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कौन होते हैं कंपाउंडर, जो छोटे शहरों में धड़ल्ले से लगाते हैं इंजेक्शन, क्या होती है क्वालिफिकेशन

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Compounder Role in Hospitals: छोटे शहरों और कस्बों में क्लीनिक पर एक डॉक्टर के साथ कई कंपाउंडर काम करते हैं. कंपाउंडर का मुख्य काम डॉक्टर की मदद करना होता है, लेकिन अक्सर वे डॉक्टर की गैरमौजूदगी में मरीजों का इलाज करते हैं. NDMC के पूर्व चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिल बंसल के मुताबिक कंपाउंडर कोई ऑफिशियल पोस्ट नहीं है और कानूनी रूप से ये मरीजों का इलाज नहीं कर सकते हैं. मरीजों को कभी भी कंपाउंडर से इलाज नहीं कराना चाहिए.

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कंपाउंडर आमतौर पर डॉक्टर के हेल्पर होते हैं और वे इलाज करने के लिए क्वालिफाइड नहीं होते हैं.

Are Compounders Allowed to Treat Patients: हमारे देश में डॉक्टर्स की कमी है और इसकी वजह से तमाम झोलाझाप मरीजों का धड़ल्ले से इलाज कर रहे हैं. झोलाछाप से ट्रीटमेंट कराना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि मरीजों के लिए जानलेवा भी हो सकता है. हर साल सैकड़ों लोग झोलाझाप के चक्कर में अपनी जान गंवा देते हैं. जब भी आप छोटे शहरों या कस्बों में किसी डॉक्टर के क्लीनिक पर जाएंगे, तो वहां कई कंपाउंडर होते हैं. ये कंपाउंडर इंजेक्शन लगाने से लेकर ड्रिप चढ़ाते हुए देखे जाते हैं. कई बार डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर मरीजों का इलाज भी करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर द्वारा मरीज देखना गैर कानूनी और खतरनाक है. हमेशा क्वालिफाइड डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए.

नई दिल्ली के NDMC के पूर्व चीफ मेडिकल ऑफिसर और सीनियर फिजीशियन डॉ. अनिल बंसल ने News18 को बताया कि प्राइवेट डॉक्टर्स अक्सर अपने क्लीनिक पर कुछ हेल्पर रख लेते हैं, जिन्हें कंपाउंडर कहा जाता है. कंपाउंडर जैसी कोई ऑफिशियल पोस्ट नहीं होती है और न ही इसके लिए कोई खास डिप्लोमा या डिग्री होती है. तमाम प्राइवेट डॉक्टर 8वीं और 10वीं पास लोगों को कंपाउंडर बना देते हैं. क्लीनिक में कंपाउंडर रखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन उनका काम सिर्फ डॉक्टर की मदद करना है. वे न इंजेक्शन लगाने के लिए क्वालिफाइड होते हैं और न ही दवा प्रिस्क्राइब करने का अधिकार होता है. इसके अलावा डॉक्टर की गैर मौजूदगी में मरीजों का इलाज करना तो अपराध है. अक्सर कंपाउंडर और झोलाछाप द्वारा गलत इलाज के मामले सामने आते हैं. लोगों को जागरूक होना चाहिए और ऐसे लोगों के पास इलाज के लिए नहीं जाना चाहिए.

डॉक्टर बंसल ने बताया कि आज के समय में मेडिकल सिस्टम काफी बदल चुका है. अब प्रशिक्षित नर्स, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हैं. केवल डॉक्टर की देखरेख में प्रशिक्षित व्यक्ति ही इंजेक्शन लगाने या मेडिकल प्रक्रियाओं में सहायता कर सकता है. बिना उचित मेडिकल योग्यता और लाइसेंस के इलाज करना कानूनी रूप से गलत माना जाता है. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं की दूरी और लोगों की जागरुकता कम होने की वजह से कई लोग पहले किसी डॉक्टर के यहां कंपाउंडर का काम करते हैं और फिर झोलाछाप बनकर इलाज करने लगते हैं. कानूनी रूप से इलाज और दवा लिखने का अधिकार केवल योग्य डॉक्टर्स को होता है. फार्मासिस्ट दवाएं देने का काम कर सकते हैं, लेकिन वे इलाज तय नहीं कर सकते. इसी तरह नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की भी तय सीमाएं होती हैं.

डॉक्टर के अनुसार गलत तरीके से इंजेक्शन लगाना बेहद खतरनाक हो सकता है. इससे नसों को नुकसान, एलर्जी, संक्रमण और गंभीर साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ सकता है. अगर इंजेक्शन या सुई ठीक से स्टरलाइज न हो, तो हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और दूसरी संक्रमण संबंधी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है. बिना जांच और सही सलाह के दवाएं लेना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. खासकर एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल भविष्य में दवाओं के असर को कम कर सकता है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि किसी भी गंभीर बीमारी, लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी या तेज दर्द जैसी स्थिति में योग्य डॉक्टर से ही जांच करवानी चाहिए. केवल इंजेक्शन लग जाने से बीमारी ठीक हो जाएगी, यह सोच सही नहीं मानी जाती. सही इलाज के लिए बीमारी की वजह समझना जरूरी होता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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कंपाउंडर आमतौर पर डॉक्टर के हेल्पर होते हैं और वे इलाज करने के लिए क्वालिफाइड नहीं होते हैं.

Are Compounders Allowed to Treat Patients: हमारे देश में डॉक्टर्स की कमी है और इसकी वजह से तमाम झोलाझाप मरीजों का धड़ल्ले से इलाज कर रहे हैं. झोलाछाप से ट्रीटमेंट कराना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि मरीजों के लिए जानलेवा भी हो सकता है. हर साल सैकड़ों लोग झोलाझाप के चक्कर में अपनी जान गंवा देते हैं. जब भी आप छोटे शहरों या कस्बों में किसी डॉक्टर के क्लीनिक पर जाएंगे, तो वहां कई कंपाउंडर होते हैं. ये कंपाउंडर इंजेक्शन लगाने से लेकर ड्रिप चढ़ाते हुए देखे जाते हैं. कई बार डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर मरीजों का इलाज भी करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर द्वारा मरीज देखना गैर कानूनी और खतरनाक है. हमेशा क्वालिफाइड डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए.

नई दिल्ली के NDMC के पूर्व चीफ मेडिकल ऑफिसर और सीनियर फिजीशियन डॉ. अनिल बंसल ने News18 को बताया कि प्राइवेट डॉक्टर्स अक्सर अपने क्लीनिक पर कुछ हेल्पर रख लेते हैं, जिन्हें कंपाउंडर कहा जाता है. कंपाउंडर जैसी कोई ऑफिशियल पोस्ट नहीं होती है और न ही इसके लिए कोई खास डिप्लोमा या डिग्री होती है. तमाम प्राइवेट डॉक्टर 8वीं और 10वीं पास लोगों को कंपाउंडर बना देते हैं. क्लीनिक में कंपाउंडर रखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन उनका काम सिर्फ डॉक्टर की मदद करना है. वे न इंजेक्शन लगाने के लिए क्वालिफाइड होते हैं और न ही दवा प्रिस्क्राइब करने का अधिकार होता है. इसके अलावा डॉक्टर की गैर मौजूदगी में मरीजों का इलाज करना तो अपराध है. अक्सर कंपाउंडर और झोलाछाप द्वारा गलत इलाज के मामले सामने आते हैं. लोगों को जागरूक होना चाहिए और ऐसे लोगों के पास इलाज के लिए नहीं जाना चाहिए.

डॉक्टर बंसल ने बताया कि आज के समय में मेडिकल सिस्टम काफी बदल चुका है. अब प्रशिक्षित नर्स, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हैं. केवल डॉक्टर की देखरेख में प्रशिक्षित व्यक्ति ही इंजेक्शन लगाने या मेडिकल प्रक्रियाओं में सहायता कर सकता है. बिना उचित मेडिकल योग्यता और लाइसेंस के इलाज करना कानूनी रूप से गलत माना जाता है. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं की दूरी और लोगों की जागरुकता कम होने की वजह से कई लोग पहले किसी डॉक्टर के यहां कंपाउंडर का काम करते हैं और फिर झोलाछाप बनकर इलाज करने लगते हैं. कानूनी रूप से इलाज और दवा लिखने का अधिकार केवल योग्य डॉक्टर्स को होता है. फार्मासिस्ट दवाएं देने का काम कर सकते हैं, लेकिन वे इलाज तय नहीं कर सकते. इसी तरह नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की भी तय सीमाएं होती हैं.

डॉक्टर के अनुसार गलत तरीके से इंजेक्शन लगाना बेहद खतरनाक हो सकता है. इससे नसों को नुकसान, एलर्जी, संक्रमण और गंभीर साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ सकता है. अगर इंजेक्शन या सुई ठीक से स्टरलाइज न हो, तो हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और दूसरी संक्रमण संबंधी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है. बिना जांच और सही सलाह के दवाएं लेना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. खासकर एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल भविष्य में दवाओं के असर को कम कर सकता है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि किसी भी गंभीर बीमारी, लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी या तेज दर्द जैसी स्थिति में योग्य डॉक्टर से ही जांच करवानी चाहिए. केवल इंजेक्शन लग जाने से बीमारी ठीक हो जाएगी, यह सोच सही नहीं मानी जाती. सही इलाज के लिए बीमारी की वजह समझना जरूरी होता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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