Saturday, 11 Apr 2026 | 11:51 PM

Trending :

EXCLUSIVE

लू से बचाएगा विंध्य का सत्तू! चीनी के साथ देसी स्वाद, भुना चना-गेहूं की सीक्रेट रेसिपी

authorimg

Last Updated:

Sidhi News: प्रियंका सिंह ने कहा कि साफ किए गए चनों में गेहूं और थोड़ा जौ मिलाया जाता है, जिससे सत्तू का आटा चिकना हो जाता है. इसके बाद इसे चक्की में पिसवाकर तैयार किया जाता है. सत्तू को लोग नाश्ते में गुड़ या चीनी के साथ खाते हैं.

सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में जैसे ही गर्मी शुरू होती है, घरों की रसोई का स्वाद भी थोड़ा बदल जाता है. तेज धूप और लू से बचने के लिए लोग अपने खाने में ऐसे डिश शामिल करने लगते हैं, जो शरीर को ठंडक दें और पेट के लिए भी हल्के हों. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में सत्तू पसंद किया जाता है, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में सेतुआ बोलते हैं. स्वाद में मीठा, ठंडक देने वाला और झटपट बनने वाला यह सत्तू गर्मियों में लगभग हर घर की थाली में दिखाई देता है. विंध्य क्षेत्र में सत्तू को शक्कर (चीनी) या गुड़ के साथ मिलाकर खाया जाता है. सीधी निवासी प्रियंका सिंह ने लोकल 18 को बताया कि विंध्य क्षेत्र में हर साल गर्मी के मौसम में सत्तू खाने की परंपरा रही है. जैसे ही खेतों में कटाई, बिनाई और मड़ाई का काम शुरू होता है, लोग पुराने चने निकालकर सत्तू बनाने की तैयारी में जुट जाते हैं. सबसे पहले चने को रातभर पानी में भिगोया जाता है, जिससे वे फूल जाते हैं. इसके बाद उन्हें धूप में हल्का सुखाया जाता है और फिर कड़ाही में भून लिया जाता है. भूनने के बाद चनों को चकरी में दरकर उसकी भूसी अलग की जाती है.

प्रियंका ने आगे बताया कि साफ किए गए चनों में गेहूं और थोड़ा जौ मिलाया जाता है, जिससे सत्तू का आटा चिकना बनता है. इसके बाद इसे चक्की में पिसवाकर तैयार किया जाता है. तैयार सत्तू को लोग सुबह नाश्ते में गुड़ या चीनी के साथ खाते हैं. खास बात यह है कि गर्मी के मौसम में होने वाले शादी-विवाह में भी सुबह के नाश्ते में सत्तू का विशेष महत्व रहता है.

बुजुर्गों का खानपान भी सत्तू पर आधारित
गांवों में बुजुर्गों का खानपान भी सत्तू पर आधारित रहा है. वे महुआ और चना, महुआ और सत्तू या चना-गुड़ का सेवन करते थे और स्वस्थ रहते थे. हालांकि बदलते समय के साथ इसका चलन कुछ कम हुआ है लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्रों, खासकर किसानों के घरों में सत्तू का उपयोग आम है. सत्तू को गर्मी से बचाव का वरदान माना जाता है. यह बघेलखंड क्षेत्र का पारंपरिक आहार है, जो पोषण और ताजगी का बेहतरीन स्रोत है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ उसे स्वस्थ बनाए रखते हैं.

बनाने और खाने के तरीके अलग-अलग
उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी सत्तू का सेवन किया जाता है. हालांकि बनाने और खाने के तरीके अलग-अलग हैं. बघेलखंड में खासकर सीधी जिले में सत्तू को घोलकर या हल्का गाढ़ा सानकर चीनी या गुड़ के साथ खाया जाता है. इसके अलावा सत्तू का शरबत, लड्डू, पराठा और पूरी भी बनाई जाती है. गर्मियों में इसका शरबत प्यास बुझाने और शरीर को ठंडा रखने का एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
रैपर फ्लिपराची का भारत दौरा कैंसिल:मिडिल ईस्ट के तनाव की वजह से बेंगलुरु-मुंबई के शोज टले, धुरंधर के मेकर्स को नुकसान

March 12, 2026/
10:30 am

ब्लॉकबस्टर फिल्म धुरंधर के गाने ‘फासला’ (Fa9la) से भारत में फेमस हुए बहरीन के रैपर फ्लिपराची ने अपने शो कैंसिल...

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: '25 दिन में गैस हो तो खाना कैसे बंद होगा', सीएम ममता बनर्जी का एलपीजी को लेकर सरकार पर तंज वार

March 26, 2026/
7:57 pm

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़रूम द्वारा सत्यापित पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव 2026 से...

मुरैना जिला अस्पताल में फायरिंग का VIDEO:प्रसूता को ले जाने के लिए भिड़े 2 निजी अस्पतालों के एजेंट; केस दर्ज करने शिकायत का इंतजार

March 18, 2026/
10:36 am

मुरैना जिला अस्पताल के नवीन प्रसूति गृह के बाहर 15 मार्च की रात कैलारस से आई एक प्रसूता को अपने-अपने...

बालों की देखभाल के टिप्स: रूखे और बेजान बालों से आसानी से पाएं बाहर, स्प्लिट एंड्स से छुटकारा पाएं ये असरदार तरीके

March 18, 2026/
6:41 pm

बालों की देखभाल संबंधी युक्तियाँ: बालों की खूबसूरती बनाए रखना आज के समय में किसी भी चुनौती से कम नहीं...

Vivek Agnihotri Praises Dhurandhar 2, Warns Aditya Dhar

March 30, 2026/
8:54 pm

1 घंटे पहले कॉपी लिंक द कश्मीर फाइल्स फेम डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर 2 की तारीफ...

Pakistan vs New Zealand Live Cricket Score: PAK vs NZ T20 World Cup 2026 Match Scorecard Latest Updates Today (Picture Credit: AFP, AP)

February 17, 2026/
3:13 pm

आखरी अपडेट:फ़रवरी 17, 2026, 15:13 IST रवीन्द्र जयसवाल ने वाराणसी में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता...

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

लू से बचाएगा विंध्य का सत्तू! चीनी के साथ देसी स्वाद, भुना चना-गेहूं की सीक्रेट रेसिपी

authorimg

Last Updated:

Sidhi News: प्रियंका सिंह ने कहा कि साफ किए गए चनों में गेहूं और थोड़ा जौ मिलाया जाता है, जिससे सत्तू का आटा चिकना हो जाता है. इसके बाद इसे चक्की में पिसवाकर तैयार किया जाता है. सत्तू को लोग नाश्ते में गुड़ या चीनी के साथ खाते हैं.

सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में जैसे ही गर्मी शुरू होती है, घरों की रसोई का स्वाद भी थोड़ा बदल जाता है. तेज धूप और लू से बचने के लिए लोग अपने खाने में ऐसे डिश शामिल करने लगते हैं, जो शरीर को ठंडक दें और पेट के लिए भी हल्के हों. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में सत्तू पसंद किया जाता है, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में सेतुआ बोलते हैं. स्वाद में मीठा, ठंडक देने वाला और झटपट बनने वाला यह सत्तू गर्मियों में लगभग हर घर की थाली में दिखाई देता है. विंध्य क्षेत्र में सत्तू को शक्कर (चीनी) या गुड़ के साथ मिलाकर खाया जाता है. सीधी निवासी प्रियंका सिंह ने लोकल 18 को बताया कि विंध्य क्षेत्र में हर साल गर्मी के मौसम में सत्तू खाने की परंपरा रही है. जैसे ही खेतों में कटाई, बिनाई और मड़ाई का काम शुरू होता है, लोग पुराने चने निकालकर सत्तू बनाने की तैयारी में जुट जाते हैं. सबसे पहले चने को रातभर पानी में भिगोया जाता है, जिससे वे फूल जाते हैं. इसके बाद उन्हें धूप में हल्का सुखाया जाता है और फिर कड़ाही में भून लिया जाता है. भूनने के बाद चनों को चकरी में दरकर उसकी भूसी अलग की जाती है.

प्रियंका ने आगे बताया कि साफ किए गए चनों में गेहूं और थोड़ा जौ मिलाया जाता है, जिससे सत्तू का आटा चिकना बनता है. इसके बाद इसे चक्की में पिसवाकर तैयार किया जाता है. तैयार सत्तू को लोग सुबह नाश्ते में गुड़ या चीनी के साथ खाते हैं. खास बात यह है कि गर्मी के मौसम में होने वाले शादी-विवाह में भी सुबह के नाश्ते में सत्तू का विशेष महत्व रहता है.

बुजुर्गों का खानपान भी सत्तू पर आधारित
गांवों में बुजुर्गों का खानपान भी सत्तू पर आधारित रहा है. वे महुआ और चना, महुआ और सत्तू या चना-गुड़ का सेवन करते थे और स्वस्थ रहते थे. हालांकि बदलते समय के साथ इसका चलन कुछ कम हुआ है लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्रों, खासकर किसानों के घरों में सत्तू का उपयोग आम है. सत्तू को गर्मी से बचाव का वरदान माना जाता है. यह बघेलखंड क्षेत्र का पारंपरिक आहार है, जो पोषण और ताजगी का बेहतरीन स्रोत है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ उसे स्वस्थ बनाए रखते हैं.

बनाने और खाने के तरीके अलग-अलग
उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी सत्तू का सेवन किया जाता है. हालांकि बनाने और खाने के तरीके अलग-अलग हैं. बघेलखंड में खासकर सीधी जिले में सत्तू को घोलकर या हल्का गाढ़ा सानकर चीनी या गुड़ के साथ खाया जाता है. इसके अलावा सत्तू का शरबत, लड्डू, पराठा और पूरी भी बनाई जाती है. गर्मियों में इसका शरबत प्यास बुझाने और शरीर को ठंडा रखने का एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.