Wednesday, 01 Jul 2026 | 10:23 AM

Trending :

कौन होते हैं कंपाउंडर, जो छोटे शहरों में धड़ल्ले से लगाते हैं इंजेक्शन, क्या होती है क्वालिफिकेशन

authorimg

Last Updated:

Compounder Role in Hospitals: छोटे शहरों और कस्बों में क्लीनिक पर एक डॉक्टर के साथ कई कंपाउंडर काम करते हैं. कंपाउंडर का मुख्य काम डॉक्टर की मदद करना होता है, लेकिन अक्सर वे डॉक्टर की गैरमौजूदगी में मरीजों का इलाज करते हैं. NDMC के पूर्व चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिल बंसल के मुताबिक कंपाउंडर कोई ऑफिशियल पोस्ट नहीं है और कानूनी रूप से ये मरीजों का इलाज नहीं कर सकते हैं. मरीजों को कभी भी कंपाउंडर से इलाज नहीं कराना चाहिए.

Zoom

कंपाउंडर आमतौर पर डॉक्टर के हेल्पर होते हैं और वे इलाज करने के लिए क्वालिफाइड नहीं होते हैं.

Are Compounders Allowed to Treat Patients: हमारे देश में डॉक्टर्स की कमी है और इसकी वजह से तमाम झोलाझाप मरीजों का धड़ल्ले से इलाज कर रहे हैं. झोलाछाप से ट्रीटमेंट कराना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि मरीजों के लिए जानलेवा भी हो सकता है. हर साल सैकड़ों लोग झोलाझाप के चक्कर में अपनी जान गंवा देते हैं. जब भी आप छोटे शहरों या कस्बों में किसी डॉक्टर के क्लीनिक पर जाएंगे, तो वहां कई कंपाउंडर होते हैं. ये कंपाउंडर इंजेक्शन लगाने से लेकर ड्रिप चढ़ाते हुए देखे जाते हैं. कई बार डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर मरीजों का इलाज भी करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर द्वारा मरीज देखना गैर कानूनी और खतरनाक है. हमेशा क्वालिफाइड डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए.

नई दिल्ली के NDMC के पूर्व चीफ मेडिकल ऑफिसर और सीनियर फिजीशियन डॉ. अनिल बंसल ने News18 को बताया कि प्राइवेट डॉक्टर्स अक्सर अपने क्लीनिक पर कुछ हेल्पर रख लेते हैं, जिन्हें कंपाउंडर कहा जाता है. कंपाउंडर जैसी कोई ऑफिशियल पोस्ट नहीं होती है और न ही इसके लिए कोई खास डिप्लोमा या डिग्री होती है. तमाम प्राइवेट डॉक्टर 8वीं और 10वीं पास लोगों को कंपाउंडर बना देते हैं. क्लीनिक में कंपाउंडर रखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन उनका काम सिर्फ डॉक्टर की मदद करना है. वे न इंजेक्शन लगाने के लिए क्वालिफाइड होते हैं और न ही दवा प्रिस्क्राइब करने का अधिकार होता है. इसके अलावा डॉक्टर की गैर मौजूदगी में मरीजों का इलाज करना तो अपराध है. अक्सर कंपाउंडर और झोलाछाप द्वारा गलत इलाज के मामले सामने आते हैं. लोगों को जागरूक होना चाहिए और ऐसे लोगों के पास इलाज के लिए नहीं जाना चाहिए.

डॉक्टर बंसल ने बताया कि आज के समय में मेडिकल सिस्टम काफी बदल चुका है. अब प्रशिक्षित नर्स, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हैं. केवल डॉक्टर की देखरेख में प्रशिक्षित व्यक्ति ही इंजेक्शन लगाने या मेडिकल प्रक्रियाओं में सहायता कर सकता है. बिना उचित मेडिकल योग्यता और लाइसेंस के इलाज करना कानूनी रूप से गलत माना जाता है. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं की दूरी और लोगों की जागरुकता कम होने की वजह से कई लोग पहले किसी डॉक्टर के यहां कंपाउंडर का काम करते हैं और फिर झोलाछाप बनकर इलाज करने लगते हैं. कानूनी रूप से इलाज और दवा लिखने का अधिकार केवल योग्य डॉक्टर्स को होता है. फार्मासिस्ट दवाएं देने का काम कर सकते हैं, लेकिन वे इलाज तय नहीं कर सकते. इसी तरह नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की भी तय सीमाएं होती हैं.

डॉक्टर के अनुसार गलत तरीके से इंजेक्शन लगाना बेहद खतरनाक हो सकता है. इससे नसों को नुकसान, एलर्जी, संक्रमण और गंभीर साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ सकता है. अगर इंजेक्शन या सुई ठीक से स्टरलाइज न हो, तो हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और दूसरी संक्रमण संबंधी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है. बिना जांच और सही सलाह के दवाएं लेना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. खासकर एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल भविष्य में दवाओं के असर को कम कर सकता है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि किसी भी गंभीर बीमारी, लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी या तेज दर्द जैसी स्थिति में योग्य डॉक्टर से ही जांच करवानी चाहिए. केवल इंजेक्शन लग जाने से बीमारी ठीक हो जाएगी, यह सोच सही नहीं मानी जाती. सही इलाज के लिए बीमारी की वजह समझना जरूरी होता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

About the Author

authorimg

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Tamil Nadu Government Formation Live Updates: Vijay TVK Cabinet Ministers, MLAs Oath Taking On May 7th.

May 5, 2026/
8:06 am

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 08:06 IST ओमान में काम करने वाले एक एनआरआई मणिकंदन शिवनंथम, तिरुपत्तूर में टीवीके की शानदार...

शादी के 10 साल बाद मां बनीं दिव्यांका त्रिपाठी:41 की उम्र में जुड़वा बेटों को जन्म दिया, अनाउंस कर लिखा- मेरे करण-अर्जुन आ गए

May 26, 2026/
11:52 am

टेलीविजन की पॉपुलर एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी शादी के 9 साल बाद मां बनी हैं। उन्होंने मंगलवार को मुंबई में जुड़वा...

अभी-अभी: राजनीतिक चर्चा के बीच सेना के बागी सांसदों ने एकनाथ शिंदे से उनके आवास पर मुलाकात की

June 22, 2026/
3:21 pm

बागी शिवसेना सांसद इस समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके आवास पर मुलाकात कर रहे हैं, जिससे नई...

ask search icon

April 8, 2026/
3:15 pm

Last Updated:April 08, 2026, 15:15 IST गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडा और तरोताजा रखना जरूरी होता है. भरतपुर...

Ranthambore Tiger Attacks Bike, Forest Officials Escape

March 16, 2026/
11:27 am

रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में वनकर्मियों के सामने अचानक बाघ आ गया था। बाइक छोड़कर वनकर्मी वहां से भाग निकले। सवाई...

Varun Dhawan Recalls Underworld Threat Calls

March 28, 2026/
4:03 pm

10 घंटे पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने बॉलीवुड के 1990 के दशक के डरावने दौर का वो...

‘वेलकम टू द जंगल' ट्रेलर 11 जून को होगा लॉन्च:विंदु दारा सिंह बोले- मजनू, उदय नहीं लेकिन फिल्म में कई नए सरप्राइज

June 2, 2026/
5:23 pm

मल्टीस्टारर फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ से अक्षय कुमार और दिशा पाटनी के साथ ‘ऊंचा लंबा कद फॉरएवर’ गाना रिलीज...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

कौन होते हैं कंपाउंडर, जो छोटे शहरों में धड़ल्ले से लगाते हैं इंजेक्शन, क्या होती है क्वालिफिकेशन

authorimg

Last Updated:

Compounder Role in Hospitals: छोटे शहरों और कस्बों में क्लीनिक पर एक डॉक्टर के साथ कई कंपाउंडर काम करते हैं. कंपाउंडर का मुख्य काम डॉक्टर की मदद करना होता है, लेकिन अक्सर वे डॉक्टर की गैरमौजूदगी में मरीजों का इलाज करते हैं. NDMC के पूर्व चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिल बंसल के मुताबिक कंपाउंडर कोई ऑफिशियल पोस्ट नहीं है और कानूनी रूप से ये मरीजों का इलाज नहीं कर सकते हैं. मरीजों को कभी भी कंपाउंडर से इलाज नहीं कराना चाहिए.

Zoom

कंपाउंडर आमतौर पर डॉक्टर के हेल्पर होते हैं और वे इलाज करने के लिए क्वालिफाइड नहीं होते हैं.

Are Compounders Allowed to Treat Patients: हमारे देश में डॉक्टर्स की कमी है और इसकी वजह से तमाम झोलाझाप मरीजों का धड़ल्ले से इलाज कर रहे हैं. झोलाछाप से ट्रीटमेंट कराना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि मरीजों के लिए जानलेवा भी हो सकता है. हर साल सैकड़ों लोग झोलाझाप के चक्कर में अपनी जान गंवा देते हैं. जब भी आप छोटे शहरों या कस्बों में किसी डॉक्टर के क्लीनिक पर जाएंगे, तो वहां कई कंपाउंडर होते हैं. ये कंपाउंडर इंजेक्शन लगाने से लेकर ड्रिप चढ़ाते हुए देखे जाते हैं. कई बार डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर मरीजों का इलाज भी करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर द्वारा मरीज देखना गैर कानूनी और खतरनाक है. हमेशा क्वालिफाइड डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए.

नई दिल्ली के NDMC के पूर्व चीफ मेडिकल ऑफिसर और सीनियर फिजीशियन डॉ. अनिल बंसल ने News18 को बताया कि प्राइवेट डॉक्टर्स अक्सर अपने क्लीनिक पर कुछ हेल्पर रख लेते हैं, जिन्हें कंपाउंडर कहा जाता है. कंपाउंडर जैसी कोई ऑफिशियल पोस्ट नहीं होती है और न ही इसके लिए कोई खास डिप्लोमा या डिग्री होती है. तमाम प्राइवेट डॉक्टर 8वीं और 10वीं पास लोगों को कंपाउंडर बना देते हैं. क्लीनिक में कंपाउंडर रखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन उनका काम सिर्फ डॉक्टर की मदद करना है. वे न इंजेक्शन लगाने के लिए क्वालिफाइड होते हैं और न ही दवा प्रिस्क्राइब करने का अधिकार होता है. इसके अलावा डॉक्टर की गैर मौजूदगी में मरीजों का इलाज करना तो अपराध है. अक्सर कंपाउंडर और झोलाछाप द्वारा गलत इलाज के मामले सामने आते हैं. लोगों को जागरूक होना चाहिए और ऐसे लोगों के पास इलाज के लिए नहीं जाना चाहिए.

डॉक्टर बंसल ने बताया कि आज के समय में मेडिकल सिस्टम काफी बदल चुका है. अब प्रशिक्षित नर्स, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हैं. केवल डॉक्टर की देखरेख में प्रशिक्षित व्यक्ति ही इंजेक्शन लगाने या मेडिकल प्रक्रियाओं में सहायता कर सकता है. बिना उचित मेडिकल योग्यता और लाइसेंस के इलाज करना कानूनी रूप से गलत माना जाता है. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं की दूरी और लोगों की जागरुकता कम होने की वजह से कई लोग पहले किसी डॉक्टर के यहां कंपाउंडर का काम करते हैं और फिर झोलाछाप बनकर इलाज करने लगते हैं. कानूनी रूप से इलाज और दवा लिखने का अधिकार केवल योग्य डॉक्टर्स को होता है. फार्मासिस्ट दवाएं देने का काम कर सकते हैं, लेकिन वे इलाज तय नहीं कर सकते. इसी तरह नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की भी तय सीमाएं होती हैं.

डॉक्टर के अनुसार गलत तरीके से इंजेक्शन लगाना बेहद खतरनाक हो सकता है. इससे नसों को नुकसान, एलर्जी, संक्रमण और गंभीर साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ सकता है. अगर इंजेक्शन या सुई ठीक से स्टरलाइज न हो, तो हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और दूसरी संक्रमण संबंधी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है. बिना जांच और सही सलाह के दवाएं लेना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. खासकर एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल भविष्य में दवाओं के असर को कम कर सकता है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि किसी भी गंभीर बीमारी, लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी या तेज दर्द जैसी स्थिति में योग्य डॉक्टर से ही जांच करवानी चाहिए. केवल इंजेक्शन लग जाने से बीमारी ठीक हो जाएगी, यह सोच सही नहीं मानी जाती. सही इलाज के लिए बीमारी की वजह समझना जरूरी होता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

About the Author

authorimg

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.