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नहीं रहीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले:गरीबी में बहन लता के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, कभी बीच रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाला गया

नहीं रहीं सुरों की मल्लिका आशा भोसले:गरीबी में बहन लता के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, कभी बीच रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाला गया

नहीं रहीं आशा भोसले सुरों की मल्लिका आशा भोसले का आज 92 साल की उम्र में निधन हो गया। सिंगर को शनिवार रात चेस्ट इन्फेक्शन के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। आशा भोसले बीते 70 सालों से हिंदी सिनेमा का हिस्सा थीं। उन्होंने कई भाषाओं में रिकॉर्ड 12 हजार गाने गाए। उनके बिना हिंदी सिनेमा की कल्पना करना भी मुश्किल है, हालांकि एक समय ऐसा था जब ये कहकर आशा भोसले को रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाल दिया गया कि उनकी आवाज खराब है। आज दुनियाभर के कई होटलों की मालकिन आशा भोसले का बचपन गरीबी में बीता। तंगहाली का वो आलम था कि वो बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, जिससे पिता को फीस न देना पड़े। हालांकि पकड़े जाने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। पढ़िए आशा भोसले की जिंदगी से जुड़े ऐसे ही अनसुने किस्से- बहन के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं आशा भोसले 8 सितंबर 1933 में आशा भोसले का जन्म ब्रिटिश इंडिया के सांगली में हुआ। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर, रंगमंच कलाकार थे। घर में तंगहाली का वो आलम था कि बड़ी बहन लता मंगेशकर का जब स्कूल में दाखिला करवाया गया, तो वो आशा को चोरी-छिपे स्कूल ले जाने लगीं। मास्टर से छिपकर वो आशा को साथ बैठा लेती थीं। स्कूल जाते हुए महज दो दिन ही हुए थे कि एक रोज मास्टरजी ने चोरी पकड़ ली। उन्होंने दोनों को क्लासरूम से बाहर कर दिया और कहा कि एक फीस में एक ही बच्चा स्कूल आ सकता है। दोनों घर लौट गए। अगले दिन लता ने फैसला किया कि वो छोटी बहन को पढ़ाएंगी। उन्होंने पिता से बात कर स्कूल से अपना नाम कटवा दिया और अपनी जगह बहन आशा का एडमिशन करवाया। आशा महज 9 साल की थीं, जब उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। ऐसे में लता ने ही संघर्ष कर हिंदी सिनेमा में कदम रखा और बहन की परवरिश की। परिवार पहले पुणे और फिर मुंबई आकर बसा। यहां महज 10 साल की उम्र में आशा भोसले ने गाना शुरू कर दिया। उन्हें पहला ब्रेक मराठी फिल्म माझा बल (1943) के गाने चला चला नाव बला से मिला। आशा महज 15 साल की थीं, जब उन्हें हिंदी फिल्म चुनरिया का सावन आया गाने का मौका मिला। उस दौर में नूर जहां, शमशाद बेगम जैसी सिंगर्स की इंडस्ट्री में पकड़ थी। लता मंगेशकर भी धीरे-धीरे पहचान बना रही थीं, लेकिन आशा इस लिस्ट में कहीं नहीं थीं। उन्हें सिर्फ तब ही मौके मिलते थे, जब फिल्ममेकर्स या तो बड़ी सिंगर्स की फीस चुका नहीं पाते थे या दूसरी सिंगर्स इनकार कर देती थीं। गाना रिकॉर्ड करने पहुंचीं, तो आवाज पर ताना देकर स्टूडियो से निकाला गया आशा भोसले को एक बार खराब आवाज बताकर किशोर कुमार के साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियों से बाहर निकाल दिया गया था। 1947 की बात है। आशा, किशोर कुमार के साथ फेमस स्टूडियों में राज कपूर और नरगिस स्टारर फिल्म ‘जान पहचान’ के लिए एक गाना रिकॉर्ड करने गई थी। इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद प्रकाश थे। तब स्टूडियो में कोई खास सुविधा नहीं होती थी, माइक भी सिर्फ एक ही रहता था और गायकों को उसके सामने खड़े होकर गाना पड़ता था। आशा और किशोर दा ने जैसे ही गाना शुरू किया, वहां रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने धीरे से म्यूजिक डायरेक्टर खेमचंद्र से बंगाली में कहा- इन दोनों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही, दूसरे सिंगर लाओ। पास खड़े किशोर दा ये बात समझ गए और उन्होंने आशा से कहा कि यहां कुछ गड़बड़ है। उनका गाना भी रोक दिया गया और थोड़ी देर में ही उन्हें वहां से निकल जाने को कहा गया। रात के 2 बज चुके थे। दोनों इस अपमान से टूट गए और वहां से निकलकर महालक्ष्मी स्टेशन के पास बैठे और ये चर्चा करने लगे कि आखिर उनसे कहां चूक हुई। सालों बाद किशोर कुमार ने लिया था, अपने और आशा के अपमान का बदला 1957 तक आशा भोसले हिंदी सिनेमा में पहचान बना चुकी थीं। उनके गाने उड़ें जब-जब जुल्फें तेरी काफी हिट रहा था। किशोर कुमार भी अपनी पहचान बना चुके थे। कामयाबी मिलने के बाद एक रोज उन्हें फिर उसी स्टूडियो में रिकॉर्ड करने का मौका मिला। वहां रॉबिन चटर्जी भी मौजूद थे, जिन्होंने सालों पहले उन्हें और आशा को स्टूडियो से निकलवाया था। आशा ताई तो झिझक में कुछ कह नहीं सकीं, लेकिन किशोर कुमार ने मौके का फायदा उठाया और रिकॉर्डिस्ट से कहा- क्यों, आपने तो कहा था कि हम गा नहीं सकते। आप देख लीजिए कि अब हम कहां हैं। 16 की उम्र में की भागकर शादी, बहन से बिगड़े रिश्ते 10 साल की उम्र में गाना शुरू करने वालीं आशा भोसले को महज 16 साल की उम्र में अपने सेक्रेटरी गणपत राव भोसले से प्यार हो गया। गणपत राव उम्र में 15 साल बड़े थे। वो जानती थीं कि परिवार इस रिश्ते को कभी नहीं अपनाएगा, तो उन्होंने 16 की उम्र में घर से भागकर गणपत राव से शादी की। यह फैसला उनके लिए खुशियों से ज्यादा तकलीफें लेकर आया। शादी के बाद उन्हें अपने पति और ससुराल वालों से अच्छा व्यवहार नहीं मिला। वक्त बीतता गया, लेकिन रिश्ते में कड़वाहट बढ़ती ही रही। कुछ साल बाद, शक और तनाव से भरे इस रिश्ते ने आखिरकार दम तोड़ दिया। गणपतराव ने उन्हें घर से निकाल दिया। उस वक्त आशा दो बच्चों के साथ थीं और तीसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं। मजबूरी में उन्हें अपने मायके लौटना पड़ा। साल 1960 में दोनों अलग हो गए। बेटे की हुई एक्सीडेंट में मौत, बेटी ने गोली मारकर की आत्महत्या आशा भोसले और गणपत राव के तीन बच्चे थे। उनके बड़े बेटे हेमंत भोसले ने शुरुआत में पायलट के तौर पर काम किया, लेकिन बाद में संगीत की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने कुछ यादगार गाने भी दिए, हालांकि उनका सिंगिंग करियर ज्यादा लंबा नहीं चला। 2015 में कैंसर के कारण उनका निधन हो गया। आशा की बेटी वर्षा भोसले, एक जानी-मानी कॉलमनिस्ट थीं। उन्होंने पति से तलाक के बाद 55 साल की उम्र में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उनके सबसे छोटे बेटे आनंद भोसले ने बिजनेस और फिल्म निर्देशन की पढ़ाई की और आज वे अपनी मां के करियर को संभालते थे। आरडी बर्मन की मां ने कहा था, आशा से शादी करनी है, तो लाश से होकर गुजरना होगा गणपत राव से तलाक लेने के बाद आशा भोसले की जिंदगी में आरडी बर्मन हमसफर बनकर आए। दोनों की मुलाकात 1966 में हुई, जब वो तीसरी मंजिल में साथ काम कर रहे थे। दोनों ने ओ हसीना जुल्फों वाली…, और ओ मेरे सोना रे सोना रे को आवाज दी। आरडी बर्मन, पिता एसडी बर्मन की लेगेसी से कुछ अलग करना चाहते थे। जैज, कैबरे का ट्रेंड लाते हुए उन्हें आशा भोसले की आवाज का सहारा मिला। दोनों ने पिया तू अब तो आजा…, दम मारो दम…. जैसे गानों बनाए, जिसे आशा भोसले को कैबरे क्वीन कहा जाने लगा। प्रोफेशनल रिश्ता जल्द ही नजदीकियां बढ़ने की वजह बना। पंचम दा, उम्र में आशा से 6 साल छोटे थे और 1971 में उनका पहली पत्नी रीटा से तलाक हो चुका था। उनकी शादी विवादों में थी। घरेलु झगड़े बढ़ने से वो घर छोड़कर होटल में रहने लगे थे। 9 साल बाद जब उन्होंने आशा से शादी करने का फैसला किया तो परिवार खिलाफ हो गया। मां ने साफ इनकार कर दिया। आरडी बर्मन की मां दोनों के रिश्ते से इतनी खफा दी कि उन्होंने साफ कह दिया कि जब तो वो जिंदा हैं, तब तक दोनों की शादी नहीं हो सकती और अगर वो ये शादी करना चाहते हैं तो आशा को अपनी मां की लाश के ऊपर से घर में लाना होगा। ये सुनकर आरडी बर्मन बिना कुछ कहे ही वहां से चले गए। दोनों शादी करना चाहते थे, हालांकि मां की नाराजगी के चलते ऐसा मुमकिन नहीं था। कुछ सालों के बाद आरडी बर्मन की मां बेहद बीमार रहने लगीं और उन्होंने किसी को भी पहचाना बंद कर दिया, जिसके बाद आरडी बर्मन और आशा ने 1980में शादी कर ली। शादी के महज 14 सालों बाद ही 1994 में आरडी बर्मन का निधन हो गया, और आशा फिर एक बार अकेली हो गईं। आरडी के निधन से पहले उनकी फाइनेंशिल कंडीशन ठीक नहीं थी जिसके चलते आशा और वो अलग रहा करते थे।

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नहीं रहीं आशा भोसले सुरों की मल्लिका आशा भोसले का आज 92 साल की उम्र में निधन हो गया। सिंगर को शनिवार रात चेस्ट इन्फेक्शन के चलते मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। आशा भोसले बीते 70 सालों से हिंदी सिनेमा का हिस्सा थीं। उन्होंने कई भाषाओं में रिकॉर्ड 12 हजार गाने गाए। उनके बिना हिंदी सिनेमा की कल्पना करना भी मुश्किल है, हालांकि एक समय ऐसा था जब ये कहकर आशा भोसले को रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाल दिया गया कि उनकी आवाज खराब है। आज दुनियाभर के कई होटलों की मालकिन आशा भोसले का बचपन गरीबी में बीता। तंगहाली का वो आलम था कि वो बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं, जिससे पिता को फीस न देना पड़े। हालांकि पकड़े जाने पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। पढ़िए आशा भोसले की जिंदगी से जुड़े ऐसे ही अनसुने किस्से- बहन के साथ चोरी-छिपे स्कूल जाती थीं आशा भोसले 8 सितंबर 1933 में आशा भोसले का जन्म ब्रिटिश इंडिया के सांगली में हुआ। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर, रंगमंच कलाकार थे। घर में तंगहाली का वो आलम था कि बड़ी बहन लता मंगेशकर का जब स्कूल में दाखिला करवाया गया, तो वो आशा को चोरी-छिपे स्कूल ले जाने लगीं। मास्टर से छिपकर वो आशा को साथ बैठा लेती थीं। स्कूल जाते हुए महज दो दिन ही हुए थे कि एक रोज मास्टरजी ने चोरी पकड़ ली। उन्होंने दोनों को क्लासरूम से बाहर कर दिया और कहा कि एक फीस में एक ही बच्चा स्कूल आ सकता है। दोनों घर लौट गए। अगले दिन लता ने फैसला किया कि वो छोटी बहन को पढ़ाएंगी। उन्होंने पिता से बात कर स्कूल से अपना नाम कटवा दिया और अपनी जगह बहन आशा का एडमिशन करवाया। आशा महज 9 साल की थीं, जब उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। ऐसे में लता ने ही संघर्ष कर हिंदी सिनेमा में कदम रखा और बहन की परवरिश की। परिवार पहले पुणे और फिर मुंबई आकर बसा। यहां महज 10 साल की उम्र में आशा भोसले ने गाना शुरू कर दिया। उन्हें पहला ब्रेक मराठी फिल्म माझा बल (1943) के गाने चला चला नाव बला से मिला। आशा महज 15 साल की थीं, जब उन्हें हिंदी फिल्म चुनरिया का सावन आया गाने का मौका मिला। उस दौर में नूर जहां, शमशाद बेगम जैसी सिंगर्स की इंडस्ट्री में पकड़ थी। लता मंगेशकर भी धीरे-धीरे पहचान बना रही थीं, लेकिन आशा इस लिस्ट में कहीं नहीं थीं। उन्हें सिर्फ तब ही मौके मिलते थे, 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महालक्ष्मी स्टेशन के पास बैठे और ये चर्चा करने लगे कि आखिर उनसे कहां चूक हुई। सालों बाद किशोर कुमार ने लिया था, अपने और आशा के अपमान का बदला 1957 तक आशा भोसले हिंदी सिनेमा में पहचान बना चुकी थीं। उनके गाने उड़ें जब-जब जुल्फें तेरी काफी हिट रहा था। किशोर कुमार भी अपनी पहचान बना चुके थे। कामयाबी मिलने के बाद एक रोज उन्हें फिर उसी स्टूडियो में रिकॉर्ड करने का मौका मिला। वहां रॉबिन चटर्जी भी मौजूद थे, जिन्होंने सालों पहले उन्हें और आशा को स्टूडियो से निकलवाया था। आशा ताई तो झिझक में कुछ कह नहीं सकीं, लेकिन किशोर कुमार ने मौके का फायदा उठाया और रिकॉर्डिस्ट से कहा- क्यों, आपने तो कहा था कि हम गा नहीं सकते। आप देख लीजिए कि अब हम कहां हैं। 16 की उम्र में की भागकर शादी, बहन से बिगड़े रिश्ते 10 साल की उम्र में गाना शुरू करने वालीं आशा भोसले को महज 16 साल की उम्र में अपने सेक्रेटरी गणपत राव भोसले से प्यार हो गया। गणपत राव उम्र में 15 साल बड़े थे। वो जानती थीं कि परिवार इस रिश्ते को कभी नहीं अपनाएगा, तो उन्होंने 16 की उम्र में घर से भागकर गणपत राव से शादी की। यह फैसला उनके लिए खुशियों से ज्यादा तकलीफें लेकर आया। शादी के बाद उन्हें अपने पति और ससुराल वालों से अच्छा व्यवहार नहीं मिला। वक्त बीतता गया, लेकिन रिश्ते में कड़वाहट बढ़ती ही रही। कुछ साल बाद, शक और तनाव से भरे इस रिश्ते ने आखिरकार दम तोड़ दिया। गणपतराव ने उन्हें घर से निकाल दिया। उस वक्त आशा दो बच्चों के साथ थीं और तीसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं। मजबूरी में उन्हें अपने मायके लौटना पड़ा। साल 1960 में दोनों अलग हो गए। बेटे की हुई एक्सीडेंट में मौत, बेटी ने गोली मारकर की आत्महत्या आशा भोसले और गणपत राव के तीन बच्चे थे। उनके बड़े बेटे हेमंत भोसले ने शुरुआत में पायलट के तौर पर काम किया, लेकिन बाद में संगीत की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने कुछ यादगार गाने भी दिए, हालांकि उनका सिंगिंग करियर ज्यादा लंबा नहीं चला। 2015 में कैंसर के कारण उनका निधन हो गया। आशा की बेटी वर्षा भोसले, एक जानी-मानी कॉलमनिस्ट थीं। उन्होंने पति से तलाक के बाद 55 साल की उम्र में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उनके सबसे छोटे बेटे आनंद भोसले ने बिजनेस और फिल्म निर्देशन की पढ़ाई की और आज वे अपनी मां के करियर को संभालते थे। आरडी बर्मन की मां ने कहा था, आशा से शादी करनी है, तो लाश से होकर गुजरना होगा गणपत राव से तलाक लेने के बाद आशा भोसले की जिंदगी में आरडी बर्मन हमसफर बनकर आए। दोनों की मुलाकात 1966 में हुई, जब वो तीसरी मंजिल में साथ काम कर रहे थे। दोनों ने ओ हसीना जुल्फों वाली…, और ओ मेरे सोना रे सोना रे को आवाज दी। आरडी बर्मन, पिता एसडी बर्मन की लेगेसी से कुछ अलग करना चाहते थे। जैज, कैबरे का ट्रेंड लाते हुए उन्हें आशा भोसले की आवाज का सहारा मिला। दोनों ने पिया तू अब तो आजा…, दम मारो दम…. जैसे गानों बनाए, जिसे आशा भोसले को कैबरे क्वीन कहा जाने लगा। प्रोफेशनल रिश्ता जल्द ही नजदीकियां बढ़ने की वजह बना। पंचम दा, उम्र में आशा से 6 साल छोटे थे और 1971 में उनका पहली पत्नी रीटा से तलाक हो चुका था। उनकी शादी विवादों में थी। घरेलु झगड़े बढ़ने से वो घर छोड़कर होटल में रहने लगे थे। 9 साल बाद जब उन्होंने आशा से शादी करने का फैसला किया तो परिवार खिलाफ हो गया। मां ने साफ इनकार कर दिया। आरडी बर्मन की मां दोनों के रिश्ते से इतनी खफा दी कि उन्होंने साफ कह दिया कि जब तो वो जिंदा हैं, तब तक दोनों की शादी नहीं हो सकती और अगर वो ये शादी करना चाहते हैं तो आशा 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