू की तरह काम करता है. सप्ताह में एक दिन ‘नो फोन डे’ रखें या सोने से 2 घंटे पहले फोन को खुद से दूर कर दें. आपका दिमाग खुद-ब-खुद हील होने लगेगा.

डिजिटल दुनिया की चकाचौंध में हम अपनी दिमागी शांति खो रहे हैं. विज्ञान ने रास्ता दिखा दिया है- फैसला अब आपका है कि आप फोन को खुद पर हावी होने देंगे या अपने दिमाग की सेहत को चुनेंगे. (यह लेख पीनास नेक्सस (PNAS Nexus), हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की स्टडी और द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पर आधारित है.)

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Pranaty Tiwary

मैंने लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमन से अपनी ग्रेजुएशन और मिरांडा हाउस से मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता करियर की शुरुआत दूरदर्शन(2009) से की, जिसके बाद दैनिक भास्कर सहित कई प्रमुख अख़बारों में मेनस्ट्र…और पढ़ें

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सोशल मीडिया का जाल अब इतना गहरा हो गया है कि इसे लेकर दुनिया भर की अदालतें सख्त हो गई हैं. पिछले महीने कैलिफोर्निया में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया, जहाँ टेक दिग्गज मेटा और यूट्यूब को एक युवती को करीब 50 करोड़ रुपये ($6 मिलियन) हर्जाना देने का आदेश मिला. वजह? वह इन प्लेटफॉर्म्स की इतनी बुरी तरह आदी हो गई थी कि उसका मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह बिगड़ गया. न्यू मैक्सिको में भी कोर्ट ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के लिए मेटा पर भारी जुर्माना लगाया है. ये फैसले साफ बताते हैं कि अब पानी सिर के ऊपर से गुजर चुका है.

क्या है डिजिटल डिटॉक्स, जो लौटाएगा दिमाग की जवानी?
‘PNAS नेक्सस’ द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन में 467 लोगों पर रिसर्च की गई. इन लोगों ने सिर्फ दो हफ्ते के लिए अपने फोन से इंटरनेट का नाता तोड़ दिया. नतीजे चौंकाने वाले थे! शोधकर्ताओं ने पाया कि स्मार्टफोन से दूरी बनाने पर दिमाग की एकाग्रता (Attention) में इतना सुधार हुआ, जो उम्र के साथ आने वाली 10 साल की गिरावट को मिटाने के बराबर था. यानी, सिर्फ 14 दिन का संयम आपके दिमाग को 10 साल तक जवां बना सकता है.

फोन और कंप्यूटर के इस्तेमाल में बड़ा फर्क
अध्ययन में एक दिलचस्प बात सामने आई. शोधकर्ताओं का मानना है कि हम कंप्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल किसी काम के लिए करते हैं, लेकिन फोन का इस्तेमाल “मजबूरी और बिना सोचे-समझे” (Mindless scrolling) होता है. यही वह आदत है जो हमारे डिनर, वॉक और परिवार के साथ बिताए जाने वाले सुकून के पलों को छीन रही है. जब प्रतिभागियों ने फोन का इंटरनेट बंद किया, तो उनका ऑनलाइन समय 314 मिनट से घटकर महज 161 मिनट रह गया.

मूड और नींद में जबरदस्त सुधार
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक और स्टडी बताती है कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम करने से केवल एक हफ्ते के भीतर चिंता (Anxiety), अवसाद (Depression) और अनिद्रा (Insomnia) जैसी समस्याओं में बड़ी गिरावट आती है. अगर आप रात भर करवटें बदलते हैं या बिना वजह तनाव महसूस करते हैं, तो शायद इसकी जड़ आपके हाथ में मौजूद वह छोटा सा गैजेट ही है.

बच्चों पर मंडराता खतरा और कड़े कानून
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कैसे करें शुरुआत? एक्सपर्ट की सलाह
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कोस्टाडिन कुश्लेव का कहना है कि आपको हमेशा के लिए फोन छोड़ने की जरूरत नहीं है. बस कुछ दिनों का ‘आंशिक डिटॉक्स’ (Partial Detox) भी जादू की तरह काम करता है. सप्ताह में एक दिन ‘नो फोन डे’ रखें या सोने से 2 घंटे पहले फोन को खुद से दूर कर दें. आपका दिमाग खुद-ब-खुद हील होने लगेगा.

डिजिटल दुनिया की चकाचौंध में हम अपनी दिमागी शांति खो रहे हैं. विज्ञान ने रास्ता दिखा दिया है- फैसला अब आपका है कि आप फोन को खुद पर हावी होने देंगे या अपने दिमाग की सेहत को चुनेंगे. (यह लेख पीनास नेक्सस (PNAS Nexus), हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की स्टडी और द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पर आधारित है.)

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