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पहली बार असंगठित निर्माण क्षेत्र का विश्लेषण:करीब एक करोड़ परिवारों ने अपने घर खुद बनाए, 75% मकान गांवों में बने

पहली बार असंगठित निर्माण क्षेत्र का विश्लेषण:करीब एक करोड़ परिवारों ने अपने घर खुद बनाए, 75% मकान गांवों में बने

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एनएसओ) ने एक तकनीकी रिपोर्ट जारी की है जिसमें गैर-पंजीकृत (अन-इनकॉरपोरेटेड) निर्माण एजेंसियों और परिवारों द्वारा बीते साल भर में किए गए कंस्ट्रक्शन पर एक पायलट अध्ययन के प्रमुख नतीजे बताए गए हैं। एनएसओ के अनुसार देश में अन-इनकॉरपोरेटेड कंस्ट्रक्शन में मुख्य गतिविधि करीब 1 करोड़ (सही संख्या 98.5 लाख) परिवारों द्वारा खुद के रहने के लिए खुद बनवाए जा रहे मकानों की वजह से है। कंस्ट्रक्शन में लगीं अन-इनकॉरपोरेटेड एजेंसियों की संख्या करीब 11 लाख थी। महाराष्ट्र (1.3 लाख), केरल (94,000) और कर्नाटक (90,000) में गैर-पंजीकृत निर्माण एजेंसियों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश (13.8 लाख), ओडिशा (7.6 लाख) और महाराष्ट्र (7.5 लाख) घरेलू स्तर पर निर्माण में आगे थे। 97% परिवारों को खुद की आय पर ज्यादा भरोसा रिपोर्ट के मुताबिक 97% परिवारों ने निर्माण के लिए अपनी आय पर भरोसा किया। उन्होंने कुल खर्च का करीब 77% अपने पास से लगाया। 21% परिवारों ने लागत का करीब 17% संस्थागत कर्ज लिया। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों (23%) की भागीदारी शहरी (13%) की तुलना में अधिक थी। ये औपचारिक ऋण तक पहुंच में सुधार का संकेत है। निर्माण लागत में 75% हिस्सा मटेरियल का था। लेबर कॉस्ट करीब 22% थी। ईंट, सीमेंट, स्टील जैसी सामग्रियों का कुल मटेरियल कॉस्ट में 60% हिस्सा था। घरेलू निर्माण खर्च का तीन-चौथाई मटेरियल पर मद – घरेलू – संस्थान ईंट – 20.7% – 13.3% लोहा और स्टील – 20.6% – 16.4% सीमेंट/उत्पाद – 19.4% – 19.6% लकड़ी – 6.7% – 7.3% प्लास्टिक उत्पाद – 4.1% – 4.7% पेंट, वार्निश आदि – 5.6% – 10.7% सेनिटरी वेयर – 3.1% – 2.0% अन्य खर्च – 19.8% – 26.0% शहरों के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण अधिक जुलाई से दिसंबर 2025 तक हुए इस अध्ययन में पाया गया है कि निर्माण गतिविधियों में ग्रामीण क्षेत्रों का दबदबा है। ग्रामीण क्षेत्रों में 6.5 लाख गैर-पंजीकृत एजेंसी निर्माण कार्यों में संलग्न थीं। शहरी इलाकों में ये संख्या करीब 3.7 लाख थी। घरेलू निर्माण में 75.1 लाख ग्रामीण इलाकों में हुए, शहरों में करीब 23.4 लाख निर्माण हुए।

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