Wednesday, 15 Apr 2026 | 03:37 AM

Trending :

पाकिस्तान-चीन के खिलाफ तीनों सेनाओं की दो संयुक्त कमान:वाइस सीडीएस भी होंगे; तीन थियेटर कमान का ब्लू प्रिंट तैयार जबलपुर के बघौड़ा गांव में अनोखी परंपरा:इस दिन घर में नहीं बाहर बनता है खाना, हैजा से हुई मौतों का डर आज भी उज्जैन के महाकाल रेस्टोरेंट में लगी आग:समय रहते आग पर काबू पाया, बड़ा हादसा टला Mahakal Temple Bhasma Aarti Booking Changes: Online Permission Now ग्वालियर में ऑनलाइन सट्‌टे में गंवाए 20 लाख, किया सुसाइड:सुसाइड नोट में लिखा- मेरी मौत के जिम्मेदार राजेन्द्र और रौनक हैं, प्रिया को बता देना ‘नीतीश कुमार की निरंतरता का प्रतिबिंब’: बीजेपी ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी को क्यों चुना | राजनीति समाचार
EXCLUSIVE

Varun Dhawan Daughter Disease; Hip Dysplasia Symptoms

Varun Dhawan Daughter Disease; Hip Dysplasia Symptoms
  • Hindi News
  • Lifestyle
  • Varun Dhawan Daughter Disease; Hip Dysplasia Symptoms | DDH Diagnosis Process

35 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

  • कॉपी लिंक

बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बेटी लारा को डेढ़ साल की उम्र में DDH डायग्नोज हुआ था। DDH यानी ‘डेवलपमेंटल डिस्प्लेसिया ऑफ हिप।’ यह कंडीशन हिप जॉइंट के पूरी तरह विकसित न हो पाने से बनती है।

वरुण ने बताया कि अर्ली डायग्नोसिस से उनकी बेटी की रिकवरी में मदद मिली। इस कंडीशन का जितनी जल्दी पता चल जाए, इलाज उतना ही आसान होता है। इसके लिए अवेयरनेस जरूरी है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज DDH कंडीशन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • इसके शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
  • किन बच्चों में DDH का रिस्क ज्यादा होता है?
  • इससे बचाव के उपाय क्या हैं?

सवाल- वरुण धवन की बेटी को हुई बीमारी DDH क्या है?

जवाब- इसकी डिटेल नीचे पॉइंटर्स में देखिए–

  • DDH एक जन्मजात कंडीशन है।
  • यह हिप जॉइंट ठीक से विकसित न होने पर बनती है।
  • इस वजह से जांघ की हड्डी का बॉल, हिप सॉकेट में सही से फिट नहीं हो पाता है।
  • इसके कारण हिप जॉइंट ढीला, अस्थिर (अनस्टेबल) या डिसलोकेट हो सकता है।

सवाल- DDH कितनी कॉमन बीमारी है? यह बच्चों को ही क्यों होती है?

जवाब- ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ के मुताबिक, भारत में यह कंडीशन हर 1000 में 2-3 बच्चों को होती है। यह सामान्य बीमारी है, लेकिन इसका पता अक्सर देर से चलता है।

यह जन्म से पहले के डेवलपमेंट से जुड़ी कंडीशन है। इसलिए बच्चों को होती है।

सवाल- DDH का पता कैसे चलता है?

जवाब- डॉक्टर इसके लिए मुख्य रूप से दो टेस्ट करते हैं, जिनसे हिप जॉइंट के ढीलेपन या डिसलोकेशन का पता चलता है-

  1. ऑर्टोलनी (Ortolani)- इसमें डॉक्टर बच्चे के हिप को प्रेस करके चेक करते हैं कि ये अनस्टेबल तो नहीं है।
  2. बारलो (Barlow)- इसमें बच्चे के हिप को अंदर की ओर दबाकर देखते हैं कि जॉइंट अपनी जगह से खिसक तो नहीं रहा है।

अगर डॉक्टर को DDH के लक्षण दिखते हैं तो इमेजिंग टेस्ट भी कराते हैं। शिशुओं के मामले में अल्ट्रासाउंड कराते हैं, क्योंकि उनकी हड्डियां पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती हैं। 6 महीने के बाद बच्चे का एक्स-रे भी किया जा सकता है।

सवाल- छोटे बच्चों में DDH के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?

जवाब- कूल्हे का जोड़ सही से विकसित नहीं होने के कारण एक पैर दूसरे से छोटा दिख सकता है। जांघ या हिप के स्किन फोल्ड्स असमान होते हैं। बच्चे को पैर फैलाने में परेशानी होती है। चलने पर लंगड़ाहट दिख सकती है। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या DDH जन्म से ही होता है या बाद में भी डेवलप हो सकता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • जन्म के समय मौजूद हो सकता है, पर ऐसा हमेशा नहीं होता है।
  • कुछ मामलों में कूल्हे का जोड़ जन्म के बाद धीरे-धीरे असामान्य तरीके से विकसित हो सकता है।
  • इसलिए इसे डेवलपमेंटल कंडीशन कहा जाता है यानी शारीरिक विकास के साथ बदलने वाली कंडीशन।
  • इसलिए शुरुआती महीनों में स्क्रीनिंग बहुत जरूरी होती है।
  • समय पर डायग्नोसिस से इलाज सरल और सफल होता है।

सवाल- अगर DDH का समय पर इलाज न हो तो क्या हो सकता है?

जवाब- अगर DDH का सही समय पर इलाज न हो तो–

  • कूल्हे का जोड़ स्थायी रूप से डिसलोकेट हो सकता है।
  • चलने में लंगड़ाहट हो सकती है। व्यक्ति परमानेंट लंगड़ा हो सकता है।
  • खड़े होने और चलने में बैलेंस बिगड़ सकता है।
  • कूल्हे में दर्द और जकड़न बढ़ सकती है।

सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन बच्चों में DDH का जोखिम ज्यादा होता है?

जवाब- कुछ बच्चों को DDH का रिस्क ज्यादा होता है, खासतौर पर जिनका जन्म ब्रीच पोजिशन (उल्टी पोजिशन) में होता है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- DDH का इलाज क्या है? क्या यह पूरी तरह ठीक हो सकता है?

जवाब- इसके लिए डॉक्टर्स ये ट्रीटमेंट देते हैं-

  • शुरुआती स्टेज में पैवलिक हार्नेस (खास तरह का बेल्ट/सपोर्ट) से कूल्हे को सही पोजिशन में रखा जाता है।
  • 6 महीने के बाद ब्रेस या कास्टिंग (हिप्स सही पोजिशन में रखने के लिए सपोर्ट डिवाइस) की जरूरत पड़ सकती है।
  • गंभीर मामलों में सर्जरी की जाती है।
  • जल्दी इलाज मिलने से पूरी तरह ठीक होने की संभावना होती है।
  • देर से डायग्नोसिस होने पर इलाज थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

सवाल- DDH का शुरुआती इलाज इतना जरूरी क्यों है?

जवाब- शुरुआती महीनों में हिप आसानी से सही पोजिशन में लाया जा सकता है, क्योंकि इस उम्र में हड्डियां डेवलपिंग स्टेज में होती हैं। समय से इलाज मिलने पर-

  • सर्जरी की नौबत नहीं आती है।
  • बच्चे का विकास सामान्य रहता है। वह आराम से चल-फिर सकता है।
  • दर्द व लंगड़ाहट जैसे कॉम्प्लिकेशन रोके जा सकते हैं।
  • भविष्य में जॉइंट डैमेज का रिस्क कम होता है।
  • देर होने पर जॉइंट सख्त और अस्थिर हो जाता है तो इलाज में मुश्किल होती है।

सवाल- क्या बड़े बच्चों या एडल्ट्स में भी यह समस्या हो सकती है?

जवाब- हां, DDH की समस्या बड़े बच्चों या एडल्ट्स में भी दिख सकती है।

  • यह आमतौर पर बचपन में अनडायग्नोज्ड रह जाने पर बाद में सामने आती है।
  • इसके कारण कम उम्र में ही ऑस्टियोआर्थराइटिस (जोड़ों की बीमारी) हो सकता है।

सवाल- पेरेंट्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि बच्चों को DDH से बचाया जा सके?

जवाब- बच्चे की टांगों को कसकर सीधा बांधने से बचें यानी सेफ स्वैडलिंग करें।

  • ‘न्यू बॉर्न चेकअप’ नियमित रूप से कराएं।
  • बच्चे के पैरों की मूवमेंट पर ध्यान दें।
  • किसी भी असामान्यता पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • बेबी कैरिअर्स में हिप-फ्रेंडली पोजिशन रखें (M-शेप में)।
  • अगर फैमिली हिस्ट्री हो तो एक्स्ट्रा स्क्रीनिंग करवाएं।
  • अवेयरनेस और समय पर स्क्रीनिंग सबसे जरूरी है।

……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- कोलेस्ट्रॉल पर 8 साल बाद आई नई गाइडलाइन: LDL 100 से नीचे रखें, 20 साल की उम्र से कराएं टेस्ट, जानें जरूरी बातें

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC) ने कोलेस्ट्रॉल पर नई गाइडलाइन जारी की है। यह अपडेट इसलिए अहम है, क्योंकि इसने कोलेस्ट्रॉल के पुराने पैरामीटर्स को पूरी तरह बदल दिया है। आगे पढ़िए…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
गुरुग्राम में सोसाइटी की दीवार गिरी:7 मजदूरों की मौत, 3 गंभीर रूप से घायल; कुछ लोगों के दबे होने की आशंका

March 9, 2026/
10:03 pm

गुरुग्राम में सोमवार रात ग्लोबल सिग्नेचर सोसाइटी में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट की दीवार गिर गई। इस हादसे में 7 मजदूरों की...

NCERT Deemed University Status | April 4 Current Affairs

April 4, 2026/
4:30 am

1 घंटे पहले कॉपी लिंक जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स...

बालाघाट में हनुमान जयंती पर निकली शोभायात्रा:साधक मोहित सोनी ने 40 किलो वजनी हनुमान स्वरूप धारण किया; 40 दिनों तक तपस्या की

April 2, 2026/
11:33 pm

बालाघाट जिले में हनुमान जयंती पर गुरुवार शाम को श्रद्धा और भक्ति के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इस वर्ष...

तेज गर्मी के बीच विदिशा में स्कूल टाइम बदला:सुबह 7:30 से लगेंगी नर्सरी से 12वीं तक की कक्षाएं, दोपहर 12 बजे छुट्टी होगी

April 6, 2026/
10:23 pm

विदिशा जिले में बढ़ती भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों के समय में बदलाव किया है। विद्यार्थियों...

ज्वेलरी दुकान से दो लाख के सोने के पेंडल चोरी:दमोह में खरीदारी के बहाने आया युवक, डिब्बी लेकर फरार; CCTV तलाश रही पुलिस

April 14, 2026/
8:40 pm

दमोह के नगर पालिका टाउन हॉल स्थित शिवम ज्वेलर्स में मंगलवार शाम एक अज्ञात युवक सोने के पेंडल से भरी...

authorimg

March 18, 2026/
9:28 pm

छोटे बच्चे खेलते-खेलते अक्सर चीजें मुंह में डाल लेते हैं. यहां तक कि खाने पीने की चीजें ही उनके लिए...

टी-20 वर्ल्डकप को 50 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा:जियो-हॉटस्टार पर लाइव स्ट्रीमिंग को एक समय में सबसे ज्यादा 6.05 करोड़ दर्शकों ने एक साथ देखा

March 4, 2026/
4:06 pm

भारत और श्रीलंका की मेजबानी में खेले जा रहे टी-20 वर्ल्ड कप को विभिन्न माध्यमों से 50 करोड़ लोगों ने...

राजस्थान के स्कूलों में आज जज पढ़ाएंगे:1400 जज लेंगे क्लास, 8 से 12वीं तक के स्टूडेंट्स का कॉमन सेशन होगा

April 7, 2026/
7:07 am

राजस्थान के स्कूलों में अब टीचर्स के साथ-साथ जजेज भी क्लास लेंगे। ‘एम्पावरिंग राजस्थान यूथ ए लीगल लिटरेसी इनेशेटिव-2026’ के...

arw img

April 6, 2026/
11:04 am

X गर्मी में भूख न लगने की समस्या से हैं परेशान? तो आजमाएं यह घरेलू नुस्खे   Health Tips: मौसम...

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

Varun Dhawan Daughter Disease; Hip Dysplasia Symptoms

Varun Dhawan Daughter Disease; Hip Dysplasia Symptoms
  • Hindi News
  • Lifestyle
  • Varun Dhawan Daughter Disease; Hip Dysplasia Symptoms | DDH Diagnosis Process

35 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

  • कॉपी लिंक

बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बेटी लारा को डेढ़ साल की उम्र में DDH डायग्नोज हुआ था। DDH यानी ‘डेवलपमेंटल डिस्प्लेसिया ऑफ हिप।’ यह कंडीशन हिप जॉइंट के पूरी तरह विकसित न हो पाने से बनती है।

वरुण ने बताया कि अर्ली डायग्नोसिस से उनकी बेटी की रिकवरी में मदद मिली। इस कंडीशन का जितनी जल्दी पता चल जाए, इलाज उतना ही आसान होता है। इसके लिए अवेयरनेस जरूरी है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज DDH कंडीशन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • इसके शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
  • किन बच्चों में DDH का रिस्क ज्यादा होता है?
  • इससे बचाव के उपाय क्या हैं?

सवाल- वरुण धवन की बेटी को हुई बीमारी DDH क्या है?

जवाब- इसकी डिटेल नीचे पॉइंटर्स में देखिए–

  • DDH एक जन्मजात कंडीशन है।
  • यह हिप जॉइंट ठीक से विकसित न होने पर बनती है।
  • इस वजह से जांघ की हड्डी का बॉल, हिप सॉकेट में सही से फिट नहीं हो पाता है।
  • इसके कारण हिप जॉइंट ढीला, अस्थिर (अनस्टेबल) या डिसलोकेट हो सकता है।

सवाल- DDH कितनी कॉमन बीमारी है? यह बच्चों को ही क्यों होती है?

जवाब- ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ के मुताबिक, भारत में यह कंडीशन हर 1000 में 2-3 बच्चों को होती है। यह सामान्य बीमारी है, लेकिन इसका पता अक्सर देर से चलता है।

यह जन्म से पहले के डेवलपमेंट से जुड़ी कंडीशन है। इसलिए बच्चों को होती है।

सवाल- DDH का पता कैसे चलता है?

जवाब- डॉक्टर इसके लिए मुख्य रूप से दो टेस्ट करते हैं, जिनसे हिप जॉइंट के ढीलेपन या डिसलोकेशन का पता चलता है-

  1. ऑर्टोलनी (Ortolani)- इसमें डॉक्टर बच्चे के हिप को प्रेस करके चेक करते हैं कि ये अनस्टेबल तो नहीं है।
  2. बारलो (Barlow)- इसमें बच्चे के हिप को अंदर की ओर दबाकर देखते हैं कि जॉइंट अपनी जगह से खिसक तो नहीं रहा है।

अगर डॉक्टर को DDH के लक्षण दिखते हैं तो इमेजिंग टेस्ट भी कराते हैं। शिशुओं के मामले में अल्ट्रासाउंड कराते हैं, क्योंकि उनकी हड्डियां पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती हैं। 6 महीने के बाद बच्चे का एक्स-रे भी किया जा सकता है।

सवाल- छोटे बच्चों में DDH के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?

जवाब- कूल्हे का जोड़ सही से विकसित नहीं होने के कारण एक पैर दूसरे से छोटा दिख सकता है। जांघ या हिप के स्किन फोल्ड्स असमान होते हैं। बच्चे को पैर फैलाने में परेशानी होती है। चलने पर लंगड़ाहट दिख सकती है। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या DDH जन्म से ही होता है या बाद में भी डेवलप हो सकता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • जन्म के समय मौजूद हो सकता है, पर ऐसा हमेशा नहीं होता है।
  • कुछ मामलों में कूल्हे का जोड़ जन्म के बाद धीरे-धीरे असामान्य तरीके से विकसित हो सकता है।
  • इसलिए इसे डेवलपमेंटल कंडीशन कहा जाता है यानी शारीरिक विकास के साथ बदलने वाली कंडीशन।
  • इसलिए शुरुआती महीनों में स्क्रीनिंग बहुत जरूरी होती है।
  • समय पर डायग्नोसिस से इलाज सरल और सफल होता है।

सवाल- अगर DDH का समय पर इलाज न हो तो क्या हो सकता है?

जवाब- अगर DDH का सही समय पर इलाज न हो तो–

  • कूल्हे का जोड़ स्थायी रूप से डिसलोकेट हो सकता है।
  • चलने में लंगड़ाहट हो सकती है। व्यक्ति परमानेंट लंगड़ा हो सकता है।
  • खड़े होने और चलने में बैलेंस बिगड़ सकता है।
  • कूल्हे में दर्द और जकड़न बढ़ सकती है।

सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन बच्चों में DDH का जोखिम ज्यादा होता है?

जवाब- कुछ बच्चों को DDH का रिस्क ज्यादा होता है, खासतौर पर जिनका जन्म ब्रीच पोजिशन (उल्टी पोजिशन) में होता है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- DDH का इलाज क्या है? क्या यह पूरी तरह ठीक हो सकता है?

जवाब- इसके लिए डॉक्टर्स ये ट्रीटमेंट देते हैं-

  • शुरुआती स्टेज में पैवलिक हार्नेस (खास तरह का बेल्ट/सपोर्ट) से कूल्हे को सही पोजिशन में रखा जाता है।
  • 6 महीने के बाद ब्रेस या कास्टिंग (हिप्स सही पोजिशन में रखने के लिए सपोर्ट डिवाइस) की जरूरत पड़ सकती है।
  • गंभीर मामलों में सर्जरी की जाती है।
  • जल्दी इलाज मिलने से पूरी तरह ठीक होने की संभावना होती है।
  • देर से डायग्नोसिस होने पर इलाज थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

सवाल- DDH का शुरुआती इलाज इतना जरूरी क्यों है?

जवाब- शुरुआती महीनों में हिप आसानी से सही पोजिशन में लाया जा सकता है, क्योंकि इस उम्र में हड्डियां डेवलपिंग स्टेज में होती हैं। समय से इलाज मिलने पर-

  • सर्जरी की नौबत नहीं आती है।
  • बच्चे का विकास सामान्य रहता है। वह आराम से चल-फिर सकता है।
  • दर्द व लंगड़ाहट जैसे कॉम्प्लिकेशन रोके जा सकते हैं।
  • भविष्य में जॉइंट डैमेज का रिस्क कम होता है।
  • देर होने पर जॉइंट सख्त और अस्थिर हो जाता है तो इलाज में मुश्किल होती है।

सवाल- क्या बड़े बच्चों या एडल्ट्स में भी यह समस्या हो सकती है?

जवाब- हां, DDH की समस्या बड़े बच्चों या एडल्ट्स में भी दिख सकती है।

  • यह आमतौर पर बचपन में अनडायग्नोज्ड रह जाने पर बाद में सामने आती है।
  • इसके कारण कम उम्र में ही ऑस्टियोआर्थराइटिस (जोड़ों की बीमारी) हो सकता है।

सवाल- पेरेंट्स को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि बच्चों को DDH से बचाया जा सके?

जवाब- बच्चे की टांगों को कसकर सीधा बांधने से बचें यानी सेफ स्वैडलिंग करें।

  • ‘न्यू बॉर्न चेकअप’ नियमित रूप से कराएं।
  • बच्चे के पैरों की मूवमेंट पर ध्यान दें।
  • किसी भी असामान्यता पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • बेबी कैरिअर्स में हिप-फ्रेंडली पोजिशन रखें (M-शेप में)।
  • अगर फैमिली हिस्ट्री हो तो एक्स्ट्रा स्क्रीनिंग करवाएं।
  • अवेयरनेस और समय पर स्क्रीनिंग सबसे जरूरी है।

……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- कोलेस्ट्रॉल पर 8 साल बाद आई नई गाइडलाइन: LDL 100 से नीचे रखें, 20 साल की उम्र से कराएं टेस्ट, जानें जरूरी बातें

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC) ने कोलेस्ट्रॉल पर नई गाइडलाइन जारी की है। यह अपडेट इसलिए अहम है, क्योंकि इसने कोलेस्ट्रॉल के पुराने पैरामीटर्स को पूरी तरह बदल दिया है। आगे पढ़िए…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.